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हिमाचल में टॉयलेट न बनाने वाले शहरी क्षेत्रों के 13,000 घरों के बिजली-पानी कनेक्शन काटने के निर्देश जारी

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शिमला- राज्य सरकार ने टॉयलेट न बनाने वाले शहरी क्षेत्रों के 13,000 घरों के बिजली-पानी कनेक्शन काटने के निर्देश जारी किए हैं। बार-बार नोटिस के बावजूद भी इन मकान मालिकों ने टॉयलेट नहीं बनवाए हैं। लिहाजा, अब बड़ी कार्रवाई के लिए सरकार ने यह निर्देश शहरी निकायों को दिए हैं।

शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा ने टॉयलेट न बनाने वाले परिवारों पर कार्रवाई करने के निर्देशों की पुष्टि की है। सुधीर ने बताया कि शहरी क्षेत्र में जिन लोगों ने शौचालय नहीं बनाए हैं, उनके बिजली-पानी कनेक्शन काटने को कहा गया है।

सरकार शौचालय बनाने के लिए पैसा दे रही है, बावजूद इसके शौचालय का निर्माण नहीं किया जा रहा है। बता दें कि हिमाचल को खुला शौच मुक्त करने के लिए केंद्र सरकार फंडिंग करती है। शहरी क्षेत्र के परिवारों को 5,333 रुपये दिए जाते हैं। अन्य राशि भवन मालिकों को स्वयं खर्च करनी होती है।

सरकार ने किया है खुला शौच मुक्त का दावा

शौचालय बनाने के लिए लोगों को शहरी विकास विभाग के पास आवेदन करना होता है। उसके बाद विभाग की ओर से संबंधित निकायों से भवन मालिक की विस्तृत रिपोर्ट मांगी जाती है। शहरी विकास विभाग के पास इस समय 2,000 आवेदन आए हैं। इन भवन मालिकों ने पैसे के लिए हामी भरी है। विभाग की ओर से बीते महीने इनके आवेदन संबंधित निकायों को भेज दिए हैं। कइयों को इसमें पैसा जारी भी हो गया है।

सरकार ने किया है खुला शौच मुक्त का दावा

हिमाचल सरकार ने प्रदेश को खुला शौच मुक्त घोषित करने का दावा किया है। लेकिन सच यह है कि अभी तक हजारों शहरियों के पास टॉयलेट नहीं हैं। इसका खुलासा खुद शहरी विकास विभाग (यूडी) के पास इन परिवारों की ओर से किए गए आवेदनों से हो रहा है।

इन परिवारों ने टॉयलेट बनाने के लिए सरकारी मदद के रूप में मिलने वाले 5,333 रुपये लेने के लिए यूडी के पास आवेदन किए हैं। इनमें से कुछ परिवारों को पैसा जारी हो गया है जबकि कुछ परिवार अभी इंतजार कर रहे हैं।

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तारा हॉल स्कूल में निष्पक्ष पीटीए के गठन, परन्तु ऑकलैंड स्कूल पर अनैतिक हथकंडे अपनाने का आरोप

PTA constituted at Tarahall shimla and auckland school

शिमला-छात्र अभिभावक मंच ने ऑकलैंड व तारा हॉल स्कूलों में पीटीए के गठन को मंच के आंदोलन की जीत करार दिया है। मंच ने तारा हॉल स्कूल में निष्पक्ष पीटीए के गठन पर स्कूल प्रबंधन व अभिभावकों को बधाई दी है परन्तु ऑकलैंड स्कूल में पीटीए के गठन पर सवाल खड़े किए हैं व इसे लोकतंत्र पर काला धब्बा बताया है।

मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा व सह संयोजक बिंदु जोशी ने कहा है कि ऑकलैंड स्कूल प्रबंधन ने पीटीए के गठन के दौरान कई अनैतिक हथकंडे अपनाए। पीटीए के गठन से पहले स्कूल प्रबंधन ने कई अभिभावकों को टेलीफोन करके अपनी पसंद के उम्मीदवारों को वोट देने के लिए अनचाहा दबाव बनाया व उन्हें प्रबंधन के पक्ष में प्रभावित करने की कोशिश की। मंच ने कहा कि इस बात की पोल बॉयज स्कूल की कक्षा दो के चुनाव के दौरान खुल गयी जब एक उम्मीदवार ने अभिभावकों को चुनाव प्रक्रिया के दौरान साफ तौर पर बोला कि उन्हें स्कूल प्रबंधन ने खड़ा किया है इसलिए अभिभावक उन्हें वोट दें। इस पर विवाद हो गया व अभिभावकों ने उस उम्मीदवार के खिलाफ खुली बगावत करके दूसरे उम्मीदवार को भारी मतों से जिता दिया।

मंच ने कहा कि ऐसा ही एक उदाहरण कक्षा छः में आया जहां पर चुनाव रोस्टर को जानबूझ कर बदलकर महिला के लिए आरक्षित कर दिया गया। इस पर कक्षा छः की दोनों सेक्शनों के सभी अभिभावक खड़े हो गए व उन्होंने इसे फिक्सिंग करार दिया। उन्होंने साफ कह दिया कि कक्षा छः से छात्र अभिभावक मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा ही प्रतिनिधि होंगे। पूरी कक्षा ने बिना किसी चुनाव के ही विजेंद्र मेहरा को निर्विरोध चुन लिया जिसे बाद में अभिभावकों के दबाव में स्कूल प्रबंधन को मानना पड़ा।

मंच ने आरोप लगाया कि यह चुनाव पूरी तरह धांधलियों से भरपूर रहा। चुनाव के बाद चुनी गई कार्यकारी कमेटी के चुनाव में स्कूल प्रबंधन के लगभग दस लोग घुस आए व उन्होंने चुनाव को जबरन पांच मिनट में ही निपटा दिया जिसमें उन्होंने पहले से ही प्रबंधन द्वारा फिक्स उनके कुछ चहेतों को अपनी योजना के तहत मुख्य जिम्मेवारी सौंप दी। मंच ने कहा कहा कि इस कमेटी के चुनाव में इन लोगों का जबरन घुसना व कमेटी सदस्यों पर अनचाहा दबाव बनाना व उन्हें प्रभावित करना गैर संवैधानिक है। कार्यकारी कमेटी के चुनाव का नामांकन भी नहीं करवाया गया व इसे केवल एक औपचारिकता बनाकर रख दिया गया। बगैर किसी नामांकन व चुनाव के ही यह कमेटी गठित कर दी गयी।

अभिभावक मंच ने कहा कि ऑकलैंड स्कूल का पीटीए का चुनावी रोस्टर गैर संवैधानिक था। चुनाव की प्रक्रिया नर्सरी से शुरू न करवाकर जान बूझकर प्लस टू से शुरू करवाई गई। किसी भी रोस्टर में सामान्य श्रेणी से शुरुआत होकर आरक्षित श्रेणी तक जाती है परन्तु यहां पर जान बूझ कर इस रोस्टर को बदल दिया गया ताकि प्रबंधन के चहेते चुनाव में जीतें।

मंच ने निदेशक उच्चतर शिक्षा से मांग की है कि भविष्य में निजी स्कूलों में होने वाले पीटीए के गठन को और ज़्यादा पारदर्शी बनाया जाए ताकि शिक्षा के अधिकार कानून 2009,हिमाचल प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान अधिनियम 1997 व नियम 2003 तथा मानव संसाधन विकास मंत्रालय की 2014 की गाइडलाइनज़ का पूर्णतः पालन हो व ऑकलैंड स्कूल की तर्ज़ पर पीटीए गठन में धांधली न हो।

अभिभावक मंच ने कहा कि 153 साल पुराने ऑकलैंड स्कूल में आज पहली मर्तबा पीटीए का गठन हुआ। यह छात्र अभिभावक मंच की पहली जीत है व इस जैसे सभी निजी स्कूलों के गाल पर करारा तमाचा है। निजी स्कूलों की तानाशाही के दी दिन अब लद रहे हैं। मंच ने कहा है कि संघर्ष जारी है और अगला पड़ाव निजी स्कूलों में भारी फीसों व अन्य विषयों को संचालित करने के लिए विधेयक लाने का है जिसका प्रारूप उच्चतर शिक्षा निदेशक ने बना दिया है। सम्भवतः इस विधानसभा सत्र में यह विधेयक पेश हो जाएगा।

