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समाज की दिशा और दशा बदलने वाली जनकल्याणकारी नीतियां और कार्यक्रम युपीये सरकार की देन, नाम बदल मोदी सरकार ले रही श्रेय: कांग्रेस

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देश में नोटबन्दी के इस फैसले से किसानो, बागवानों, दिहाडीदारों लगभग हर वर्ग को असुविधा हुई है तथा विशेष तौर पर प्रदेश का पर्यटन व्यवसाय लगभग शुन्य ही हो गया है, जिससे लोगों की आर्थिकी को भारी नुकसान देखने को मिला है।

शिमला- आज प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा आयोजित प्रादेशिक जनजागरण अभियान विकास पद यात्रा “पंचायत एक, विकास अनेक“ कार्यक्रम की के तहत ठियोग विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के सम्मेलन का आयोजन किया गया, इससे पहले प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा विधानसभा क्षेत्र जुब्बल कोटखाई के हाटकोटी में जिला परिषद वार्ड नकराडी से प्रादेशिक जनजागरण अभियान विकास पद यात्रा “पंचायत एक, विकास अनेक“ कार्यक्रम का शुभारन्भ किया था।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ठाकुर सुखविन्दर सिंह सुक्खू ने कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि देश में जितनी भी जनकल्याणकारी नीतियां व कार्यक्रम चलाये गये हैं जिससे समाज की दिशा और दशा बदली वह सब कांग्रेस की सोच व पूर्व युपीये सरकार की देन हैं, जिसमें मनरेगा जैसी मत्वकांक्षी योजना, भ्रष्टाचार से लड़ने का अह्म हथियार सूचना का अधिकार, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा बिल, शिक्षा का अधिकार, राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवाऐं इत्यादी अनेकों योजनाऐं कांग्रेस नेतृत्व वाली पूर्व युपीए सरकार द्वारा चलाई गई है और केन्द्र की मोदी सरकार ने इन्हीं योजनाओं का नाम बदल कर इन्हें शुरू किया है।

कांग्रेस ने कहा कि मोदी सरकार के ढाई साल के कार्यकाल में देश में कुछ भी नया नही हुआ है। लोकसभा चुनावों में दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश के कोने-कोने में गरज कर देश की जनता से जो वायदे कर रहे थे कि अच्छे दिन आऐगें, काला धन विदेशों से वापस लाएगें, हर व्यक्ति के खाते में 15-15 लाख रूपये जमा करना, हर वर्ष 2 करोड़ रोजगार का सृजन करेगें, मंहगाई कम करेंगें इत्यादी परन्तु ऐसा कुछ भी देखने को नही मिला न ही अच्छे दिन आये, न विदेशों से कालाधन वापस आया, न 15-15 लाख जमा हुए, न मंहगाई कम हुई और रोजगार सृजन लाखो का आंकडा तक भी न छु पाया।

कांग्रेस कहा कि प्रधानमंत्री ने आम जनता से 50 दिन का समय मांगा है पार्टी ने कहा कि शायद अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश के हर नागरिकों के खाते में 15-15 लाख रूपये जमा करा देगें।

कांग्रेस ने यह भी कहा कि 8 नवम्बर 2016 को आधी रात से प्रधानमंत्री द्वारा देश में नोटबन्दी का फैसला बहुत ही जल्दवाजी और बिना तैयारी के लिया गया है और देश की मुद्रा में 86 प्रतिशत 500 और 1000 रूपयें के नोट बारह कर दिये, जिससे पूरे देश के अन्दर अफरा-तफरी का मौहाल बना और लोगों को भारी परेशानी उठानी पडी। इस फैसले को लागू हुए 26-27 दिन हो गये है और आज भी देश में हालत बहुत खराब बने हुए हैं और आज भी बैंकों और एटीएम के बाहर लोगों की लम्बी-लम्बी लाईने लगी है और लोग अपना ही पैसा नही मिल पा रहा है। इन 26-27 दिनों में तकरिबन 100 लोग अपनी जान गंवा चुकें हैं और देश का हर वर्ग व हर नागरिक परेशान है और अपना ही पैसा लेने के लिए भूखा-प्याया लाईनों में लगा है।

नोटबन्दी का फैसले पर कांग्रेस ने कहा कि यह फैसला बिना तैयारियों के लिया गया है जिसकी वजह से आम जनता को परेशान होना पड़ रहा है, इस फैसले से देश में बरोजगारी बढ रही है लाखों लोगो को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड रहा है और हर तरह का व्यपार 50 प्रतिशत तक गिर गया है। इससे देश की अर्थव्यवस्था को बहुत बडा झटका लगा है और देश की जीडीपी घटेगी। उन्होंनें कहा कि अभी लोगो को अपना वेतन मिला है, जिसे लोग नही ले पा रहें हैं और इस फैसले से देश के हर वर्ग को चाहे किसान, बागवान, मजदूर, दिहाडीदार, छोटे व्यपारी, आम नागरिक सबको परेशानी हो रही है।

