एक लाख से कम आय वाले सभी नागरिक मुफ्त कानूनी मदद के पात्र

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कोई भी व्यक्ति जो कि निःशुल्क सहायता प्राप्त करने के इच्छुक हैं, एक प्रार्थना-पत्र सादे कागज पर अपने जिला या उप-मण्डल या उच्च न्यायालय मुफ्त कानूनी सहायता समिति को दें। उस प्रार्थना-पत्र में वह अपने साथ हुए अन्याय का संक्षिप्त विवरण या मुकद्दमें का संक्षिप्त विवरण, नाम, आय की सीमा इत्यादि का हवाला लिखें व इसके साथ अपनी वार्षिक आय के बारे में शपथ-पत्र संलग्न करें।

शिमला- पिछले कल अंतर्राष्ट्रीय बस अड्डा शिमला में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश, सीबीआई, बरिंद्र ठाकुर ने की! उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक जिसकी समस्त स्त्रोतों से आय प्रति वर्ष एक लाख रुपये से कम हो, निःशुल्क विधिक सेवा के पात्र हैं।

संबंधित विधिक सेवा समिति के अध्यक्ष प्राधिकरण के सह-अध्यक्ष के अनुमोदन से किसी अन्य उपयुक्त मामले में भी मुफ्त विधिक सहायता प्रदान कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सामाजिक व शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग के अनुसूचित जातियों, जनजातियों, महिला और बच्चे भी मुफ्त कानूनी सहायता प्राप्त करने के पात्र हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी व्यक्ति जो कि निःशुल्क सहायता प्राप्त करने के इच्छुक हैं, एक प्रार्थना-पत्र सादे कागज पर अपने जिला या उप-मण्डल या उच्च न्यायालय मुफ्त कानूनी सहायता समिति को दें। उस प्रार्थना-पत्र में वह अपने साथ हुए अन्याय का संक्षिप्त विवरण या मुकद्दमें का संक्षिप्त विवरण, नाम, आय की सीमा इत्यादि का हवाला लिखें व इसके साथ अपनी वार्षिक आय के बारे में शपथ-पत्र संलग्न करें।

अगर व्यक्ति पिछड़ी जाति या जनजाति या अनुसूचित जाति से संबंध रखता हैं उसका प्रमाण-पत्र साथ लगाएं। यह प्रार्थना-पत्र इत्यादि, जिला एवं सत्र न्यायाधीश के कार्यालय में दाखिल करें, क्योंकि जिला व उप-मण्डल स्तर पर की समितियों में ही प्रार्थना पत्र पर विचार होगा व अगर व्यक्ति निःशुल्क सहायता का पात्र पाया गया हो तो उसे निःशुल्क कानूनी सहायता प्रदान की जाएगी।

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