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शिक्षा

सैनिक स्कूल सुजानपुर टीहरा में 6वीं और 9वीं के प्रवेश हेतू आवेदन पत्र आमंत्रित

Sainik School Sujanpur Tihra

30 नवम्बर तक करें आवेदन, प्रवेश परीक्षा 15 जनवरी 2017 को मंडी, शिमला, धर्मशाला व सुजानपुर में, आवेदन पत्र भरने के लिये स्कूल की वैबसाईट वैबसाईट से डाऊनलोड कर सकते हैं।

हमीरपुर- सैनिक स्कूल, सुजानपुर टीहरा में कक्षा 6वीं व 9वीं की प्रवेश परीक्षा के लिए इच्छुक अभियार्थी से 30 नवम्बर 2016 को शाम पांच बजे तक अपने आवेदन पत्र दे सकते है। तथा जिसकी प्रवेश परीक्षा 15 जनवरी 2017 (रविवार) को मंडी, शिमला, धर्मशाला व सुजानपुर टीहरा में आयोजित की जाएगी।

सैनिक स्कूल की सुजानपुर टीहरा कार्यकारी प्रधानाचार्य लै0 कमांडर ऊषा सांगवान ने जानकारी देते हुए बताया कि 6वीं कक्षा की प्रवेश परीक्षा में बैठने के लिये अभ्यर्थी पांचवीं कक्षा उत्तीर्ण हो तथा आयु एक जुलाई 2017 को 10-11 वर्ष (जन्म 2 जुलाई 2006 से एक जुलाई 2007) के बीच होनी चाहिए। जबकि 9वीं कक्षा के लिए अभ्यर्थी आठवीं कक्षा पास हो तथा आयु सीमा एक जुलाई 2017 को 13-14 वर्ष (जन्म 2 जुलाई 2003 से एक जुलाई 2004) के बीच होनी चाहिए।

उन्होने बताया कि प्रॉस्पेक्टस-कम-एप्लीकेशन फॉर्म 18 नवम्बर तक निर्धारित शुल्क अदा कर प्राप्त किये जा सकते हैं। प्रॉस्पेक्टस-कम-एप्लीकेशन फॉर्म शुल्क सामान्य वर्ग, सेवारत और भूतपूर्व सैनिकों के लिये ऑन लाईन तथा सैनिक स्कूल सुजानपुर टीहरा के काउंटर पर 450 रूपये तथा डाक द्वारा 500 रूपये और अनुसूचित/अनूसूचित जनजाति के लिये ऑन लाईन और काउंटर पर 300 रूपये और डाक द्वारा 350 रूपये निर्धारित है।

कार्यकारी प्रधानाचार्य ने यह बी भी बताया कि प्रॉस्पेक्टस प्राप्त करने के लिये अपने पूर्ण पते सहित, निर्धारित शुल्क का डिमांड ड्राफ्ट प्रिंसीपल सैनिक स्कूल सुजानपुर टीहरा, जिला हमीरपुर (हि0प्र0) के नाम तैयार करें जो कि पंजाब नेशनल बैंक (कोड 6670) या भारतीय स्टेट बैंक (कोड 10726) या कांगड़ा केन्द्रीय सहकारी बैंक सुजानपुर (हि0प्र0) में देय होना चाहिए। उन्होने बताया कि इसके लिए इण्डियन पोस्टल ऑर्डर मान्य नहीं होंगे। इसके अतिरिक्त आवेदन पत्र भरने के लिये स्कूल की वैबसाईट वैबसाईट से डाऊनलोड कर सकते हैं।

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हिमाचल के निजी स्कूलों के सामने घुटने टेक रही सरकार, न इंस्पेक्शन पूरी, न ही करवा पायी पीटीए का गठन