कांग्रेस ने कहा कि प्रधानमंत्री और भाजपा ने अपने खास लोगों से नोटबन्दी का जिक्र पहले ही कर दिया था जिसके परिणाम स्वरूप भाजपा ने अपने काले धन को सफेद करने के लिए पूरे देश में अरबो रूपये की जमीन कैश और बैंकों के माध्यम से अपने संगठन के लिए पहले ही खरीदी ली है। प्रधानमंत्री ने जिस मकसद से ये फैसला लिया गया था, परन्तु 70 से 80 प्रतिशत लोगों ने पहले ही अपने काले धन का सफेद कर दिया है चाहे वो सोना खरिद कर या डालर खरिदकर। जिससे सरकार के कालेधन का इस्तेमाल को रोकने की मुहिम को फेल हो गई है।

नोटबन्दी के फैसले पर सरकार और आरबीआई हर दिन एक नई घोषणा कर रही है परन्तु वास्तविक में जमीनी स्तर पर इन घोषणाओ को कोई असर नही दिख रहा है। सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए संसद का सामना करना चाहिए और प्रधानमंत्री को चाहिए की भाषणवाजी करने के बजाये उन्हें संसद में इसका जवाब देना चाहिए। नोटबन्दी के फैसले को लेकर सरकार का जो कुप्रबंध है जिससे देश के आम नागरिको को मानसिक एवं शारीरिक पीडा से गुजरना पड रहा है के लिए देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए।

कांग्रेस ने कहा कि कालेधन का उपयोग रोकने की मंशा से लिये गये नोट बन्दी के इस फैसले का हम समर्थन करते है, परन्तु इस फैसले देश के आम नागरिकों को हो रही असुविधा का हम पुरजोर विरोध करते हैं। नोटबन्दी का ये फैसला लेने से कोई भी तैयारी नही की गई न ही पर्याप्त नोटो की छपाई की गई न ही बैंकों तक नये नोट पंहुचाये और न ही एटीएम को दुरूस्त किया गया बस बिना सोचे-समझें अधुरी तैयारी के ही नोटबन्दी का फैसला देश पर थोपा गया, जिससे आम जनता को भारी परेशानी हो रही है।

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री को मीडिया मे वाह-वाही लुटने के बजाय देश के आम नागरिकों को जो असुविधा हो रही है उसकी जिम्मेवारी लेते हुए इसे सुधारने के लिए कडे कदम उठाने चाहिए और सरकारी फैसले सिर्फ मीडिया में दिखाने के बजाये इन्हें जमीनी स्तर पर भी लागू करना चाहिए।

प्रदेश में नोटबन्दी के इस फैसले से किसानो, बागवानों, दिहाडीदारों लगभग हर वर्ग को असुविधा हुई है तथा विशेष तौर पर प्रदेश का पर्यटन व्यवसाय लगभग शुन्य ही हो गया है, जिससे लोगों की आर्थिकी को भारी नुकसान देखने को मिला है। कांग्रेस ने कहा कि यह कार्यक्रम “पंचायत एक, विकास अनेक“ प्रदेश की सभी 251 जिला परिषद वार्डो, 52 नगर पंचायतों निकायों सभी 3236 पंचायतों में चलाया जाएगा तथा इस कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस का कार्यकर्ता आम लोगों को कांग्रेस की विचारधारा, प्रदेश कांग्रेस की चार साल की उपलब्धियों, प्रदेश में हो रहे अभूतपूर्व विकास कार्यों तथा पूर्व युपीए सरकार द्वारा देश हित मे चलाई गई योजनाओं से अवगत करवाएगें।

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10 कार्यकर्ताओं के निष्कासन पर ऐबीवीपी का धरना प्रदर्शन,विश्वविद्यालय पर एक तरफा कार्यवाही का लगाया आरोप

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शिमला– आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इकाई ने विश्वविद्यालय में पिंक पेटल्स चौक पर धरना प्रदर्शन किया । इकाई सचिव अंकित चंदेल ने जानकारी देते हुए बताया की पिछले कल विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से एक तनशाही फैसला निकाला गया जिसमें 10 ऐबीवीपी कार्यकर्ताओं को विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया गया।

गौरतलव है की पिछले 11 जुलाई को विद्यार्थी परिषद ने कैम्पस मे धरना प्रदर्शन किया था जिसके चलते 10 छात्रों का निष्काशन कर दिया है।

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धरने को संबोधित करते हुए इकाई सचिव अंकित चन्देल ने बताया की एक तरफ जब कर्मचारियों द्वारा कुलपति कार्यालय में नारेबाजी की जाती है तो उन कर्मचारियों क खिलाफ कुलपति साहब की कोई प्रतिक्रिया नही आती, परन्तु जब ऐबीवीपी कैम्प्स में धरना प्रदर्शन करते है तो उन्हें तुरन्त प्रभाव से निष्कासित कर दिया जाता है जोकि सरासर एकतरफा कार्यवाही है।

