मुख्यमंत्री अगर वाकई मजदूरों के पक्षधर हैं तो लागू करें लेबर व प्रदेश हाईकोर्ट के निर्णय और ठेकेदारो पर कसें नकेल : सीटू

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फाइल चित्र

शिमला- प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा ट्रेड यूनियनों पर दिए गए बयान को सीटू राज्य कमेटी ने बेहद दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है और कहा कि बयान लोकतंत्र विरोधी व सामंती मानसिकता से प्रेरित है! उनके बयान से साफ हो गया है कि उनकी मजदूरो के प्रति कोई हमदर्दी नहीं है!

सीटू राज्य सचिव विजेंदर मेहरा ने कहा है कि आगामी विधानसभा चुनावो में मुख्यमंत्री को ट्रेड यूनियनों व मजदूरों का विरोध करना भरी पड़ेगा व इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा! मुख्यमंत्री तानाशाह की तरह व्यवहार कर रहे हैं! पहले बर्ष 2015 में जेपी कंपनी व वर्ष 2016 में पटेल कंपनी शोंगठोंग के साथ खड़े हुए नज़र आए व मजदूरो को उनके अधिकारों से वंचित करने का कार्य किया व अब ट्रेड यूनियनों के औचित्य पर ही प्रश्न खड़ा करके अंग्रेजो के ज़माने की याद दिला रहे हैं!

प्रदेश की भूतपूर्व भाजपा व वर्तमान कांग्रेस सरकारों पर आरोप लगाते हुए पार्टी ने कहा कि गलत नीतियों के कारण ही पन बिजली परियोजनाओं के निजीकरण की मुहीम तेज हुई है, ठेकेदारों की लूट बड़ी व मेदजूरों का शोषण बढ़ा! मुख्यमंत्री का यह बयान हास्यास्पद है की ट्रेड युनियने हिंसा का सहारा लेती हैं!

प्रदेश में उद्योगपतियों व ठेकेदारों द्वारा आज तक छह मजदूर नेताओं की हत्या की जा चुकी है परंतु उन्हें नसीहत देने के बजाये मुख्यमंत्री मजदूरों को ही कटघरे में खड़ा कर रहे हैं! मुख्यमंत्री को चुनौती देते हुए सीटू ने कहा कि अगर सरकार वाकई में न्याय व मजदूरों की पक्षधर है तो फिर मई 2016 में लेबर कोर्ट व 20 सितंबर की प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय को लागू करके दिखाए व ठेकेदारो पर नकेल कसे!

शोंगठोंग में संदर्भ में सीटू ने कहा कि परियोजना के निर्माण में देरी सरकार की लचर कार्यप्रणाली व ठेकेदारों के साथ सांठगांठ के कारण है! जगी थोपन व थोपन प्रणाली परियोजना का सालो से लटकना इसका सबूत है!

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