Inspection report of himachal Pradesh's Private Schools

शिमला-लगभग दो महीने के विरोध प्रदर्शन के बावजूद निजी स्कूलों की हर साल भारी-भरकम फीस वृद्धि और अतिरिक्त मनमानी वसूली के सताए अभिभावकों को प्रदेश सर्कार से कोई रहत मिलती नज़र नहीं आ रही।

शिक्षा विभाग कितनी कठोर कार्रवाई करने में सक्षम है यह इसी से पता चलता है कि विभाग निजी स्कूलों में पीटीए का गठन तक नहीं करवा पाया। छात्र-अभिभावक मंच की माने तो भारी फीस बढ़ोतरी के मुद्दे पर विभाग से कार्रवाई की अपेक्षा करना केवल दिल को तसल्ली देने का कार्य है।

मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा ने कहा है कि शिक्षा विभाग इंस्पेक्शन रिपोर्ट पर कार्रवाई की आड़ में केवल जनता का आई वॉश कर रहा है। शिक्षा विभाग के अधिकारी निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए न्यूनतम कार्य तक नहीं कर पाए हैं।

सिर्फ 47% स्कूलों का ही कर पाया इंस्पेक्शन कार्य, रिपोर्ट भी सार्वजानिक नहीं

उन्होंने कहा कि 1472 स्कूलों में से केवल 638 स्कूलों की रिपोर्ट शिक्षा निदेशालय में पहुंची है। इसका मतलब है कि केवल 43 प्रतिशत स्कूलों में ही इंस्पेक्शन का कार्य सम्पन्न हुआ है। केवल 43 प्रतिशत स्कूलों की रिपोर्ट आने से स्पष्ट है कि न तो शिक्षा विभाग ने 57 प्रतिशत स्कूलों की इंस्पेक्शन की है और न ही इन स्कूलों ने शिक्षा विभाग में अपना रिकॉर्ड जमा करवाने की जहमत उठाई है। इस तरह आधे से ज़्यादा स्कूल इंस्पेक्शन व रिकॉर्ड इकट्ठा करने के दायरे से बाहर रह गए हैं। उन्होंने उच्चतर शिक्षा निदेशक से इस बाबत प्रश्न किया है कि आखिर क्यों 57 प्रतिशत स्कूलों की इंस्पेक्शन रिपोर्ट शिक्षा विभाग के पास नहीं पहुंची है। वह यह भी बताएं कि इन निजी स्कूलों में इंस्पेक्शन न करने वाले अधिकारियों व अपना रिकॉर्ड जमा न करने वाले निजी स्कूलों,इन दोनों पक्षों पर शिक्षा विभाग ने क्या कार्रवाई अमल में लायी है।
उन्होंने गम्भीर चिंता व्यक्त की है कि क्या शिक्षा विभाग द्वारा गठित 72 इंस्पेक्शन टीमें 18 दिन में इंस्पेक्शन का कार्य पूर्ण नहीं कर सकती थीं।

जब निजी स्कूलों की इंस्पेक्शन इस वर्ष हुई तो बढ़ी हुई फीसों को अगले वर्ष समायोजित करने का क्या तुक

छात्र अभिभावक मंच ने शिक्षा विभाग के उस प्रस्ताव पर कड़ी आपत्ति ज़ाहिर की है जिसमें उसने कहा है कि इस वर्ष बढ़ी हुई फीसों को अगले वर्ष समायोजित किया जाएगा। मंच ने उच्चतर शिक्षा निदेशक को चेताया है कि वह अभिभावकों के सब्र का इम्तिहान न लें व बढ़ी हुई फीसों को इसी साल समायोजित करें।

उन्होंने कहा कि जब निजी स्कूलों की इंस्पेक्शन इस वर्ष हुई व निजी स्कूलों ने मनमानी इस वर्ष की है तो फिर बढ़ी हुई फीसों को अगले वर्ष समायोजित करने का क्या तुक व तर्क है। इस से साफ नजर आ रहा है कि शिक्षा निदेशक डिले टैक्टिकस का इस्तेमाल करके मामले को अगले वर्ष तक खींचना चाहते हैं ताकि अभिभावकों का गुस्सा शांत हो जाए व आगामी वर्ष तक अभिभावक बढ़ी हुई फीस की बात भूल जाएंगे।

