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सरकारी गाड़ियों में मौज कर रहे अफसरों के बच्चे, जनता के पैसे का दुरूपयोग करने में अफसर सबसे आगे

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सरकारी अधिकारी वाहन को निजी कार्यो के उपयोग के लिए 750 रुपये मासिक अपने वेतन से कटवाते हैं। इस वेतन के तहत वे 200 किलोमीटर तक सरकारी गाड़ी का निजी उपयोग कर सकते हैं।- वीसी फारका

शिमला– जनता के टैक्स से अपने निजी स्वार्थ पूरा करना सरकारी कर्मचारी अपना हक़ समझते हैं! अफसरों की मिले सरकारी वहां भी इस लूट का हिस्सा है! हिमाचल सरकार करोड़ों रुपये का ऋण लेकर प्रदेश को जैसे-तैसे चला रही है। वहीं, सरकार के उच्च अधिकारी ही सरकारी खजाने को चूना लगा रहे हैं। सरकारी काम के लिए मिलने वाली सरकारी गाड़ी का दुरुपयोग हो रहा है। प्रदेश के उच्च अधिकारियों के साथ उनके परिवार व बच्चों की भी ऐश है। सरकारी सुविधाओं की ऐश सरकार पर भारी पड़ रही है।

दुःख की बात यह है की ये सारा तमाशा खुलेआम जनता के सामने चलता आ रहा है और लोग ये नहीं समझ पा रहे की ये भी भृष्टाचार का ही रूप है!

प्रदेश के बडे़ व छोटे साहबों के बच्चों को स्कूल से लाने व ले जाने के लिए धड़ल्ले से सरकारी गाड़ी का दुरुपयोग किया जा रहा है। साहबों की पत्‍ि‌नयों व परिवार के लोगों की सैर भी सरकारी वेतन पर सरकारी चालक करवा रहे हैं। राजधानी शिमला में सरकार के सामने ही नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जिन्हें सरकारी गाड़ियों के प्रयोग का प्रावधान भी नहीं है, वे भी सरकारी गाड़ियों में घूम रहे हैं। इस संबंध में कोई निरीक्षण और न कोई कार्रवाई की जा रही है। अधिकारी इसके लिए अपना निजी दौरा तक नहीं दिखाते और सरकारी खजाने से ही पैसा चुकता होता रहता है।

एक बच्चे के लिए एक गाड़ी से यातायात जाम

स्कूल में एक बच्चे के लिए एक गाड़ी आने के कारण यातायात जाम की समस्या आ रही है। स्कूल लगने व स्कूल की छुट्टी के दौरान सबसे ज्यादा यातायात समस्या पेश आ रही है। इस दौरान हर दिन निजी स्कूलों के बाहर सड़कों पर इतनी गाड़ियां पार्क हो रही हैं कि वहां से निकलना मुश्किल हो जाता है।

राजधानी के तीन स्कूलों के बाहर हालत खराब

राजधानी शिमला के तीन स्कूलों के बाहर हालत खराब है। इनमें ताराहॉल स्कूल, एडवर्ड व चैल्सी स्कूल शामिल हैं। इन स्कूलों के बाहर सरकारी गाड़ियों की संख्या बहुत ज्यादा रहती है। ऐसा लगता है कि प्रदेश सरकार के उच्च अधिकारियों की बैठक है जिसमें भाग लेने के लिए अधिकारी आए हैं।सरकारी गाड़िया अपने साहबो के बच्चो को स्कूल छोड़ने व लेन आती है जिस कारण शहर के यातायात पर भी असर पड़ता है और आम आदमी को भी परेशानी होती है

चालकों की भी मौज

अधिकारियों के साथ चालकों की भी मौज है। उनके बच्चों को स्कूल छोड़ने और लाने के साथ बीच में वे अपने बच्चों को लाने व ले जाने के लिए भी टांका लगा लेते हैं। ऐसे में प्रदेश सरकार के खजाने पर दोहरी मार पड़ रही है।

सरकारी गाड़ी के निजी उपयोग के लिए कटता है वेतन

सरकारी अधिकारी वाहन को निजी कार्यो के उपयोग के लिए 750 रुपये मासिक अपने वेतन से कटवाते हैं। यह पैसा सरकारी खजाने में जाता है। इस वेतन के तहत वे 200 किलोमीटर तक सरकारी गाड़ी का निजी उपयोग कर सकते हैं। (वीसी फारका, मुख्य सचिव, हिमाचल प्रदेश)

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हिमाचल सरकार पुलिसकर्मियों का कर रही है शोषण

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पुलिसकर्मियों की डयूटी बेहद सख्त है,कई-कई बार तो चौबीसों घण्टे वर्दी व जूता उनके शरीर में बंधा रहता है।थानों में खाने की व्यवस्था तीन के बजाए दो टाइम ही है,राजधानी शिमला के कुछ थानों के पास अपनी खुद की गाड़ी तक नहीं है,हैड कॉन्स्टेबल से एएसआई बनने के लिए सत्रह से बीस वर्ष भी लग जाते हैं।

