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हिमाचल में एचआईवी पीडि़त गर्भवती महिलाओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी, कांगड़ा में सबसे अधिक पीड़ित

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लाहुल स्पीति जिला में सबसे कम एचआइवी पीड़ित हैं,पिछले व इस वर्ष करीब 50 बच्चे ,एचआईवी बीमारी की गिरफ्त में आ गए हैं।

शिमला- हिमाचल में जच्चा बच्चा भी एचआईवी व एड्स से सुरक्षित नहीं हैं। प्रदेश में 5 साल से कम उम्र के 11 बच्चे व नवजात भी इस जानलेवा बीमारी की गिरफ्त में आ गए हैं। वहीं, 12 गर्भवती महिलाओं के एचआइवी पॉजीटिव होने की भी पुष्टि हुई है। ऐसे में हर गर्भवती महिला का एचआइवी टेस्ट करवाना जरूरी हो गया है जिससे नवजात को एचआइवी की गिरफ्त में आने से बचाया जा सकता है।

प्रदेश में एचआईवी पीडि़त गर्भवती महिलाओं की संख्या साल दर साल बढ़ने लगी है जिनसे उनके नवजात की जान पर भी बन आई है। यदि कोई महिला गर्भवती है तो पहले से नौ महीने तक कभी भी अपना एचआईवी टेस्ट करवाए। जागरूक न होने की वजह से गर्भवती महिलाएं अपने साथ बच्चे की जान से भी खिलवाड़ कर रही हैं।

प्रदेश में 45 जगह एचआईवी टेस्ट करवाने की सुविधा राज्य एड्स कंट्रोल सोसायटी की ओर से मिल रही है। किसी भी केंद्र में पहुंच कर महिलाएं जांच करवा सकती हैं। यदि एचआईवी के लिए गर्भवती महिला की रिपोर्ट पॉजीटिव आती है तो चिकित्सक कम से कम उसके बच्चे को इस वायरस से बचा सकते हैं। इसके लिए गभर्वती महिला का एआरटी में उपचार शुरू किया जाता है। एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) में मिलने वाले दवा व उपचार से बच्चा सुरक्षित रहता है। हिमाचल में इस साल अब तक एचआईवी व एड्स के 294 मामले सामने आए है। बीते वर्षो से कुल मामले 8853 हैं जिनमें से 3335 को एड्स है। अब तक करीब 12 लाख लोगों ने एचआइवी टेस्ट करवाया है।

कांगड़ा में सबसे अधिक एचआइवी पीड़ित

कांगड़ा में सबसे अधिक व लाहुल स्पीति जिला में सबसे कम एचआइवी पीड़ित हैं। प्रदेश में यह गंभीर रोग लगने का सबसे बड़ा कारण असुरक्षित यौन संबंध बताया जा रहा है। गर्भवती महिलाओं को यह रोग होने का भी यही कारण है। रक्त से एचआइवी पीड़ित होने के यहां कम मामले हैं।

प्रदेश में एचआईवी व एड्स रोगी

जिला संख्या
कांगड़ा 2533
हमीरपुर 1790
ऊना 944
शिमला 857
मंडी 793
बिलासपुर 662
सोलन 447
चंबा 197
कुल्लू 185
सिरमौर 128
किन्नौर 28
लाहुल स्पीति 7
गैर हिमाचली 282

एचआइवी व एडस रोगियों के उपचार के लिए सुविधा

नाम केंद्र
टीआइपी 18
एआरटी सेंटर 3
लिंक आर्ट सेंटर 7
आइसीटी सेंटर 45
मोबाइल आइसीटीसी 2
एसटीआई/आरटीआई क्लीनिक्स 20
ब्लड बैंक 18
बीसीएसयू 3
ब्लड डोनेशन मोबाइल वैन 1
ब्लड ट्रांसपोर्टेशन वैन 4

एचआईवी टेस्ट करवाए हर गर्भवती महिला

प्रत्येक गर्भवती महिला एचआईवी टेस्ट करवाए। ऐसा न करके वे अपने साथ बच्चे की जान को भी जोखिम में डाल रही हैं। राज्य में गर्भवती महिलाओं में एचआईवी के मामले बढ़ने लगे है जिससे पिछले व इस वर्ष करीब 50 बच्चे इस बीमारी की गिरफ्त में आ गए हैं। इसलिए सौ प्रतिशत गर्भवती महिलाएं टेस्ट करवाएं ताकि बच्चों को बचाया जा सके।

डॉ. विनय, निगरानी एवं मूल्यांकन अधिकारी, राज्य एड्स कंट्रोल सोसायटी।
राज्य एड्स कंट्रोल सोसायटी

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10 कार्यकर्ताओं के निष्कासन पर ऐबीवीपी का धरना प्रदर्शन,विश्वविद्यालय पर एक तरफा कार्यवाही का लगाया आरोप

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शिमला– आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इकाई ने विश्वविद्यालय में पिंक पेटल्स चौक पर धरना प्रदर्शन किया । इकाई सचिव अंकित चंदेल ने जानकारी देते हुए बताया की पिछले कल विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से एक तनशाही फैसला निकाला गया जिसमें 10 ऐबीवीपी कार्यकर्ताओं को विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया गया।

गौरतलव है की पिछले 11 जुलाई को विद्यार्थी परिषद ने कैम्पस मे धरना प्रदर्शन किया था जिसके चलते 10 छात्रों का निष्काशन कर दिया है।

