एचआरटीसी की 150 से अधिक बसें पिछले 11 महीनों से बेकार खड़ी खा रही है जंग

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शिमला- केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने एचआरटीसी को जेएनएनआरयूएम के अंतर्गत 800 से भी ज्यादा जो बसें दी थीं, उनमें से 150 से भी ज्यादा बसें खड़ी हैं। इससे न केवल लंबी दूरी की यात्रा में लोगों को दिक्कतें आ रही हैं, बल्कि स्थानीय रूट्स पर भी मुश्किलें पेश आ रही हैं। बावजूद इसके एचआरटीसी जो इन बसों के जरिए लोगों को बेहतरीन यात्रा सुविधा जुटाने के ऐलान कर रहा था, वह अब औंधे मुंह गिरते नजर आ रहा है। सूत्रों के मुताबिक जो बसें खड़ी हुई हैं, उन्हें परिवहन मंत्री जीएस बाली का परिवहन निदेशालय ही रूट परमिट जारी नहीं कर सका है। यहां तक कि हमीरपुर से ऊना या फिर बिलासपुर से मंडी तक के लिए रूट परमिट नहीं मिल पाए हैं, जबकि नालागढ़ से चंडीगढ़, धर्मशाला से शिमला, शिमला से बंजार व ऐसे ही कई अन्य रूट्स पर निगम की ऐसी बसें दौड़ भी रही हैं। एचआरटीसी के करीब सभी अधिकारियों ने इस मामले में मौन साध रखा है, जबकि लोगों को हर जिले में 150 से भी ज्यादा ऐसी बसें खड़ी होने से लगातार दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सूत्रों का कहना है कि निगम ने जेएनएनआरयूएम की बसों को चलाने के लिए 13 से भी ज्यादा क्लस्टर निर्धारित किए थे, मगर क्लस्टर से हटकर निगम ने कई मार्गों पर रूट परमिट हासिल किए, जिसे लेकर निजी बस आपरेटरों ने भी ऐतराज जताया। अब क्लस्टर के अंदर की बात तो अलग रही, इससे बाहर भी एचआरटीसी को एक भी बस के लिए नया रूट चलाने का परमिट जारी नहीं हो पा रहा है। बताया जाता है कि तकनीकी दिक्कतों को दूर करने के लिए अब उच्च स्तरीय बैठकें जारी हैं। सूत्रों का दावा है कि कई बसें तो पिछले 11 महीनों से विभिन्न जिलों में जंग खा रही हैं। मंडी, हमीरपुर, कांगड़ा व चम्बा के साथ-साथ सिरमौर ऐसी दिक्कतों से सबसे ज्यादा जूझ रहे हैं।

क्लस्टर से बाहर नहीं दौड़ेंगी

बताया जा रहा है कि हमीरपुर का एक निजी बस आपरेटर जेएनएनआरयूएम की इन बसों को लेकर हिमाचल हाई कोर्ट पहुंचा था, जिसके बाद यह आदेश हुआ कि क्लस्टर के बाहर ये बसें नहीं चलाई जा सकतीं। यह मामला वर्ष 2015 का है।

सरकार का भी इनकार

परिवहन निदेशालय ने मामले को सरकार से उठाया था, जिसके बाद कानून विभाग ने इसका अध्ययन किया। सिफारिश दी गई कि न तो इसकी अपील हो सकती है, न ही क्लस्टर के बाहर बसें चल सकती हैं। सूत्रों के मुताबिक सरकार ने भी यही कहा।

11 महीनों से ऐसा हाल

पिछले 11 महीनों से ऐसी बसें या तो सड़क किनारे खड़ी हैं या बस स्टैंड्स पर। लोगों की सुविधा के लिए निगम इन बसों को क्यों नहीं चला पा रहा, क्यों नहीं अगली रणनीति बनाई जाती, इसे लेकर लोग भी हैरान हैं।

File Photo/Himachal Watcher

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