उच्चतर शिक्षा निदेशक को भली-भांति मालूम है कि निजी स्कूल मार्च,जून व सितंबर में तीन इंस्टॉलमेंट्स में फीस लेते हैं। अभी तक सभी निजी स्कूलों ने फीस की केवल मार्च की एक इन्सटॉलमेंट ली है तथा जून व सितंबर की दो फीस इंस्टॉलमेंट्स बाकी हैं। यह बढ़ी हुई फीस जून व सितंबर की इन दो इंस्टॉलमेंट्स में आसानी से समायोजित की जा सकती थी परन्तु ऐसा न करके शिक्षा निदेशक अगले वर्ष फीस समायोजित करने की बात कह रहे हैं जिस से साफ है कि वह निजी स्कूलों के चंगुल में हैं। उन्होंने इस बात पर कड़ी आपत्ति ज़ाहिर की है कि शिक्षा निदेशक सब कुछ जानते हुए भी छात्रों व अभिभावकों को ठगने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने शिक्षा निदेशक को साफ कर दिया है कि वह बढ़ी हुई फीसों को इसी वर्ष की फीस की दो इंस्टॉलमेंट्स में समायोजित करवाएं अन्यथा आंदोलन का अगला पड़ाव अनिश्चितकालीन के लिए उच्चतर शिक्षा निदेशालय ही होगा।

स्कूल सत्र के दो महीने बीतने के बावजूद भी नहीं करवा पाया पीटीए के गठन

शिक्षा का अधिकार कानून 2009,मानव संसाधन विकास मंत्रालय की 2014 की गाइडलाइनज़ व 27 अप्रैल 2016 का हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय का निर्णय स्पष्ट कहते हैं कि हर निजी स्कूल में पीटीए का गठन आवश्यक रूप से होना चाहिए। इसके अनुसार पीटीए का गठन सत्र शुरू होने के एक महीने के भीतर हर हाल में होना चाहिए। निर्णयानुसार हर निजी स्कूल में पीटीए के गठन के लिए सरकारी स्कूल के अधिकारी की पीटीए चुनाव अधिकारी के रूप में डयूटी लगनी चाहिए थी। इसी सरकारी अधिकारी की देख-रेख में पीटीए का गठन होना चाहिए जिसमें लोकतांत्रिक तरीके से 75 प्रतिशत संख्या अभिभावकों की होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि स्कूल सत्र के दो महीने बीतने के बावजूद भी पीटीए के गठन के लिए न तो सरकारी अधिकारियों के नामों का ऐलान शिक्षा विभाग ने किया है और न ही किसी भी स्कूल में तय नियमों के अनुसार पीटीए का गठन हुआ है। जिन निजी स्कूलों ने पीटीए की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को अपनाए बिना ही डम्मी पीटीए का गठन किया है उन पर भी शिक्षा विभाग ने शिक्षा का अधिकार कानून,एमएचआरडी गाइडलाइनज़ व हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना पर कोई कार्रवाई नहीं कि है। शिक्षा विभाग केवल खानापूर्ति करना चाहता है।

अन्य राज्यों की तर्ज़ पर क्यों नहीं कर रहा त्वरित करवाई

मंच का मानना है कि अगर शिक्षा विभाग वास्तव में ही निजी स्कूलों पर शिकंजा कसने के लिए गम्भीर होता तो इस वक्त अन्य राज्यों की तर्ज़ पर एक्शन मोड में आ चुका होता व अवहेलना करने वाले स्कूलों पर ठोस कार्रवाई हो चुकी होती।

