Stray Cows in Himachal
फाइल चित्र हिमाचल वाचर/Representational

कुल्लू-मंगलवार को जिलाधीश यूनुस ने विभागीय अधिकारियों और स्वयंसेवी संस्थाओं के पदाधिकारियों जिला में चल रहे गोसदनों के संवर्द्धन और नए निर्माण कार्यों को लेकर विस्तार से चर्चा की और कहा कि जिले में आवारा पशुओं की समस्या के स्थायी समाधान के लिए जिला प्रशासन विभिन्न विभागों, पंचायतीराज संस्थाओं, नगर निकायों और स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से विशेष पहल करने जा रहा है।

जिलाधीश ने पशुपालन विभाग और पंचायतीराज विभाग के अधिकारियों को जटेहड़ के गोसदन के लिए वन भूमि हस्तांतरित करने की प्रक्रिया अतिशीघ्र आरंभ करने के निर्देश दिए। लंकाबेकर में निर्माणाधीन गोसदन के लिए भी नगर परिषद कुल्लू यह प्रक्रिया पूरी करेगी। यूनुस ने कहा कि जिले के अन्य क्षेत्रों में भी गोसदनों व पशु अभयारण्यों के लिए उपयुक्त जगह चिह्नित की जाएंगी और इन्हें संबंधित पंचायतों या सोसाइटियों को हस्तांतरित किया जाएगा, ताकि बेसहारा पशुओं को छत नसीब हो सके।

जिलाधीश ने यह भी कहा कि जिले में पहले से चल रहे गोसदनों का सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। उन्होंने पशुपालन विभाग के अधिकारियों तथा संबंधित संस्थाओं को इन गोसदनों में सभी आवश्यक सुविधाएं जुटाने के निर्देश और जिला प्रशासन की ओर से हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया। उन्होंने कुल्लू शहर में लंकाबेकर के पास गोसदन की चारदिवारी व अन्य कार्यों के लिए धनराशि स्वीकृति करने और इसे 15 दिन के भीतर चालू करने के निर्देश भी दिए।

नगर परिषद मनाली द्वारा संचालित गोसदन, डोभी, रायसन, बंदरोल और अन्य स्थानों में चल रहे गोसदनों के प्रबंधन पर भी बैठक में चर्चा की गई। यूनुस ने बताया कि गोसदनों व पशु अभयारण्यों के बेहतर प्रबंधन व निगरानी के लिए जिला, ब्लाक या पंचायत स्तर पर सोसाइटियों के गठन पर भी विचार किया जा रहा है।

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