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धरने को संबोधित करते हुए इकाई सचिव अंकित चन्देल ने बताया की एक तरफ जब कर्मचारियों द्वारा कुलपति कार्यालय में नारेबाजी की जाती है तो उन कर्मचारियों क खिलाफ कुलपति साहब की कोई प्रतिक्रिया नही आती, परन्तु जब ऐबीवीपी कैम्प्स में धरना प्रदर्शन करते है तो उन्हें तुरन्त प्रभाव से निष्कासित कर दिया जाता है जोकि सरासर एकतरफा कार्यवाही है।

चन्देल ने कहा कि विश्वविद्यालय अपनी कमियों को छुपाने क लिए तरह-2 के हथकण्डे अपना रहा है। जहाँ अधूरे परिणामों की वजह से प्रदेश भर के छात्र परेशानी में हैं वहीँ प्रशासन अपने मुंह मिया मिठु बनने में कोई कसर नही छोड़ता।

ABVP Protest at HPU over suspension of members

चन्देल ने कहा कि सभी को ज्ञात है विवि में नौ महीने में पीएचडी (P.hD) और एमसीऐ (MCA) में फर्जी तरीके से प्रवेश के मामले सामने आते है, और इन सभी गडवड़ियों के विरोध करने वाले छात्र संगठनों की आवाज को दबाने का प्रयास विश्वविद्यालय प्रशासन् कर रहा है।

धरने क माध्यम से प्रशासन को चेताते हुये परिषद ने मांग उठाई विश्वविद्यालय अपना काम करे न कि छात्र संगठनों के कार्य मे दखल दे। ऐबीवीपी ने चेतावनी दी है कि जल्द से जल्द परिषद कार्यकर्ताओं का निष्कासन् वापिस नही करता है तो प्रदेश स्तरीय आंदोलन करने में कोई गूरेज़ नही होगाI ऐबीवीपी ने साथ ही यूजी UG के सभी परीक्षा परणामों को पूरा करने की मांग भी प्रशासन के सामने रखी है।

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सेब के सर्मथन मुल्य में मात्र 50 पैसे बढ़ौतरी बागवानों से भद्दा मजाकः राठौर

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शिमला -हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा सेब के सर्मथन मुल्य में की गई मात्र 50 पैसे की बढ़ौतरी को बागवानों के साथ किया गया भद्दा मजाक करार दिया है।

आज शिमला से जारी प्रेस वयान में कुलदीप सिंह राठौर ने बताया कि वर्तमान समय में जब बागवानों को अपनी फसल तैयार करने के लिए भारी मंहगाई का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि जी.एस.टी के चलते सेब से संबंधित पैकिंग से लेकर फफूंद नाशक दवाईयां एवं अपनी फसलों को मंण्ड़ियों तक पहुॅचाने के लिए किराया भी कई गुणा बढ़ गया है इसके चलते सेब के सर्मथन मुल्य कम से कम 10 रूपये होना चाहिए।

कुलदीप राठौर ने कहा कि सेब इलाकों में बहुत जगह सड़कों की हालत खराब पड़ी है और सेब को मण्ड़ियों तक पहुॅचाने वाले ट्रक व गाड़ियों के मालिक खराव सडकों पर गाडियाॅं भेजने को मना कर रहे हैं इसलिए सरकार को चाहिए कि ख़राब सडकों को जल्दी से जल्दी ठीक करवायें।

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हिमाचल सरकार पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे : कर्मचारी नेता

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शिमला -हिमाचल प्रदेश कर्मचारी महासंघ के पूर्व अध्यक्ष सुरेन्द्र मनकोटिया, पूर्व सयुक्त सचिव सेन राम नेगी,पूर्व प्रेस सचिव हरीश गुलेरिया, गैर शिक्षक महासंघ के महासचिव दीप राम शर्मा ,इंदिरागांधी आयुर्विज्ञान मेडिकल कॉलेज के पूर्व महासचिव आत्मा राम शर्मा ने प्रदेश सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद करने के निर्णय की आलोचना करते हुए इसे कर्मचारी विरोधी बताया है।

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि जब जब प्रदेश में भाजपा सरकार सत्ता में आई तब तब प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद किया गया,जो कि कर्मचारियों के साथ अन्याय है।

कर्मचारी नेताओं ने जयराम सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि भाजपा कभी भी कर्मचारी हितेषी नही रही है।पूर्व में धूमल सरकार ने भी सत्ता में आते ही इसे बंद किया था अब बर्तमान में जयराम सरकार ने भी ऐसा ही किया है।उनका कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रख कर इसे खोला था।इसे खोलने का एक ही उद्देश्य था कि जो सरकार के किसी भी गलत फैंसले को चुनौती देने के लिए स्वतंत्र था और उसे जल्द और सस्ता न्याय मिल जाता था।

नेताओं का कहना है कि अब ऐसा नही होगा।किसी भी कर्मचारी को न्याय के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना होगा जहां पहले ही हजारों मामले सुनवाई के लिए लंबित पड़े है।

कर्मचारी नेताओं ने मुख्यमंत्री जयराम से आग्रह किया है कि वह इस मामले पर पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे। इसे उन्हें अपनी किसी भी प्रतिष्ठा का प्रश्न नही बनना चाहिए।

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