हिमाचल में दवाओं का दुरूपयोग रोकने के लिये औषधी एवं प्रसाधन विधेयक 2006 में किये प्रावधान

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चित्र: Stroke Care International/Representational

शिमला- हिमाचल प्रदेश सरकार ने दावा किया है कि राज्य में दवाओं का मादक द्रव्यों के रूप में दुरूपयोग के खतरे को रोकने के लिये ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में पिछले सत्र के दौरान औषधी एवं प्रसाधन विधेयक, 1940 में संशोधन कर औषधी एवं प्रसाधन विधेयक, 2016 पास कर इसे और अधिक सख्त बनाया गया है। इस विधेयक को सहमति के लिये भारत के राष्ट्रपति को भेजा गया है।

यह जानकारी हिमाचल प्रदेश सचिवालय के मुख्य सचिव वीसी फारका ने दी। राज्य विधान सभा द्वारा इस विधेयक के पास किये जाने से धारा 18 की उपधारा (सी) तथा धारा 27 की उपधारा (बी) के उपनियम (दो) के अंतर्गत इससे जुड़े सभी प्रकार के अपराध संज्ञेय यानि कॉग्निजेबल व गैर जमानती होंगे। संशोधन में किसी भी परिसर जहां अधिनियम की धारा 18 के प्रावधानों का उलंघन करते हुए किसी भी प्रकार की औषधी व कॉसमेटिक का निर्माण अथवा बिक्री अथवा भण्डारण अथवा प्रदर्शन अथवा बिक्री व वितरण की पेशकश की जा रही हो, को सील करने का प्रावधान है।

हाल ही में मंत्रिमण्डल ने सहायक दवा निरीक्षकों के तीन पद तथा दवा निरीक्षकों के 22 पदों को भरने की स्वीकृति प्रदान की है और इस प्रकार दवा नियंत्रक निदेशालय के प्रवर्तन एवं नियामक प्रक्रिया को दो गुणा बढ़ाया गया है।

राज्य में पिछले एक वर्ष से नशीली दवाओं के खतरों के विरूद्ध एक विशेष अभियान चलाया गया है। दवा निरीक्षकों को इन दवाओं की बिक्री तथा निर्माण करने वाले समस्त परिसरों, विशेषकर राज्य के सीमांत क्षेत्रों जहां इन दवाओं का निर्माण अथवा बिक्री नशे के रूप में की जाती हो, पर सख्त निगरानी के निर्देश दिए हैं। निरीक्षकों (बिक्री) की श्रृंखला में महज सात महीनों में 385 निरीक्षण किए गए जबकि वित्त वर्ष 2015-16 के दौरान बिक्री परिसरों के 232 निरीक्षण किए गए थे। उन्होंने कहा कि गत सात महीनों के दौरान 91 मामलों में नशीली दवाओं को जब्त किया गया और गत वित्त वर्ष के दौरान नशीली दवाएं केवल 33 मामलों में जब्त की गई थी।

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