वन विभाग के अफसर ही बने पेडों के दुश्मन, प्लॉट बनाने के लिए शिमला में आफिसर ने काट डाले 5 पेड़

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शिमला- वन विभाग के एक बड़े अफसर ने मकान का प्लॉट बनाने के लिए हरे-भरे पेड़ काट डाले। वन विभाग के अफसरों की मिली भगत से एक दो नहीं बल्कि पांच हरे पेड़ों पर कुल्हाड़ी चली है। कुसुम्पटी के पास गोरखू लॉज में वन विभाग के सेक्शन आफिसर ने मकान बनाने के लिए पेड़ों को काट दिया। पांच पेड़ एक रात में ठिकाने नहीं लगाए गए बल्कि पिछले पांच महीनों में एक एक कर पेड़ों को काटा गया और ठूंठ ठिकाने लगाए गए।

राजधानी शिमला में तैनात वन विभाग के अफसरों की सांठगांठ से पूरे प्रकरण को अंजाम दिया गया। शहर के एक जागरूक नागरिक की शिकायत पर नगर निगम के हरकत में आने से मामले का खुलासा हुआ। नगर निगम के मेयर संजय चौहान को शिकायत मिली की कुसुम्पटी के पास गोरखू लाज में अवैध रूप से हरे पेड़ों को काटा जा रहा है। नगर निगम ने इसकी मौखिक शिकायत वन विभाग को की।

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वन विभाग ने जब कोई कार्रवाई नहीं की तो मेयर संजय चौहान ने एडिशन चीफ सेकरेटरी फारेस्ट, प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर फारेस्ट और शिमला सर्कल के वन अरण्यपाल को लिखित शिकायत की। नगर निगम ने वन अरण्यपाल से सात दिन में पूरे प्रकरण की रिपोर्ट तलब की। इसके बाद आननफानन में पांच माह से लापरवाही की नींद सोए वन विभाग ने कार्रवाई अमल में लाई।

एफआईआर की जरूरत नहीं

नगर निगम की ओर से शिकायत मिलने के बाद तुरंत एक्शन लिया गया है। डैमेज रिपोर्ट काटी गई है। लकड़ी बरामद हो गई है। मामला एमसी एरिया का है इसलिए चालान भी होगा। जहां तक एफआईआर की बात है तो वह जरूरी नहीं है, क्योंकि पेड़ काटने वाले ने अपना गुनाह कबूल कर दिया है। डैमेज रिपोर्ट भी उसी के नाम से काटी गई है। संबंधित व्यक्ति के खिलाफ विभागीय कार्रवाई को लेकर अभी फैसला नहीं लिया गया है।

– आलोक प्रेम नागर, वन अरण्यपाल, शिमला सर्कल

एमसी एक्ट में करेंगे कार्रवाई

कुसुम्पटी में हरे पेड़ काटने की शिकायत के बाद वन अरण्यपाल को लिखित शिकायत दी गई थी। शहर की सीमा में एमसी एक्ट लगता है इसलिए एमसी एक्ट के तहत ही कार्रवाई होनी चाहिए। पेड़ काटने से पहले नगर निगम की ट्री अथारिटी को सूचना नहीं दी गई। मामले में संबंधित अधिकारी दोषी साबित हुए तो उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।- संजय चौहान, मेयर, नगर निगम शिमला

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एमसी एक्ट में दो साल की सजा का है प्रावधान

एमसी एक्ट के तहत हरा पेड़ काटने पर दोष साबित होने की स्थिति में कानूनी कार्रवाई के तहत दो साल की सजा का प्रावधान है।

न्यायालय के आदेशों की अवहेलना

न्यायालय ने राजधानी शिमला में हरे पेड़ों को काटने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा रखा है। न्यायालय के आदेशों का पालन करवाना वन विभाग का मौलिक कर्तव्य है। आदेशों का पालन करना तो दूर वन विभाग के अफसर सांठगांठ कर पेड़ों के ही दुश्मन बन गए।

अफसर को बचाने में लगा वन विभाग

पेड़ काटने के दोषी अफसर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने से वन विभाग बच रहा है। वन विभाग का दावा है कि जो कार्रवाई बनती है वो कर दी गई है। हरे पेड़ों पर पांच महीने से कुल्हाड़ी चलती रही लेकिन शहर में वनों के संरक्षण के लिए तैनात अफसरों ने कोई कार्रवाई नहीं की। वन विभाग जिम्मेदार अफसरों को भी बचाने में लगा हुआ है।

Credit: Amar Ujala

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