धूमल का विधानसभा अध्यक्ष पर गंभीर आरोप: अध्यक्ष ने कहा कि मैं नियम बदल सकता हूॅ और संविधान भी

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शिमला- हिमाचल प्रदेश विधानसभा के धर्मशाला में चल रहे शीत सत्र के तीसरे दिन बुधवार को प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष प्रो0 प्रेम कुमार धूमल ने विधानसभा अध्यक्ष पर रोप लगाया कि जब सदन में चर्चा हो रही थी और तो विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि मैं नियम बदल सकता हूॅ और संविधान भी बदल सकता हूॅ। धूमल ने कहा कि इन बातों पर आज कांग्रेस सरकार ने मुहर लगा दी और आपातकाल की तरह लोकतंत्र का गला घोट दिया।

धूमल ने कहा कि सदन में यह कहना कि यह सदन की पहली घटना है यह सरासर गलत है और सदन को गुमराह किया जा रहा है। सदन को गुमराह करने के लिए सच को छिपाया गया है! उन्होंने कहा कि वर्ष 1979 में अध्यक्ष पद के लिए स्व0 टीएस नेगी का चुनाव इसी प्रकार हुआ था।

उन्होंने कहा कि ऐसा कहना कि पूर्व में इस प्रकार का हंगामा पहले सदन में नहीं हुआ गलत है। आरोप लगते हुए कहा कि पिछली विधान सभा में कांग्रेस पार्टी के इन्हीं सदस्यों ने सदन में कागज फाड़ कर फैंके थे वह इतना हंगामा किया कि उन्होंने भाजपा के एक सदस्य की अंगुली तोड़ दी थी।

उन्होंने यह भी कहा कि यहां तक कांग्रेस के सदस्य मेरे टेबल के सामने आकर मेरा टेबल बजाते थे। आज कांग्रेस के सदस्य सदन की गरिमा की बात कर रहे हैं। जबकि सच्चाई से प्रदेश का मीडिया और जनता तक वाकिफ है। जो आज सदन में मंत्री मौजूद है वो वेल आॅफ द हाउस में आकर मेरे टेबल के सामने असभ्य गीत गाते थे। फिर भी भाजपा सरकार ने इस बात को यह कहकर अनदेखा कर दिया कि लोकतंत्र में यह सब कुछ होता रहता है।

विपक्ष के नेता ने कहा कि सदन में संसदीय कार्यमंत्री जिस प्रकार नेशनल लीडर बिट्ठल भाई पटेल की बात कर रहे थे वो कांउसिल के अध्यक्ष थे और शिमला के कांउसिल चैम्बर में उन्होंने अध्यक्षता की थी। मौजूदा कांग्रेस सरकार ने आज आपातकाल की यादें ताजा कर दी है। हमारे सदस्यों को सदन से निलंबित कर दिया गया है। सदन में इस मामले को उठाया जाएगा और यदि सदन में सदस्यों के हक में फैसला नहीं आया तो विपक्ष उसका कड़ा विरोध करेगा। उन्होंने कहा कि आज विपक्ष के प्रति सदन में अध्यक्ष का जो व्यवहार रहा और जो नियम व संविधान को बदलने की उन्होंने बातें की है उनके खिलाफ अविश्वास संकल्प लाया गया है।

नेता विपक्ष ने यह भी कहा कि यह गंभीर समस्या है और नियमों के विपरीत निर्णय देने के कारण सदन की कार्यवाही को प्रभाावित किया गया है। धूमल ने विधान सभा सदस्यों द्वारा आग्रह कर कहा कि नियम के विपरीत निर्णय न लें लेकिन अध्यक्ष महोदय ने कहा कि मैं नियम बदल सकता हूॅं। अविश्वास संकल्प में पिछले चार सालों में विधान सभा विशेषकर ई-विधान में की गई भर्तियों एवं खरीद आदि में नियमों का उल्लघन भी शामिल है। धूमल ने कहा कि इसलिए हमने अध्यक्ष हिमाचल प्रदेश विधान सभा को उनके पद से हटाने के लिए संकल्प प्रस्तुत किया है।

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