अपना वेतन, भत्ता, पेंशन 5 मिनट में बढ़ाई पर 5 साल में कृषक मित्रों के मानदेय तक नहीं दे पाई सरकार

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पैसा देना तो दूर इन्हें मानदेय देगा कौन यह भी तय नहीं, 2010 में ग्राम सभाओं के माध्यम से हुआ था तीन हजार का चयन,यही तय नहीं कि किस महकमे के तहत कार्यरत हैं ये कृषक मित्र, तैनाती के वक्त की गई थी चार हजार रुपये मानदेय देने की पेशकश

शिमला- मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने बुधवार को कहा जब मजदूरों की दिहाड़ी बढ़ सकती है तो विधायकों का वेतन भत्ता क्यों नहीं? तर्क सही है लेकिन इसी राज्य में पांच साल से कृषक मित्र गांवों में काम कर रहे हैं लेकिन आज तक इन्हें सरकार मानदेय के नाम पर एक रुपया तक नहीं दे पाई। पैसा देना तो दूर इन्हें मानदेय देगा कौन यह भी तय नहीं। पंचायती राज विभाग इन्हें कृषि तो कृषि इन्हें पंचायती राज विभाग का बता रहे हैं।

यह भी तब जबकि कृषक मित्रों को मानदेय हिमाचल सरकार नहीं बल्कि केंद्र सरकार के आत्मा प्रोजेक्ट से मिलना है। कृषक मित्रों के लिए जो बजट तय किया गया, उसका भी कोई अता-पता नहीं। वेतन और मानदेय को लेकर राज्य में गजब विरोधाभास है। कृषि मित्रों की तैनाती दो अक्तूबर 2010 की ग्राम सभाओं में पंचायतों में की गई थी। इन्हें केंद्र सरकार की कृषि, पशुपालन आदि से जुड़ी नीतियों के प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी दी गई थी।

ये आज तक इस दायित्व को बिना कुछ लिए निभा रहे हैं। कृषक मित्र संगठन के नेताओं की मानें तो शुरू में उन्हें चार हजार रुपये मानदेय देने की पेशकश की गई थी मगर आज तक उन्हें एक नया पैसा नहीं मिला। उनका कहना है कि बिहार, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा में से कुछ राज्यों में कृषक मित्रों को छह हजार रुपये मानदेय मिल रहा है।

भारतीय मजदूर कांग्रेस (इंटक) में कृषि मित्र संगठन का प्रभार देख रहे राज्य उपाध्यक्ष सोहन वर्मा ने कहा कि उन्हें हाल ही में निदेशालय से बताया गया है कि कृषक मित्रों का मामला न्यायालय में है इसीलिए कृषि विभाग इसमें कोई फैसला नहीं ले पाएगा। वर्मा ने कहा कि इस बारे में सीएम वीरभद्र सिंह का रुख सकारात्मक हैं मगर अफसरशाही इस बारे में कोई ध्यान नहीं दे रही है।

पंचायती राज विभाग के संयुक्त निदेशक केवल शर्मा ने कहा कि ग्रामसभाओं से तो कृषक मित्रों की केवल तैनातियां की गई थीं, लेकिन ये कृषि विभाग की नीतियों पर ही कार्यरत हैं। कृषि विभाग के निदेशक डॉ. सोमराज कालिया ने कहा कि ये कृषि विभाग नहीं बल्कि पंचायती राज विभाग ने तैनात किए हैं। उन्‍होंने कहा कि ये कोर्ट चले गए हैं इसीलिए कुछ कहना ठीक नहीं।

Photo: Amar Ujala

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