हिमाचल में केबल सेट टॉप बॉक्स के खेल से उपभोक्ता अनजान, आपरेटर वसूल रहे अपने-अपने रेट

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शिमला- प्रदेश में केबल का डिजिटलाइजेशन आम लोगों पर भारी पड़ रहा है। मनोरंजन के इस साधन पर जनता के अधिकार गौण दिखते नजर आ रहे हैं। पहले गांव-गांव में छोटे केबल आपरेटरों को एक बड़ा रोजगार शुरू हुआ था जो भी अब छिनता जा रहा है क्योंकि इस फील्ड में हिमाचल से बाहर के बड़े केबल आपरेटरो का दखल हो चुका है। राज्य के 10 जिलों में केबल के डिजिटलाइजेशन को ट्राई ने अनुमति दी है परंतु यहां पर ट्राई का कोई नियंत्रण दिखता नजर नहीं आ रहा। केबल आपरेटरों ने जो राशि तय की है, वही उपभोक्ताओं से वसूल करेंगे। किसी आपरेटर के दाम कुछ हैं तो किसी के कुछ और हैं, ऐसे में उपभोक्ताओं को मजबूरी में पैसा देना पड़ रहा है।

प्रदेश के केबल उपभोक्ताओं की बात करें तो उनको एक बात जानकर हैरानी होगी, जिसका उन्हें कोई पता नहीं है। सेट टॉप बाक्स लगाते वक्त उपभोक्ता को यह बताया जाता है कि उसे 1200 रुपए का सेट टॉप बॉक्स दिया जा रहा है, जिसमें 1000 रुपए रिफंडेबल हैं। उपभोक्ता यदि कहीं दूसरे स्थान पर जाता है या फिर वह उस आपरेटर की सेवाओं को बंद करवाना चाहता है तो उसको एक हजार रुपए रिफंड हो जाएंगे। परंतु ये पूरी सच्चाई नहीं है। बताया जाता है कि एक हजार रुपए की रिफंडेबल राशि केवल एक साल के लिए है, जबकि दूसरे साल में 1200 रुपए में से केवल 66 फीसदी राशि ही उपभोक्ता को वापस दी जाएगी। वहीं, तीसरे साल में एक भी पैसा सेट टॉप बॉक्स का रिफंड नहीं होगा और वह डिब्बा उपभोक्ता का ही हो जाएगा । टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अधीन इन केबल आपरेटरों पर शिकंजा कसने के लिए हिमाचल में किसी तरह की कोई व्यवस्था नहीं दिखाई दे रही। यहां पर पंजाब से फास्ट वे केबल चलाया जा रहा है, जिसके कनेक्शन बड़ी संख्या में हैं। वहीं शिमला में एक सिटी चैनल और हमीरपुर से एक केबल आपरेटर संचालक बताया जाता है।

ऐसे होती है वसूली

जानकारी के अनुसार केबल आपरेटरों को एक सेट टॉप बॉक्स 1900 रुपए का पड़ रहा है, जो कि उपभोक्ता को 1200 में दिया जा राहा है। शेष राशि उपभोक्ता से उसके मासिक बिल में वसूल की जा रही है। जब तक उपभोक्ता इसका इस्तेमाल करता है तब तक अतिरिक्त राशि को वसूल किया जाता है, जिसका किसी को कोई पता नहीं है।

अपने-अपने रेट

आपरेटरों ने मासिक रेट 240 रुपए व 250 रुपए का रखा है, मगर ये मूल्य हरेक शहर व गांव में अलग-अलग हैं जिस पर प्रशासन का कोई नियंत्रण नहीं है। बड़ी बात यह भी है कि डिजिटलाइजेशन के बाद केबल पंजाब से चलाया जा रहा है और वहां से इसके सिग्नल वीक रहते हैं। राजधानी शिमला में ही केबल के चैनल सही तरह से नहीं आ पाते और रोजाना इनमें खराबी रहती है। ऐसे में इस पर भी किसी का कोई नियंत्रण नहीं है।

मनमानी का आलम

हाल ही में प्रदेश में जी नेटवर्क के सभी चैनल बंद हो गए थे क्योंकि केबल आपरेटरों ने इन्हें इसलिए बंद कर दिया क्योंकि चैनल के संचालकों ने अधिक राशि की डिमांड की, जिससे उनकी मनमर्जी का अंदाजा लगाया जा सकता है।

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