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सीवरेज सेस बढ़ा कर प्रतिमाह सौ रुपये करने से छोटे उपभोक्तों पर पड़ रहा अतिरिक्त व नाजायज आर्थिक बोझ

Shimla sewerage cess hike

शिमला-जिला कांग्रेस कमेटी शिमला शहरी ने पेयजल कंपनी द्वारा पानी बिल के साथ प्रतिमाह न्यूनतम सौ रुपये सीवरेज सेस वसूलने पर कड़ी आपत्ति जताई है ।

जिलाध्यक्ष अरुण शर्मा ने कहा की अभी तक जो सेस शुल्क 30 फीसदी लिया जाता था उसे बढ़ा कर प्रतिमाह सौ रुपये करने से छोटे उपभोक्तों पर अतिरिक्त व नाजायज आर्थिक बोझ पड़ रहा है , छोटे उपभोक्ता जो की पानी की कम खपत करते थे उस पर भी फ्लेट सौ रुपये शुल्क लगा देना तर्कसंगत नही है । निगम को इस बाबत पुनर्विचार करना चाहिए ये फ़ैसला पूरी तरह से जनविरोधी है इसे तुरंत वापस लेना चाहिए ।

जिलाध्यक्ष अरुण शर्मा ने कहा की पेयजय कंपनी द्वारा महीने के महीने पानी के बिल नही दिये जाते ऐसे मे यदि किसी उपभोक्ता को छ :माह या आठ माह बाद बिल दिया जा रहा है तो उसपर हर माह के हिसाब से सौ रुपए शुल्क जोड़ा जा रहा है, हर उपभोक्ता को हर माह सौ रुपये जोड़ने के इस गणित से पेयजल कंपनी खासा मुनफा कमा रही है और आम आदमी पर गैरजरूरी आर्थिक बोझ डाला जा रहा है जिस पर जिला कांग्रेस कमेटी कड़ी आपत्ति जताती है ।

अरुण शर्मा ने कहा कि निगम द्वारा आए दिन ही जन विरोधी व तुगलकी फैसले लिए जा रहें है, मूलभूत सुविधाओं को उपलब्ध करवा पाने मे नाकाम रहा निगम केवल आम आदमी की जेब से पैसे निकलवाने की फिराक मे रहता है , हर दूसरे माह किसी ने किसी तरह से कोई नया शुल्क लगाया जा रहा है , और कुछ नही मिला तो कूड़े का शुल्क बढ़ा दिया जाता है इस से जनता मे आक्रोश है ।

अरुण शर्मा ने कहा कि जिला कांग्रेस कमेटी ये मांग करती है की प्रतिमाह न्यूनतम सौ रुपए के इस फैसले पर पुनर्विचार किया जाए जिस से छोटे उपभोक्ताओ पर आर्थिक बोझ न पड़े अन्यथा महापौर व पेयजल कंपनी के खिलाफ जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा मोर्चा खोला जाएगा , निगम जनता पर तुगल्की फरमान लगाना बंद करें और शहर की जनता को मूलभूत सुविधाए प्रदान करने के प्रयास करे ।

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विश्वविद्यालय कैंपस में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर, प्रशासन के सामने पुख्ता सबूत पेश करने के बावजूद अधिकारियों को सरंक्षण

Corruption at its peak at hpu campus

शिमला-एस एफ आई हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई ने विश्वविद्यालय प्रशासन,कुलपति व प्रदेश सरकार का लगातार छात्रों की समस्यायों को नज़रंदाज़ करने व लगातार छात्र विरोधी फरमान जारी करने के विरोध में समरहिल चौक पर मुंह पर काली पटिया बांधकर विरोध प्रदर्शन किया।

