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दुर्घटना में घायल व्यक्ति का तुरंत ईलाज उसका मौलिक अधिकार:प्रो.डडवाल
शिमला- “मौलिक अधिकारों के संरक्षण में न्यायपालिका की भूमिका” विषय पर उमंग फाउंडेशन द्वारा आयोजित 24वें साप्ताहिक वेबिनार में प्रदेश विश्वविद्यालय के विधि विभाग के प्रोफेसर ललित डडवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि दुर्घटना में घायल व्यक्ति का इलाज करने से कोई भी सरकारी या निजी अस्पताल इनकार नहीं कर सकता।
उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने इसे मौलिक अधिकार घोषित किया है। इसी तरह गरिमा पूर्ण ढंग से अंतिम संस्कार मृतक के मौलिक अधिकारों में शामिल है।
प्रो.ललित डडवाल ने भारतीय संविधान में वर्णित मौलिक अधिकारों की विस्तृत व्याख्या करते हुए बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 1989 में परमानंद कटारा बनाम भारत सरकार केस में फैसला दिया था कि दुर्घटना में घायल व्यक्ति को बिना कोई औपचारिकताएं पूरी किए नजदीक के सरकारी या निजी अस्पताल में इलाज कराने का मौलिक अधिकार है। इससे पहले आमतौर पर अस्पताल मरीजों का इलाज करने से इंकार कर देते थे।
उन्होंने कहा कि संविधान में वर्णित मौलिक अधिकारों के आधार पर न्यायपालिका ने अपने फैसलों के माध्यम से उन्हें काफी विस्तार दिया। न्यायपालिका द्वारा दिए गए अधिकारों को मानवाधिकार भी कहा जाता है।
इनमें वयस्क महिला एवं पुरुष को अपनी पसंद से विवाह का अधिकार, निजता का अधिकार, मैला ढोने की कुप्रथा से मुक्ति का अधिकार, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से महिलाओं को सुरक्षा का अधिकार, समलैंगिक एवं ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकार, विकलांगजनों को नौकरी में पदोन्नति में आरक्षण का आधिकार और इंटरनेट तक पहुंच का अधिकार प्रमुख रूप से शामिल है।
प्रो.डडवाल ने बताया कि छुआछूत को छोड़कर मौलिक अधिकारों के मामले आमतौर पर राज्य के विरुद्ध दर्ज होते हैं।
मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होने पर पहले पीड़ित को मुआवजा देने की व्यवस्था नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने इसकी भी शुरुआत की। अनेक मामलों में पीड़ित व्यक्तियों को सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी विभागों अथवा अन्य एजेंसियों से मुआवजा भी दिलवाया।
प्रोफ़ेसर ललित डडवाल ने कहा कि उमंग फाउंडेशन द्वारा दिव्यांग विद्यार्थियों, बेसहारा महिलाओं, बेघर बुजुर्गों,अनाथ बच्चों एवं अन्य कमजोर वर्गों के मौलिक अधिकारों के संरक्षण के लिए उनकी जनहित याचिकाओं पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अनेक महत्वपूर्ण निर्णय दिए हैं। इससे प्रदेश सरकार की नीतियों में बड़ा बदलाव आया।
कार्यक्रम की संयोजक और प्रदेश विश्वविद्यालय से बॉटनी में पीएचडी की छात्रा अंजना ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के साथ ही पड़ोसी राज्यों और छत्तीसगढ़,बिहार तथा झारखंड के लगभग 70 युवाओं ने हिस्सा लिया। विशेषज्ञ वक्ता प्रो. डडवाल ने युवाओं के सवालों के जवाब भी दिए
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LSD तस्करी मामले में अब हरियाणा से सप्लायर गिरफ्तार, आरोपी संदीप सप्लायर को बदले में देता था गांजा
शिमला: बीते दिनों न्यू शिमला क्षेत्र में पुलिस ने दो आरोपियों को करीब एक करोड़ रुपये की LSD (Lysergic Acid Diethylamide) ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया था। जिसमें एक युवक और युवती शामिल थे। पुलिस ने आरोपियों के पास से 11.57 ग्राम एलएसडी और 562 स्टैंप साइज स्ट्रिप्स बरामद की थी। पुलिस ने अब इस मामले में सप्लायर को गुरुग्राम (हरियाणा) से गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस के अनुसार आरोपी की पहचान नैवियल हैरिसन (27) ,केरल के रूप में हुई है। पुलिस ने जानकारी देते हुए कहा कि जांच के दौरान सामने आया की आरोपी नैवियल हैरिसन और आरोपी संदीप शर्मा काफी समय से एक दूसरे के संपर्क में थे और LSD की तस्करी कर रहे थे। पुलिस ने बताया कि आरोपी नैवियल हैरिसन और आरोपी संदीप शर्मा सिर्फ व्हॉटस्एप कॉल के माध्यम से बातचीत करते थे। आरोपी संदीप नैवियल हैरिसन को बदले में गांजा उपलब्ध करवाता था।
एएसपी हेडक्वार्टर अभिषेक ने मामले की पुष्टी की है। उन्होंने बताया कि मामले में आगामी जांच जारी है।
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हिमाचल प्रदेश में फिर बदलेगा मौसम, 15 और 16 मार्च को बारिश और तेज हवाओं का पूर्वानुमान
शिमला: हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर मौसम करवट लेने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार 15 और 16 मार्च के बीच प्रदेश के कई क्षेत्रों में मौसम खराब रहने की संभावना है। इस दौरान बिजली चमकने, तेज हवाएं चलने और बारिश का पूर्वानुमान जताया गया है।
विभाग के मुताबिक 17 और 18 मार्च को मौसम साफ रहने की उम्मीद है। हालांकि विभाग के मुताबिक 15 से 18 मार्च के बीच प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में मौसम के खराब रहने के भी आसार हैं। इस दौरान अधिकतर स्थानों पर बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हो सकती है।
मौसम विभाग का कहना है कि 14 मार्च की रात से पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की संभावना है, जिसके प्रभाव से प्रदेश में तापमान गिरावट दर्ज की जा सकती है।
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शिमला में 1 करोड़ रुपये का LSD बरामद, जानिए भारत में क्यों प्रतिबंधित है यह नशा और क्या है सजा ?
