जबरन गिराए कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन प्रभावितों के मकान, प्रशासन पर तानाशाही करने का आरोप

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mandi fourlane project

मंडी- कीरतपुर से नेरचौक तक निर्माणाधीन फोरलेन सड़क के प्रभावितों के मकानों व संपत्तियों को गिराने को लेकर प्रभावितों ने प्रशासन पर तानाशाही करने का आरोप लगाया है। फोरलेन प्रभावित जनांदोलन संगठन के संयोजक यादवेंद्र पुरी ने मकानों व संपत्तियों को जबरदस्ती तोड़े जाने की मुहिम की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा है कि प्रभावितों के अधिकारों को अवैध हथकंडे अपनाकर कुचला जा रहा है।

संयोजक यादवेंद्र पुरी ने कहा कि फोरलेन प्रभावितों की ओर से फोरलेन सड़क निर्माण को लेकर कोई अड़चन नहीं डाली जा रही है जबकि प्रभावित पिछले करीब 2 वर्षों से एनएचएआई तथा भू-अर्जन अधिकारी द्वारा भूमि अधिग्रहण के अंतर्गत पक्षपातपूर्ण मुआवजा नीति के विरोध के चलते पेश आ रही समस्याओं को लेकर संघर्ष करने में लगे हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने सैंकड़ों प्रभावितों की मांगों को दबाने के लिए तानाशाहीपूर्ण रवैया अपना रखा है और संवैधानिक जनाधिकारों की न्यायपूर्ण रक्षा करने की बजाय प्राइवेट कंपनी को लाभ पहुंचाया जा रहा है।

पुरी ने कहा कि आधे-अधूरे मुआवजे के खिलाफ सैंकड़ों प्रभावितों ने आर्बीट्रेशन तथा स्थानीय अदालतों व हाईकोर्ट में केस दायर किए हुए हैं। मुआवजे को लेकर प्रशासन किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं कर सकता है क्योंकि यह प्रक्रिया एनएचएआई, भू-अर्जन अधिकारी तथा फोरलेन प्रभावितों के बीच का विवादास्पद मामला है। पुरी ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में कहीं भी जमीनों व मकानों के कब्जे अवैध नहीं हैं, सभी प्रभावितों की संपत्तियों के बाकायदा अधिसूचनाएं व अवार्ड हुए हैं। उन्होंने कहा कि फोरलेन प्रभावितों द्वारा शीघ्र ही आंदोलन करने की रूपरेखा तैयार की जा रही है।

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