नगर निगम शिमला में दो करोड़ का स्ट्रीट लाइट फर्जीवाड़ा

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कांग्रेसी नेताओं, बड़े अधिकारियों और शहर के बड़े कारोबारियों के घरों के आसपास रोशनी करने के लिए नगर निगम ने शहर की आम जनता के हक रौंद डाले। मेयर, डिप्टी मेयर और हाउस को विश्वास में लिए बगैर दो करोड़ की लागत से शहर में 112 स्थानों पर नई स्ट्रीट लाइटें लगाने की सूची तैयार कर ली गई। इसमें से 47 स्थानों पर नई स्ट्रीट लाइटें लगा भी दी हैं। 2012 से चल रही इस गड़बड़ी का खुलासा वीरवार को हाउस में हुआ।

जाखू वार्ड से पार्षद मनोज कुठियाला के सवाल के जवाब में नगर निगम की ओर से दिए विवरण से इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। निगम पार्षद सरोज ठाकुर, रजनी सिंह, कांता स्याल, कल्याण चंद और भारती सूद ने भी पार्षद प्राथमिकता को दरकिनार कर मनमाने तरीके से स्ट्रीट लाइट प्वाइंट चिन्हित करने पर सवाल उठाए।

निगम महापौर ने पूरे फर्जीवाड़े की जांच के आदेश दिए हैं और साथ ही नई स्ट्रीट लाइटें लगाने के काम पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी है। निगम सहायक आयुक्त प्रशांत सरकैक को जांच का जिम्मा सौंपा है। स्ट्रीट लाइटें लगाने के लिए किस आधार पर प्राथमिकता तय की गई इसकी जांच की जाएगी। एक माह के भीतर पूरे प्रकरण की जांच कर मेयर को रिपोर्ट सौंपेंगे।

किससे पूछ कर दी मंजूरी: नगर निगम के ढली वार्ड से पार्षद शैलेंद्र चौहान ने ढली से आश्रम और वुडरिना के लिए छह लाख की लागत से 18 स्ट्रीट लाइटों की मंजूरी पर सवाल उठाए। कहा कि जनारथा हाउस के लिए 18 स्ट्रीट लाइटों की मंजूरी बिना उन्हें विश्वास में लिए बगैर दे दी गई। वार्ड के ऐसे क्षेत्र जहां स्ट्रीट लाइटें लगाने के लिए डीओ दिए थे उन्हें नजर अंदाज कर दिया गया।

तेंजिन हास्पिटल के पास 21 प्वाइंटों की क्या जरूरत- कुसुम्पटी वार्ड से पार्षद कुसुम ठाकुर ने तेंजिन हास्पिटल के पास तीन लाख की लागत से 21 नई स्ट्रीट लाइट प्वाइंटों की स्वीकृति पर सवाल उठाए। कहा कि वार्ड में ऐसे क्षेत्र जहां सालों से स्ट्रीट लाइटें नहीं हैं उन्हें दरकिनार कर मनमर्जी से स्ट्रीट लाइट प्वाइंट स्वीकृत कर काम किया जा रहा है।

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