शिमला सीटू राज्य कमेटी ने प्रदेश सरकार पर कर्मचारी विरोधी होने का आरोप लगाया है। कमेटी ने यह कहा है कि वह हिमाचल प्रदेश के पुलिसकर्मियों की मांगों का पूर्ण समर्थन करती है। आरोप लगाते हुए सीटू ने कहा है कि प्रदेश सरकार पुलिसकर्मियों का शोषण कर रही है।

राज्य कमेटी ने प्रदेश सरकार से यह मांग की है कि वर्ष 2013 के बाद नियुक्त पुलिसकर्मियों को पहले की भांति 5910 रुपये के बजाए 10300 रुपये संशोधित वेतन लागू किया जाए व उनकी अन्य सभी मांगों को बिना किसी विलंब के पूरा किया जाए।

सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा व महासचिव प्रेम गौतम ने प्रदेश सरकार पर कर्मचारी विरोधी होने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जेसीसी बैठक में भी कर्मचारियों की प्रमुख मांगों को अनदेखा किया गया है। उन्होंने कहा कि जेसीसी बैठक में पुलिसकर्मियों की मांगों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है।

सीटू कमेटी ने कहा कि सबसे मुश्किल डयूटी करने वाले व चौबीस घण्टे डयूटी में कार्यरत पुलिसकर्मियों को इस बैठक से मायूसी ही हाथ लगी है। इसी से आक्रोशित होकर पुलिसकर्मी मुख्यमंत्री आवास पहुंचे थे। उनके द्वारा पिछले कुछ दिनों से मैस के खाने के बॉयकॉट से उनकी पीड़ा का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि पुलिस कर्मियों के साथ ही सभी सरकारी कर्मचारी नवउदारवादी नीतियों की मार से अछूते नहीं है। कमेटी ने कहा कि पुलिसकर्मियों की डयूटी बेहद सख्त है। कई-कई बार तो चौबीसों घण्टे वर्दी व जूता उनके शरीर में बंधा रहता है।

कमेटी ने यह भी कहा है कि थानों में स्टेशनरी के लिए बेहद कम पैसा है व आईओ को केस की पूरी फ़ाइल का सैंकड़ों रुपये का खर्चा अपनी ही जेब से करना पड़ता है। थानों में खाने की व्यवस्था तीन के बजाए दो टाइम ही है। मैस मनी केवल दो सौ दस रुपये महीना है जबकि मैस में पूरा महीना खाना खाने का खर्चा दो हज़ार रुपये से ज़्यादा आता है। यह प्रति डाइट केवल साढ़े तीन रुपये बनता है, जोकि पुलिस जवानों के साथ घोर मज़ाक है। यह स्थिति मिड डे मील के लिए आबंटित राशि से भी कम है।

उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के जमाने के बने बहुत सारे थानों की स्थिति खंडहर की तरह प्रतीत होती है जहां पर कार्यालयों को टाइलें लगाकर तो चमका दिया गया है परन्तु कस्टडी कक्षों,बाथरूमों,बैरकों,स्टोरों,मेस की स्थिति बहुत बुरी है। इन वजहों से भी पुलिस जवान भारी मानसिक तनाव में रहते हैं।

सीटू ने कहा कि पुलिस में स्टाफ कि बहुत कमी है या यूं कह लें कि बेहद कम है व कुल अनुमानित नियुक्तियों की तुलना में आधे जवान ही भर्ती किये गए हैं जबकि प्रदेश की जनसंख्या पहले की तुलना में काफी बढ़ चुकी है यहाँ तक पुलिस के पास रिलीवर भी नहीं है।

आरोप लगाते हुए कमेटी ने कहा कि प्रदेश की राजधानी शिमला के कुछ थानों के पास अपनी खुद की गाड़ी तक नहीं है। वहीं पुलिस कर्मी निरन्तर ओवरटाइम डयूटी करते हैं। इसकी एवज में उन्हें केवल एक महीना ज़्यादा वेतन दिया जाता है। इस से प्रत्येक पुलिसकर्मी को वर्तमान वेतन की तुलना में दस से बारह हज़ार रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है। उन्हें लगभग नब्बे साप्ताहिक अवकाश,सेकंड सैटरडे,राष्ट्रीय व त्योहार व अन्य छुट्टियों के मुकाबले में केवल पन्द्रह स्पेशल लीव दी जाती है।

सीटू कमेटी ने यह भी कहा कि वर्ष 2007 में हिमाचल प्रदेश में बने पुलिस एक्ट के पन्द्रह साल बीतने पर भी नियम नहीं बन पाए हैं। इस एक्ट के अनुसार पुलिसकर्मियों को सुविधा तो दी नहीं जाती है परन्तु कर्मियों को दंडित करने के लिए इसके प्रावधान बगैर नियमों के भी लागू किये जा रहे हैं जिसमें एक दिन डयूटी से अनुपस्थित रहने पर तीन दिन का वेतन काटना भी शामिल है। पुलिसकर्मियों की प्रोमोशन में भी कई विसंगतियां हैं व इसका टाइम पीरियड भी बहुत लंबा है। हैड कॉन्स्टेबल से एएसआई बनने के लिए सत्रह से बीस वर्ष भी लग जाते हैं।

