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करसोग उपमंडल के सरत्यौला पंचायत में सड़क न होने से बीमार महिला को पालकी पर ले जाते लोग।

लोगों को राशन, सिलेंडर और रोजमर्रा जरूरत की चीजों को घोड़ों या पीठ पर लाद कर घर तक पहुंचाना पड़ता है,पानी की सप्लाई भी आती है कभी कभार

मंडी- उपमंडल करसोग के सरत्यौला पंचायत के लोगों का आज तक सड़क सुविधा नहीं मिल पाई है। इस पंचायत के गांवों में 800 के करीब आबादी है, जिसे दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। ग्रामीणों को बीमार होने की सूरत में पालकी से सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। कुछ रोगी वक्त पर उपचार न मिलने के कारण आधे रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।

सरत्यौला पंचायत के बालू, पलैड, चिमुतिर, पराड़ी, चलाहौणी, मांजू मगांण गांव के ग्रामीण वार्ड मेंबर व अन्य लोगो ने बताया कि सरकार से बार-बार गुहार लगाने के बाद भी सरत्यौला पंचायत सड़क से नहीं जुड़ पाई। पंचायत के गांवों में रोगियों को प्रथम उपचार के लिए कोई उप-स्वास्थ्य केंद्र भी नहीं खोला गया। वहीं मिडल तक तो स्कूल की व्यवस्था है, उससे आगे पढ़ने के लिए स्कूली बच्चों को मांजू से माहूंनाग स्कूल पहुंचने के लिए सात किलोमीटर पैदल सफर तय करना पड़ता है।

ग्रामीणों का कहना है कि चुनावों के वक्त प्रतिनिधि बड़े-बड़े वादे करते हैं। चुनाव संपन्न हो जाने के बाद यह अपने वायदे भूल जाते हैं। कांग्रेस व भाजपा दोनों ही सरकारें सरत्यौला पंचायत को सड़क जैसी सुविधा नहीं दे पाई। लोगों को राशन, सिलेंडर और रोजमर्रा जरूरत की चीजों को घोड़ों या पीठ पर लाद कर घर तक पहुंचाना पड़ता है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से आग्रह किया है कि जल्द से जल्द इस पंचायत को मूलभूत सुविधाओं से जोड़ा जाए, नहीं तो ग्रामीणों के पास गांव से पलायन करने के सिवा कोई और रास्ता नहीं दिखाई दे रहा।

पानी की सप्लाई भी आती है कभी कभार

सरत्यौला पंचायत के बाढू, चलौनी, पलैड़, गांव में कई महीनों तक लोगों के नल से एक भी बूंद पानी की नहीं टपकती। पंचायत की ग्राम सभाओं में प्रस्ताव पास करके आईपीएच विभाग को कई बार अवगत करवाया गया। लेकिन आईपीएच विभाग इस दिशा में कोई भी गौर नहीं कर रहा है। जिससे रोजमर्रा की जरूरतों में पानी न मिलने से कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

दीये की तरह जलते हैं बिजली बल्ब

सरत्यौला पंचायत के कुछ गांवों में विद्युत का भी संकट है। यहां पर लाइट की रोशनी दीये से भी कम होती है। जिससे स्कूली बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है। लो वोल्टेज के कारण कोई भी विद्युत उपकरण नहीं चल पाते। जिस कारण आटा पिसाई, धान पिसाई आदि के लिए 6-7 किलोमीटर दूर पहुंचना पड़ता है।

क्या कहते है सीपीएस मनसाराम

विधायक एवं सीपीएस मनसा राम ने कहा कि सरत्यौला तक सड़क की डीपीआर तैयार है। एफआरए में यह केस भेजा गया है। जैसे ही एफआरए की मंजूरी मिलती है, सरत्यौला को सड़क से जोड़ दिया जाएगा। पानी की समस्या दूर करने के लिए 11 करोड़ की लिफ्ट स्कीम परलोग खड्ड से माहुंनाग का कार्य चला हुआ है।

इनसेट

पूर्व विधायक हीरा लाल ने कहा कि दरल तक सड़क भाजपा के समय में निकली है। भाजपा के समय में ही बस लगी है। कांग्रेस सरकार इन चार सालों में एफआरए प्राप्त नहीं कर पाई। जोकि एक चिंता का विषय है। पानी की किल्लत दूर करने के लिए परलोग खड्ड से माहूंनाग लिफ्ट स्कीम का कार्य युद्ध स्तर पर होना चाहिए। जिन गांवों में बिजली की लो वोल्टेज है, वहां पर ट्रांसफार्मर लगने चाहिए।

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