शिमला: बुधवार को पुलिस ने न्यू शिमला क्षेत्र में एक भवन से करीब एक करोड़ रुपये की LSD (lysergic acid diethylamide) ड्रग्स बरामद की है। बता दें कि भारत में एलएसडी प्रतिबंधित है। एलएसडी रखना, बेचना या तस्करी करना एक गंभीर अपराध है और मात्रा के आधार पर इसकी सजा तय होती है।
मामले में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है जिसमें एक युवक और युवती शामिल है। आरोपियों की पहचान प्रिया शर्मा, निवासी सिरमौर, संदीप शर्मा, निवसी पंजाब (मोगा) को रुप में हुई है। पुलिस ने बताया कि दोनों आरोपियों के पास कुल 11.57 ग्राम एलएसडी ड्रग्स बरामद की गई है। दोनों आरोपियों को खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
पुलिस ने बताया कि हमें गुप्त सूचना मिली थी कि राजधानी में एलएसडी की तस्करी हो रही है। सूचना के आधार पर पुलिस ने एक टीम का गठन किया और न्यू शिमला के हिम निवास में एक कमरे में ठहरे युवक और युवती की तालाशी ली। इस दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से एलएसडी के साथ 562 स्टैंप साइज सिट्रप्स बरामद किए। एएसपी हेडक्वार्टर अभिषेक ने मामले की पुष्टी करते हुए कहा कि आगामी जांच जारी है।
क्या होता है LSD ?
एलएसडी (Lysergic Acid Diethylamide) एक बेहद शक्तिशाली हैलूसिनोजेनिक (मतिभ्रम पैदा करने वाला) नशीला पदार्थ है, जो दिमाग की कार्यप्रणाली को प्रभावित करता है। यह एक सिंथेटिक रासायनिक ड्रग है, जो मस्तिष्क में मौजूद सेरोटोनिन रिसेप्टर्स पर असर डालकर व्यक्ति की सोच, भावनाओं और वास्तविकता की अनुभूति को बदल देता है। एलएसडी बहुत कम मात्रा में भी तेज असर दिखाता है। इसे आमतौर पर छोटे कागज़ के टुकड़ों (ब्लॉटिंग पेपर), टैबलेट, जेल टैब या तरल बूंदों के रूप में बेचा जाता है।
यह कैसे बनता है?
LSD एक सिंथेटिक (कृत्रिम) नशा है जिसे ‘लाइसर्जिक एसिड’ से बनाया जाता है। यह एसिड ‘अर्गट’ (Ergot) नामक एक फंगस (कवक) में पाया जाता है, जो राई और अन्य अनाजों पर उगता है। यह नशा इतना शक्तिशाली होता है कि इसकी खुराक माइक्रोग्राम (mcg) जैसे बेहद सूक्ष्म स्तर पर मापी जाती है।
सेवन करने पर क्या होता है?
एलएसडी का सेवन करने के बाद इसका असर आमतौर पर 30 से 60 मिनट में शुरू हो जाता है और 8 से 12 घंटे या उससे अधिक समय तक रह सकता है। इस दौरान व्यक्ति को एक तरह का “ट्रिप” अनुभव होता है, जिसमें उसकी वास्तविकता को समझने की क्षमता बदल जाती है।
सेवन करने वाले व्यक्ति को निम्न अनुभव हो सकते हैं:
- ऐसी चीजें देखना या सुनना जो वास्तव में मौजूद नहीं होतीं (हैलूसिनेशन)
- समय और स्थान की समझ में बदलाव
- भावनाओं में अचानक परिवर्तन
- वास्तविकता और कल्पना के बीच फर्क समझने में कठिनाई
- अत्यधिक डर, घबराहट और मानसिक तनाव हो सकता है।
- दिल की धड़कन तेज होना, शरीर का तापमान बढ़ना, हाई ब्लड प्रेशर, आंखों की पुतलियों का फैलना, मतली, भूख न लगना, शुगर बढ़ना, नींद न आना, मुंह सूखना और शरीर में कंपन या दौरे पड़ना।
भारत में एलएसडी के खिलाफ कानून
भारत में एलएसडी पूरी तरह प्रतिबंधित है और इसके खिलाफ कड़े प्रावधान Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act (NDPS Act), 1985 के तहत लागू हैं। इस कानून के तहत एलएसडी का उत्पादन, खरीद-फरोख्त, परिवहन, भंडारण या सेवन करना अपराध है।
सजा का प्रावधान
| मात्रा | सजा |
|---|---|
| छोटी मात्रा | अधिकतम 1 वर्ष की जेल या ₹10,000 तक जुर्माना |
| मध्यम मात्रा | 10 वर्ष तक की जेल और ₹1 लाख तक जुर्माना |
| व्यावसायिक मात्रा | 10 से 20 वर्ष तक कठोर कारावास और ₹1–2 लाख तक जुर्माना |
दोबारा अपराध करने पर सजा और भी कठोर हो सकती है।
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