चन्देल ने कहा कि विश्वविद्यालय अपनी कमियों को छुपाने क लिए तरह-2 के हथकण्डे अपना रहा है। जहाँ अधूरे परिणामों की वजह से प्रदेश भर के छात्र परेशानी में हैं वहीँ प्रशासन अपने मुंह मिया मिठु बनने में कोई कसर नही छोड़ता।

ABVP Protest at HPU over suspension of members

चन्देल ने कहा कि सभी को ज्ञात है विवि में नौ महीने में पीएचडी (P.hD) और एमसीऐ (MCA) में फर्जी तरीके से प्रवेश के मामले सामने आते है, और इन सभी गडवड़ियों के विरोध करने वाले छात्र संगठनों की आवाज को दबाने का प्रयास विश्वविद्यालय प्रशासन् कर रहा है।

धरने क माध्यम से प्रशासन को चेताते हुये परिषद ने मांग उठाई विश्वविद्यालय अपना काम करे न कि छात्र संगठनों के कार्य मे दखल दे। ऐबीवीपी ने चेतावनी दी है कि जल्द से जल्द परिषद कार्यकर्ताओं का निष्कासन् वापिस नही करता है तो प्रदेश स्तरीय आंदोलन करने में कोई गूरेज़ नही होगाI ऐबीवीपी ने साथ ही यूजी UG के सभी परीक्षा परणामों को पूरा करने की मांग भी प्रशासन के सामने रखी है।

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सेब के सर्मथन मुल्य में मात्र 50 पैसे बढ़ौतरी बागवानों से भद्दा मजाकः राठौर

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शिमला -हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा सेब के सर्मथन मुल्य में की गई मात्र 50 पैसे की बढ़ौतरी को बागवानों के साथ किया गया भद्दा मजाक करार दिया है।

आज शिमला से जारी प्रेस वयान में कुलदीप सिंह राठौर ने बताया कि वर्तमान समय में जब बागवानों को अपनी फसल तैयार करने के लिए भारी मंहगाई का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि जी.एस.टी के चलते सेब से संबंधित पैकिंग से लेकर फफूंद नाशक दवाईयां एवं अपनी फसलों को मंण्ड़ियों तक पहुॅचाने के लिए किराया भी कई गुणा बढ़ गया है इसके चलते सेब के सर्मथन मुल्य कम से कम 10 रूपये होना चाहिए।

कुलदीप राठौर ने कहा कि सेब इलाकों में बहुत जगह सड़कों की हालत खराब पड़ी है और सेब को मण्ड़ियों तक पहुॅचाने वाले ट्रक व गाड़ियों के मालिक खराव सडकों पर गाडियाॅं भेजने को मना कर रहे हैं इसलिए सरकार को चाहिए कि ख़राब सडकों को जल्दी से जल्दी ठीक करवायें।

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हिमाचल सरकार पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे : कर्मचारी नेता

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शिमला -हिमाचल प्रदेश कर्मचारी महासंघ के पूर्व अध्यक्ष सुरेन्द्र मनकोटिया, पूर्व सयुक्त सचिव सेन राम नेगी,पूर्व प्रेस सचिव हरीश गुलेरिया, गैर शिक्षक महासंघ के महासचिव दीप राम शर्मा ,इंदिरागांधी आयुर्विज्ञान मेडिकल कॉलेज के पूर्व महासचिव आत्मा राम शर्मा ने प्रदेश सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद करने के निर्णय की आलोचना करते हुए इसे कर्मचारी विरोधी बताया है।

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि जब जब प्रदेश में भाजपा सरकार सत्ता में आई तब तब प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद किया गया,जो कि कर्मचारियों के साथ अन्याय है।

कर्मचारी नेताओं ने जयराम सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि भाजपा कभी भी कर्मचारी हितेषी नही रही है।पूर्व में धूमल सरकार ने भी सत्ता में आते ही इसे बंद किया था अब बर्तमान में जयराम सरकार ने भी ऐसा ही किया है।उनका कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रख कर इसे खोला था।इसे खोलने का एक ही उद्देश्य था कि जो सरकार के किसी भी गलत फैंसले को चुनौती देने के लिए स्वतंत्र था और उसे जल्द और सस्ता न्याय मिल जाता था।

नेताओं का कहना है कि अब ऐसा नही होगा।किसी भी कर्मचारी को न्याय के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना होगा जहां पहले ही हजारों मामले सुनवाई के लिए लंबित पड़े है।

कर्मचारी नेताओं ने मुख्यमंत्री जयराम से आग्रह किया है कि वह इस मामले पर पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे। इसे उन्हें अपनी किसी भी प्रतिष्ठा का प्रश्न नही बनना चाहिए।

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