विभाग ने बार-बार नोटिसों की अवहेलना करने वाले स्कूलों पर कोई कार्रवाई तक नहीं की है। अगर विभाग गम्भीर होता तो कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश के नोएडा में निजी स्कूलों पर जिलाधीश के कार्रवाई मॉडल को फॉलो करता व अवहेलना करने व भारी फीसें बढ़ाने वाले स्कूलों पर भारी फाइन लगाता ताकि भविष्य में कोई भी स्कूल मनमानी करने की हिम्मत तक नहीं कर पाता। इसी 19 अप्रैल को नोएडा के जिलाधीश ने 14 निजी स्कूलों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की थी व भारी फीसें वसूलने वाले दो स्कूलों को पांच लाख रुपये जुर्माना लगाया था। इनमें से एपीजे स्कूल को 4 लाख रुपये व केम्ब्रिज स्कूल को एक लाख रुपये जुर्माना लगाया था। जिलाधिकारी ने सभी 14 स्कूलों को बढ़ी फीस वापिस लेने के लिए केवल एक दिन का समय दिया था व ऐसा न करने वाले स्कूलों पर कॉड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर एक्ट 1973 की धारा 107 के तहत मुकद्दमे दर्ज किए थे। हिमाचल प्रदेश के बड़े-बड़े निजी स्कूल लगातार मनमानी कर रहे हैं परन्तु शिक्षा विभाग इन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा है।

कार्रवाई करने के बजाए दी जा रही छूट पर छूट

विभाग की ओर से केवल मुख जुबानी कार्रवाई चल रही है व हकीकत में कोई एक्शन नहीं हो रहा है। जहां नोएडा के जिलाधिकारी ने निजी स्कूलों पर छापेमारी के 24 घण्टे के भीतर उनकी मनमानी को रोकने के लिए कार्रवाई अमल में ला दी वही दूसरी ओर हिमाचल प्रदेश का शिक्षा विभाग पिछले दो महीनों से नोटिस पर नोटिस देने के बावजूद भी फीसें कम न करने वाले स्कूलों पर कोई कार्रवाई करने के बजाए छूट पर छूट देता जा रहा है। इसी से स्पष्ट है कि शिक्षा विभाग दबाव में कार्य कर रहा है।

हिमाचल प्रदेश का शिक्षा विभाग पिछले दो महीनों से नोटिस पर नोटिस देने के बावजूद भी फीसें कम न करने वाले स्कूलों पर कोई कार्रवाई करने के बजाए छूट पर छूट देता जा रहा है। इसी से स्पष्ट है कि शिक्षा विभाग दबाव में कार्य कर रहा है।

अब मंच आरटीआई के ज़रिए स्वयं निजी स्कूलों की लूट जनता के सामने लाएगा मंच

मंच ने निर्णय लिया है कि शिक्षा विभाग द्वारा इंस्पेक्शन रिपोर्टें सार्वजनिक न करने के कारण अब मंच सूचना के अधिकार(आरटीआई) के ज़रिए स्वयं ही इन निजी स्कूलों की लूट जनता के सामने लाएगा।

सूचना के अधिकार के तहत निजी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी सहित अन्य सभी तरह की जानकारी इकट्ठा की जाएगी। जो भी स्कूल तथ्यों को छिपाने की कोशिश करेगा अथवा गलत जानकारी देगा उस स्कूल पर न्यायिक कार्रवाई के बारे में भी मंच काम करेगा। निजी स्कूलों द्वारा गलत जानकारी देने पर उन पर कानूनी कार्रवाई अमल में लाने से कोई भी गुरेज़ नहीं किया जाएगा। उन्होंने शिमला के उपायुक्त से मांग की है कि वह इन निजी स्कूलों पर शिकंजा कसें। उन्होंने उपायुक्त से पूछा है कि वह निजी स्कूलों की मनमानी पर खामोश क्यों हैं। उन्होंने मांग की है कि निजी स्कूलों पर नियमों की अवहेलना करने व मनमानी करने पर कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर 1973 के तहत धारा 107 के तहत कार्रवाई अमल में लायी जाए।

