गलती एससी की हर्जाना चुकाए आम पब्लिक

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शिमला- पानी के बिलों को लेकर नगर निगम में अराजकता की स्थिति बनी हुई है। पानी का बिल कब जारी होगा और उपभोक्ताओं तक कैसे पहुंचेगा इसे लेकर नगर निगम कोई व्यवस्था नहीं कर सका है। बिलों को लेकर अपनी खामियां सुधारने की जगह नगर निगम लोगों पर मनमाना एरियर और सरचार्ज थोपने में लगा है।

मीटर रीडिंग पर पानी के मासिक बिल जनरेट करने और मोबाइल मेसेज के जरिये लोगों तक बिल पहुंचाने की नगर निगम की योजनाएं पूरी तरह हवाई साबित हुई हैं। 23 हजार घरेलू और 7 हजार व्यावसायिक पानी उपभोक्ताओं को नगर निगम न तो पानी के मासिक बिल जारी कर पा रहा है और न ही बिलों का लोगों के घरों तक पहुंचाने के लिए कोई सिस्टम बन पाया है।

नगर निगम दो से लेकर छह महीने के पानी के बिल एक साथ जनरेट कर रहा है। इसके बाद भी बिलों को उपभोक्ताओं के घरों तक पहुंचाने का कोई बंदोबस्त नहीं है।बिल न मिलने से अगर उपभोक्ता निर्धारित समय में बिल जमा न करवा सके तो नगर निगम अगला बिल एरियर के साथ सरचार्ज जोड़ कर जारी कर रहा है, जिससे उपभोक्ताओं को बिना किसी गलती के मोटी चपत लग रही है।

लोगों को घरों पर बिल उपलब्ध करवाने के लिए नगर निगम ने पिछले महीने ट्रायल के तौर पर सैहब सोसायटी के सुपरवाइजरों के माध्यम से शहर में पानी के बिल बांटे लेकिन करीब 600 लोगों के घरों पर बिल नहीं पहुंचे।

अमृत मिशन के तहत राजधानी शिमला में पानी के आटोमेटिक मीटर लगेंगे। पानी की खपत के हिसाब से मीटर बिल जनरेट करेगा। उपभोक्ताओं को उनके मोबाइल मेसेज पर बिल की जानकारी मिल जाएगी। मीटर रिडिंग के लिए निगम कर्मचारियों को भी एक एक मीटर के पास नहीं जाना पड़ेगा।
-पंकज राय आयुक्त, एमसी शिमला

समय पर पानी का बिल जमा करवाने के बाद भी नगर निगम उपभोक्ताओं को नए बिल पुराना एरियर और सरचार्ज जोड़कर जारी कर रहा है। नगर निगम ने सुशीला काटेज कनलोग को एक अप्रैल 2014 से 31 मार्च 2015 तक का 12 महीनों का 3276 रुपये पानी बिल मई 2015 में जारी किया।

21 मई को बिल का भुगतान कर दिया। बावजूद इसके 3276 रुपये एरियर और 328 रुपये सरचार्ज जोड़ कर उपभोक्ता को पानी का अगला बिल जारी कर दिया गया।

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