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चित्र:अमर उजाला

मंडी जिला मंडी के उपमंडल करसोग की बिंदला पंचायत में आज भी झूले से जिंदगी चल रही है। जान हथेली पर रखकर लोग सतलुज नदी पर बने झूले से इसे आर-पार करते हैं। सरकार और लोग निर्माण विभाग की अनदेखी से बिंदला पंचायत के लोग परेशानियां झेल रहे हैं।

हालात यह हैं कि आस पड़ोस की पंचायतों के लोगों ने इस पंचायत में झूला न चढ़ने के डर से शादी ब्याह में आना जाना तक छोड़ दिया है। आजादी के सात दशक बीत जाने के बाद भी तहसील करसोग में पड़ने वाली बिंदला पंचायत सड़क सुविधा से नहीं जुड़ पाई है। इस पंचायत के तहत आधा दर्जन से अधिक गांवों के 2500 के लगभग लोगों को सरकार की अनदेखी के चलते मूलभूत सुविधाओं से महरूम रहना पड़ रहा है।

पंचायत के गांव मरौला, खड्ड, डबारू, रोपड़, खडैहन, फुलू, करैल गांवों के लोग जान जोखिम में डालकर झूले के सहारे सतलुज नदी को पार करने को विवश हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार भले ही प्रदेश में सड़कों के जाल बिछाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है। असलियत में आज भी सैकड़ों परिवार सड़क सुविधा से महरूम हैं।

हालांकि सरकार ने 1998 से बिंदला पंचायत को सड़क से जोड़ने की कवायद शुरू की थी। वर्ष 2007 तक शाकरा गांव से कुछ दूरी तक सड़क का निर्माण भी हुआ लेकिन 2007 के बाद इस मार्ग का कार्य पूरी तरह ठप पड़ा है। जिसके चलते ग्रामीणों की रोजमर्रा की चीजें झूले में डाल कर घर ले जानी पड़ती हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि शीघ्र ही सड़क का निर्माण न किया तो उन्हें आंदोलन का रास्ता अख्तियार करना पड़ेगा। उधर, लोक निर्माण विभाग के अधिशाषी अभियंता जितेंद्र वैद्य ने कहा कि फोरेस्ट क्लीयरेंस न मिलने के कारण परेशानी पेश आ रही है। जल्द ही तमाम औपचारिकताएं पूरी करने के बाद कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

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