इंस्पेक्शन टीमों की रिपोर्ट को सार्वजनिक करें अन्यथा होगा आंदोलन

छात्र अभिभावक मंच ने 23 अप्रैल को उच्चतर शिक्षा निदेशक तथा संयुक्त शिक्षा निदेशकों व उप निदेशकों के मध्य हुई बैठक की कार्यवाही की अधिसूचना जारी करने की मांग की है। मंच ने शिक्षा अधिकारियों से पूछा है कि वे निजी स्कूलों पर कार्रवाई का अपना एक्शन प्लान बताएं। मंच ने एक बार पुनः उच्चतर शिक्षा निदेशक को चेताया है कि वह इंस्पेक्शन टीमों की रिपोर्ट को सार्वजनिक करें अन्यथा आंदोलन होगा।

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किसके दबाव में निजी स्कूलों की इंस्पेक्शन रिपोर्ट सार्वजानिक नहीं कर रहा निदेशालय: अभिभावक मंच

Inspection report of himachal Pradesh's Private Schools

शिमला-छात्र अभिभावक मंच ने उच्चतर शिक्षा निदेशक से मांग की है कि निजी स्कूलों की इंस्पेक्शन रिपोर्ट को तुरन्त सार्वजनिक किया जाए।

मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा ने कहा कि 8 अप्रैल को शिक्षा निदेशालय पर हुए महाधरने के बाद उच्चतर शिक्षा निदेशक ने कई टीमें बनाकर प्रदेश में निजी स्कूलों की इंस्पेक्शन का कार्य शिक्षा विभाग के अधिकारियों को सौंपा था। प्रदेश भर के निजी स्कूलों की इंस्पेक्शन के 14 दिन का समय अब खत्म हो गया है। अधिसूचना के हिसाब से अब सभी निजी स्कूलों की इंस्पेक्शन रिपोर्ट उच्चतर शिक्षा निदेशक के टेबल पर होनी चाहिए। इस अधिसूचना के तहत प्रदेश के जिला मुख्यालयों पर स्थित निजी स्कूलों की इंस्पेक्शन 9 व 10 अप्रैल को निर्धारित की गई थी। उच्चतर शिक्षा निदेशक की अधिसूचना में स्पष्ट था कि दो दिनों की इंस्पेक्शन के बाद 11 अप्रैल को जिला मुख्यालयों के स्कूलों की रिपोर्ट शिक्षा निदेशक को सौंप दी जाएगी।

उन्होंने शिक्षा निदेशक से पूछा है कि वे इन स्कूलों की रिपोर्ट क्यों सार्वजनिक नहीं कर रहे हैं और रिपोर्ट को सार्वजनिक न करने के पीछे उनपर आखिर किसके दबाव है।

उन्होंने कहा कि जिला मुख्यालयों के निजी स्कूलों के अलावा अन्य निजी स्कूलों की इंस्पेक्शन का कार्य भी अब खत्म हो गया है। जिला मुख्यालयों के इतर अन्य निजी स्कूलों की इंस्पेक्शन की टाइम लिमिट भी 22 अप्रैल को खत्म हो गई है।

मंच ने कहा है कि शिक्षा विभाग अब जनता व अभिभावकों को स्पष्ट करे कि इंस्पेक्शन रिपोर्ट में निजी स्कूलों के संदर्भ में क्या आंकड़े व तथ्य सामने आए हैं। उन्होंने उच्चतर शिक्षा निदेशक से मांग की है कि वह पूरे प्रदेश के निजी स्कूलों की रिपोर्ट तुरन्त सार्वजनिक करें अन्यथा अभिभावकों का रोष उनको झेलना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अभिभावक केवल कागजी कार्यवाही व लीपापोती से संतुष्ट होने वाले नहीं हैं।

