डीडीयू शिमला में रक्त फेंकने का सिलसिला बेरोकटोक जारी, आपसी मिलीभगत से मामले को दबाने में लगा स्वास्थ्य महकमा

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शिमला- दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल स्थित राज्य ब्लड बैंक में रक्त फेंकने का सिलसिला बेरोकटोक जारी है। उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव ने तीन हफ्ते पूर्व वहां बड़ी मात्र में रक्त कूड़ेदान में डाले जाने का मामला उजागर किया था। उसके बाद भी ब्लड बैंक ने 24 यूनिट खून फ़ेंक दिया। सूचना के अधिकार के तहत उन्हें मिली जानकारी के अनुसार सिर्फ मई महीने में 31 यूनिट रक्त मियाद पूरी होने पर बर्बाद कर दिया गया जबकि उसे समय रहते आईजीएमसी ब्लड बैंक को दिया जा सकता।

फाउंडेशन ने रक्त फेंके जाने की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि उन्होंने स्वास्थ्य प्रधान सचिव को पत्र लिख कर अस्पताल के ब्लड बैंक इंचार्ज को तुरंत सस्पेंड करने की मांग की। उन्होंने मामले को रफादफा करने के लिए उसके व स्वास्थ्य निदेशक के बीच हुई सांठगांठ की जांच कराने की भी मांग की। स्वास्थ्य निदेशक ने ब्लड बैंक इंचार्ज का बचाव करते हुए बड़े पैमाने पर रक्त फेंकने को “रूटीन का मामला” बता कर बिना तथ्य पता किए जांच कराने से इंकार कर दिया था।

फाउंडेशन का यह भी कहना है कि उन्होंने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को पत्र लिख कर जांच की मांग की तो सरकार ने जांच बैठाई लेकिन अभी तक जांच समिति की रिपोर्ट अभी नहीं आई है। उन्होंने ये भी कहा कि राज्य में ब्लड बैंकिंग व्यवस्था की खराब हालत के लिए स्वास्थ्य निदेशालय ही जिम्मेवार है। 1996 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए एक फैसले के बाद गठित राज्य ब्लड ट्रांसफ्यूज़न कौंसिल बेकार पडी है। साल में उसकी 4 मीटिंग होनी चाहिए मगर 2014 के बाद उसकी बैठक ही नहीं हुई।

आरटीआई के जवाब में मिली सूचना के आधार पर फाउंडेशन ने बताया कि मई माह में कुल 31 यूनिट रक्त मियाद पूरी होने के कारण फेंका गया। इसमे 4 मई को 7 यूनिट, 13 मई को 5 यूनिट, 16 मई को 9 यूनिट और 20 मई को 10 यूनिट रक्त फेंका गया। ये सभी ब्लड यूनिट 35 दिन की मियाद पूरी कर चुके थे। लेकिन ब्लड बैंक के रिकॉर्ड में इनमे से 14 यूनिटों को नष्ट करने का झूठा कारण “रक्त की कम मात्रा” बताया गया। ब्लड बैग में रक्त की मात्रा 300 ग्राम से कम होने पर उसे मैरीज़ को नहीं दिया जा सकता और तुरंत नष्ट कर दिया जाता है। जबकि ये 14 यूनिट 35 दिन की मियाद के बाद फेंके गए।

फाउंडेशन के अनुसार डीडीयू अस्पताल रक्त की प्रतिमाह खपत गत वर्ष 31 यूनिट थी जबकि कमला नेहरू अस्पताल में करीब 170 प्रति माह थी। जबकि आईजीएमसी में खपत 1250 यूनिट प्रतिमाह से ज्यादा है। इसलिए दोनों छोटे ब्लड बैंकों को बंद करके स्टाफ आईजीएमसी ब्लड बैंक में शिफ्ट करके उसे मज़बूत बनाया जाए। शेष दोनों अस्पतालों में मरीजों की ज़रुरत के अनुरूप ब्लड स्टोरेज सेंटर शुरू किये जाने चाहिए। उन्होंनेने यह भी कहा कि रक्तदानी निस्वार्थ भाव से लोगों का जीवन बचाने हेतु खून दान करते हैं और उसे इस तरह बर्बाद किया जाना शर्मनाक है। इससे रक्तदान आंदोलन को तगड़ा झटका लगा है।

तेरह मई को फेंका गया रक्त

रजिस्ट्रेशन नंबर ब्लड ग्रुप
25646 ओ पॉजिटिव
25764 ओ पॉजिटिव
25700 ओ पॉजिटिव
25775 ओ पॉजिटिव
25789 एबी पॉजिटिव

यह है सोलह मई का आंकड़ा

रजिस्ट्रेशन नंबर ब्लड ग्रुप
25664 बी नेगेटिव
25649 एबी पॉजिटिव
25679 एबी पॉजिटिव
25677 ओ पॉजिटिव
25682 ओ पॉजिटिव
25683 ओ पॉजिटिव
25687 ओ पॉजिटिव
25696 ओ पॉजिटिव

बीस मई को फेंका गया आउट डेटिट रक्त

रजिस्ट्रेशन नंबर ब्लड ग्रुप
25731 एबी नेगेटिव
25737 बी पॉजिटिव
25724 एबी पॉजिटिव
25728 एबी पॉजिटिव
25722 बी पॉजिटिव
25735 बी पॉजिटिव
25716 ओ पॉजिटिव
25707 एबी पॉजिटिव
25699 बी नेगेटिव
25734 बी पॉजिटिव

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