युग हत्या प्रकरण से शिमला निगम की दिक्कतें बढ़ी, 5 सितंबर को मंत्रिमंडल की बैठक के बाद हो सकता है बड़ा फैसला

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शिमला- युग हत्या प्रकरण में हिमाचल की सबसे पहली नगर निगम शिमला की दिक्कतें बढ़ती हुई दिख रही हैं। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक पांच सितंबर को मंत्रिमंडल की बैठक के बाद इस मामले में बड़ा फैसला हो सकता है। पूरे घटनाक्रम से जुड़ी फाइल संबंधित महकमें के मंत्री सुधीर शर्मा को कमेंट के लिए भेज दी गई है। इसके बाद सरकार से उच्च स्तर पर बैठक के बाद नगर निगम के भाग्य पर फैसला हो सकता है।

अभी तक निगम की कार्यप्रणाली को लेकर भाजपा ही नहीं, सरकार भी सवालों के घेरे में लाती रही है। पहले पीलिया प्रकरण के कारण आईपीएच के साथ नगर निगम की किरकिरी हुई। अब युग प्रकरण में जिस तरह से कोताही बरतने के आरोप टैंकों की सफाई के संदर्भ में लग रहे हैं, उससे परेशानियां और बढ़ सकती है। शहरी विकास एक्ट में इस बात का प्रावधान है कि महकमा बिना मंत्रिमंडल की संस्तुति के किसी भी स्थानीय निकाय को औपचारिकताएं पूरी करने के बाद बर्खास्त कर सकता है। सूत्रों के मुताबिक इस मामले में शहरी विकास विभाग द्वारा कानून विभाग से सलाह-मशविरा किया गया है। निगम में शुरू से ही कांग्रेस का वर्चस्व रहा है।

सरकार हो बर्खास्त

नगर निगम के मेयर संजय चौहान का कहना है कि नगर निगम को नहीं, सरकार को बर्खास्त करना चाहिए। यह कानून व्यवस्था का मसला है। यदि सात दिनों में पुलिस गंभीरता दिखाती, जब बच्चे को जाखू में रखा था तो उसकी जान बच सकती थी। निगम का इसमें कोई दोष नहीं है। रिपोर्ट में यदि कोई कोताही सामने आएगी तो निगम अफसरों व कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी।

प्रशासक बिठाने की तैयारी

नगर निगम को यदि बर्खास्त किया जाता है तो यहां प्रशासक की व्यवस्था होगी। मंत्रिमंडल की बैठक के बिना ही शहरी विकास विभाग निगम को बर्खास्त करने के लिए एक्ट के तहत अधिकृत है। बावजूद इसके मंत्रिमंडल के सहयोगियों से इस मामले पर चर्चा हो सकती है।

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