मंच ने कहा है किअभिभावकों को जमीनी स्तर पर निजी स्कूलों की लूट व मनमानी के खिलाफ ठोस कार्रवाई चाहिए। अगर शिक्षा विभाग ने इस पूरे मसले पर संतोषजनक कार्रवाई न की तो निश्चित तौर पर शिक्षा विभाग के खिलाफ अभिभावक और ज़्यादा मुखर होकर दोबारा से सड़कों पर उतर आएंगे।

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हि. प्र. स्कूल शिक्षा बोर्ड ने समय सीमा से पहले घोषित किया +2 परीक्षा परिणाम, इस साल 62.01% रहा परिणाम

HPBose results 2019

शिमला– हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने जमा दो कक्षा का परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया है। परीक्षा परिणाम 62।01 प्रतिशत रहा। कुल 95492 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी जिसमें से 58949 उत्तीर्ण हुए, जबकि 16102 परीक्षार्थियों को कंपार्टमेंट घोषित की गई।

आर्टस
आर्टस में उन जिला की अशमिता शर्मा 482 (96.4%) अंक प्राप्त कर पहले साथ पर रही। अशमिता डीएवी सीनियर सेंकेडरी स्कूल ऊना की छात्रा हैं। गवर्मेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल दरवियार हमीरपुर की साक्षी कपूर ने 480 (96%) दूसरा स्थान हासिल किया। तीसरे नंबर पर बीबीएन गवर्मेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल सलोह के कार्तिकेय कहोल 479 (94.8%) ने बाजी मारी है।

कॉमर्स

कॉमर्स संकाय में नाहन की प्रीति वीरसांता ने 98.8% अंक लेकर पहला स्थान हासिल किया है। वे कैरियर अकादमी, सीनियर संकेंडरी स्कूल की छात्रा हैं। आदर्श विद्या निकेतन, पब्लिक सीनियर संकेंडरी स्कूल, नाहन जिला सिरमौर की इशिता अग्रवाल ने 98.4% अंक लेकर दूसरे स्थान पर रहे ।

साइंस वर्ग
साइंस वर्ग में जिला कुल्लू के अनिल ने 98.5% अंक हासिल पहला स्थान हासिल किया है। वे राज साई स्टार स्कूल ढालपुर का विद्यार्थी है। दूसरे स्थान पर 98.2% अंक लेकर संयुक्त रूप से तीन विद्यार्थी हैं। इनमें लिटल एंजेल स्कूल मेहरे हमीरपुर की प्राकृति ठाकुर, मिनर्वा पब्लिक स्कूल घुमारवीं, बिलासपुर की सानवी सांख्यान और एस वी एन सीसे स्कूल कुनिहार जिला सोलन के दीपक कुमार अवस्थी शामिल हैं। साइंस वर्ग में रावमापा गोपालपुर जिला मंडी की शुभांगिनी पुत्री संजय सिंह ने 98% अंक लेकर तीसरा स्थान हासिल किया है।

शिमला के राजकीय छात्रा सीनिसर सेकंडरी स्कूल रोहडू की छात्रा दीक्षू शर्मा ने 97.6%  अंक लेकर तीसरा स्थान हासिल किया है।

हिमाचल प्रदेश के शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि सभी परीक्षाएं सीसीटीवी कैमरों के देख रेख में हुई है।

भारद्वाज ने बोर्ड चेयरमैन डॉ। सुरेश कुमार सोनी और अध्यापको को तय समय सीमा से पहले कक्षा 12वी का रिजल्ट घोषित करने पर बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश में पहली बार रिजल्ट को इतना जल्दी घोषित किया गया है।

भारद्वाज ने आज कल परीक्षाओं के साथ साथ अध्यापकों के चुनाव में रहने के बावजूद भी पेपरों को समय सीमा में चेक कर एक मिसाल पैदा करने पर बधाई दी है।

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