सुबह से ही एस एफ आई के छात्र हाथो में विभिन्न मांगो को प्रदर्शित करते पोस्टर पकड़कर खड़े रहे।कैंपस सचिव जीवन ठाकुर ने बताया कि आज विश्वविद्यालय अपना स्थापना दिवस समारोह मना रहा है,ओर दूसरी ओर छात्र मांगो को लेकर आंदोलनरत है। छात्रों ने प्रदर्शन का अनूठा रूप दिखाया,क्योंकि कुलपति ने कैंपस में तानाशाह एजेंडा लागू कर धरने प्रदर्शन पर पूर्ण रूप से प्रतिबन्ध लगा रखा है। एस एफ आई ने कहा कि छात्र मुख्यत कैंपस में छात्र संघ चुनाव की बहाली की मांग कर रहे है क्योंकि लगातार कैंपस में लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन हो रहा है।

Corruption at its peak at hpu campus 2

एस एफ आई ने कहा कि कैंपस में भ्रष्टाचार अपनी चरम सीमा पर है । पी एच डी के अंदर अवैध रूप से फर्जी प्रवेश हो रहा है ।एस एफ आई ने प्रशासन के सामने पुख्ता सबूत पेश भी किए लेकिन प्रशासन अपने चहेते अधिकारियों को सरंक्षण दे रहा है । स्थापना दिवस के अवसर पर आज एस एफ आई ने मुख्यमंत्री को भी मांग पत्र सौंपकर छात्र मांगो को उठाया।एस एफ आई ने मांगपत्र के माध्यम से एस सी ए चुनाव को जल्द बहाल करने की मांग की। इसके साथ साथ एस एफ आई के छात्रों से हो रहे सौतेले व्यवहार को भी प्रमुखता से उठाया ।

एस एफ आई ने आरोप लगाया कि क्योंकि कुलपति विशेष विचारधारा को सरंक्षण दे रहे है।जिसका जीता जागता प्रमाण पिछले कल ए बी वी पी के छात्रों का निष्काषन बहाली करना है।हालांकि एस एफ आई निष्काषन बहाली के विरोध में नहीं है,लेकिन विचारधारा को निष्काषन बहाली का पैमाना बनाना आखिर कहां तक जायज है?एस एफ आई के सात छात्र पिछले पांच सालों से निष्कासित है ।एस एफ आई ने मांग की है कि इन छात्रों का निष्काषन भी जल्द से जल्द बहाल किया जाए।

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एस एफ आई ने कहा कि कैंपस में विभिन्न विभागों के प्राध्यापक संघ संबंधित छात्र संगठन के पदाधिकारियों में शामिल है।कैंपस में बिना किसी डर के प्राध्यापक छात्र राजनीति में सरेआम हिस्सा ले रहे है। एस एफ आई मांग की है कि ऐसे प्राध्यापको पर कड़ी कार्रवाई की जाए।कैंपस को धांधलियों का गढ़ बनाने वाले अधिकारियों पर भी एस एफ आई ने करवाई की मांग की है क्योंकि इन लोगो की वजह से शैक्षणिक स्तर में भारी गिरावट आई है ,तथा विश्विद्यालय की छवि भी धूमिल हो रही है।विश्वविद्यालय में छात्रावासो का आभाव है। प्रशासन सभी छात्रों को हॉस्टल सुविधा देने में नाकाम है।

एस एफ आई नए हॉस्टलों के निर्माण की मांग की है तथा वर्तमान में गर्ल्स होस्टल में बन्द हुई इंटर हॉस्टल आउटिंग ,तथा ब्वॉयज हॉस्टल के छात्रों को रात के समय लाइब्रेरी ना देने वाले निर्णय को जल्द वापिस लेने की मांग की है।कैंपस अध्यक्ष विक्रम ठाकुर ने कहा कि लंबे समय से इन्हीं मांगो को प्रमुखता से प्रशासन के समक्ष उठाया था।लेकिन फिर भी अभी तक प्रशासन ने कोई भी सकारात्मक पहल नहीं की।बल्कि आवाज़ उठाने वाले छात्रों को प्रताड़ित करने में ही ध्यान दिया। एस एफ आई ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री से उम्मीद करते है कि इन मांगो पर जल्द से जल्द छात्र हितेषी पहल को अंजाम दिया जाएगा । छात्रों ने चेतावनी कि यदि ऐसा नहीं होता तो एस एफ आई हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के अंदर आंदोलन को खड़ा करेगी

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