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किन्नौर में लापता पर्यटकों में से 2 और के शव बरामद, 2 की तालाश जारी,आभी तक कुल 7 शव बरामद

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शिमला रिकोंगपिओ में 14 अक्तुबर को उत्तरकाशी के हर्षिल से छितकुल की ट्रैकिंग पर निकले 11 पर्यटकों में से लापता चार पर्वतारोहीयों में से दो  पर्वतारोहियों के शवो को आई.टी.बी.पी व पुलिस दल द्वारा पिछले कल सांगला लाया गया था जहां सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सांगला में दोनों शवों का पोस्टमार्टम किया गया।

यह जानकारी देते हुए उपायुक्त किन्नौर अपूर्व देवगन ने बताया कि इन दोनों की पहचान कर ली गई है जिनमे मे एक उतरकाशी व दूसरा पश्चिम बंगाल से सम्बंधित था।

उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन किन्नौर द्वारा आज एक शव वाहन द्वारा उतरकाशी को भेज दिया गया है जहाँ शव को जिला प्रशासन उतरकाशी को सौंपा जाएगा। जब कि दूसरा शव वाहन द्वारा शिमला भेजा गया है जिसे शिमला में मृतक के परिजनों को सौंपा जायेगा।

उपायुक्त अपूर्व देवगन ने बताया कि अभी भी लापता दो  पर्यटकों की तलाश आई.टी.बी.पी के जवानों द्वारा जारी है। उल्लेखनीय है कि गत दिनों उतरकाशी से छितकुल के लिये 11 पर्वतारोही ट्रेकिंग पर निकले थे जो बर्फबारी के कारण लमखंगा दर्रे में फंस गये थे जिसकी सूचना मिलने पर जिला प्रशासन द्वारा सेना के हेलीकॉप्टर व आई.टी.बी.पी के जवानों की सहायता से राहत व बचाव कार्य आरम्भ किया था। सेना व आई.टी.बी.पी के जवानों ने 21 अक्टूबर को दो पर्यटकों को सुरक्षित ढूंढ निकाला था। इसी दौरान उन्हें अलग अलग स्थानों पर पाँच ट्रेकरों के शव ढूंढ निकलने में सफलता मिली थी। जबकि 4 पर्यटक लापता थे जिसमे से राहत व बचाव दल को 22 अक्तुबर को 2 शव ढूढ़ निकालने में सफलता मिली थी। अभी भी दो पर्यटक लापता हैं जिनकी राहत व बचाव दल द्वारा तलाश जारी है।

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हिमाचल स्कूल शिक्षा बोर्ड ने जारी की टर्म-1 दसवीं व जमा दो कक्षाओं की डेटशीट

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शिमला हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डा० सुरेश कुमार सोनी ने बताय है कि मैट्रिक व जमा दो श्रेणी के नियमित परीक्षार्थियों की (Term-1) परीक्षा नवंबर, 2021 निम्नलिखित तिथियों को संचालित की जाएगी:-


क्रमांक: परीक्षा, परीक्षा तिथियां, समय

1 . मैट्रिक 20-11 -2021 से 03 -12-2021 तक। प्रातः कालीन सत्र: 8: 45 से 12:00 बजे तक।

2. जमा दो 18-11 -2021 से 09 -12-2021 तक। प्रातः कालीन सत्र: 8: 45 से 12:00 बजे तक

परीक्षा संचालन में नियुक्त समस्त स्टाफ के साथ ही परीक्षार्थियों को फेसमास्क पहनना अनिवार्य होगा। परीक्षार्थियों को परीक्षा देने के लिए आधा घंटा पूर्व होने केंद्र पर उपस्तिथि देनी होगी व उन्हें सैनीटाइज़र या साबुन /पानी से हैंड वॉश करने के उपरांत ही परीक्षा भवन में प्रवेश दिया जायेगा तथा परीक्षा हाल में भी उचित सोशल डिसटैनसिंग अपनाते हुए ही बैठने की व्यवस्था की जाएगी।

परीक्षा प्रवेश पत्रों को ऑनलाइन माध्यम से करें प्राप्त

हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डा० सुरेश कुमार सोनी ने यह भी बताय है कि दसवीं व जमा दो कक्षा के नियमित परीक्षार्थियों की टर्म-1 (Term-1) परीक्षा के लिए प्रवेश पत्रों को ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से प्राप्त करने की तिथियों को बिना बिलम्ब शुल्क 24-10-2021 तथा विलम्ब शुल्क 100 रूपए के साथ दिनांक 25-10-2021 से 26 -10-2021 तक बढ़ाया जाता है।

अतः समस्त विद्यालय अपने नियमित परीक्षाओं के प्रवेश पत्र निर्धारित शुल्क सहित उक्त तिथि तक ऑनलाइन प्रेषण की पप्रक्रिया के माध्यम से पूर्ण कर लें। इसके उपरांत कोई भी प्रवेश पत्र स्वीकार नहीं किया जायेगा।

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