JNNURM नेहरू योजना से परेशान ग्रामवासी,कैसे लेजाएं एक सब्जी की बोरी या सेब की पेटी

0
603

शिमला -ओडी शिवान संजौली शमशान घाट बस स्टाप,सवारी की दादागिरी समझो या मजबूरी चालक /परिचालक का गाँव में रात काटने का डर समझो या जानपहचान नई नेहरू बस सेवा से सवारी है परेशान,बिना छत कैसे ले जाए सामान

JNNURM-2
​​(ऊपरी शिमला का चित्र )

जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन की बसें आम जनता को परेशानी सबब बनती जा रही हैं ! यह बात विकास समिति टुटू ने जनहित में प्रदेश के मुख्यमंत्री व् परिवहन मंत्री के ध्यान में लाई है ! प्रैस को जारी एक संयुक्त ब्यान में समिति अध्यक्ष नागेन्द्र गुप्ता व् महासचिव ठाकुर सिंह वर्मा ने कहा की एक ओर जहां यह बिना छत की बसें सिर्फ शहरी इलाकों में चलाई जानी चाहिए थी उन इलाकों में परिवहन विभाग न चला कर दूरदराज ग्रामीण क्षेत्रों को भेज रहा है जिस कारण सवारियों को अपना हल्का सामान या एक इटायची /ट्रंक या सेब की पेटी अथवा छोटी छोटी खाद्य सामग्री भी बिना छत की बस के अपने घरों को ले जाना मुश्किल हो रहा है वहीं दूसरी ओर बस के भीतर सामान ठूसने से सवारियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है !

समिति अध्यक्ष ने कहा की ऐसा ही मामला उनकी समिति के ध्यान में तब आया जब एक सवारी ने दोपहर के समय में संजौली बस स्टाप से शिमला से ऊपरी शिमला (ओडी -शिवान) जा रही बस में कारपेट के तीन बंडल बस के भीतर ले जाने की बात की ! उक्त सवारी का कहना था की सामान तो ले जाना है और बिना छत की बस अभी आएगी और मैं इस सामान को बस के भीतर ठूस कर ले जाऊँगा ! इस पर जब हमने जनहित में उक्त सवारी से यह जानना चाहा की क्या बस चालक /परिचालक इसका विरोध नहीं करेंगे तो उक्त व्यक्ति ने कहा की बस चालक/परिचालक इसलिए विरोध नहीं करते हैं क्योंकि उन्होंने गाँव में रात्रि ठहराव करना होता है चाहे उसे चालक/परिचालक का डर समझो या रोजाना की जानपहचान ! उक्त सवारी ने यह माना की इतने दूर के सफर में अन्य बस सवारियों को चढ़ने -उतरने में परेशानी तो होगी परन्तु हमारी भी सामान ले जाने की मजबूरी है ! उन्होंने कहा की सफर लंबा है और यदि वह इस थोड़े से सामान के लिए पिकअप गाड़ी या कोेई अन्य वाणिज्य वाहन ले जाना चाहें तो सामान की कीमत से ज्यादा तो किराया भाड़ा ही लग जाएगा !

JNNURM
(ऊपरी शिमला का चित्र )

समिति पदाधिकारियों राजीव सूद ,राजेश बाटल,नरेश शर्मा,सुरेन्द्र बाटला ,ओम प्रकाश शर्मा ने कहा की बिना छत की नेहरू बस सेवा ग्रामीण क्षेत्रों में चलाना जनहित में नहीं है क्योंकि हिमाचल फल फ्रूट /सब्जी उत्त्पादक राज्य है और यदि किसी व्यक्ति ने दूरदराज से एक सेब की पेटी या एक सब्जी की बोरी ग्रामीण क्षेत्र से शहर की ओर बेचने के लिए या अपने निजी इस्तेमाल को घर को लानी हो तो बस में छत न होने पर कोई पिकअप से ढोने पर मूल कीमत से ज्यादा भाड़ा देना पड़ेगा जो की न्यायसंगत नहीं है ! नागेन्द्र गुप्ता ने कहा की अब कारपेट को ठूसना सवारी की दादागिरी समझो या मजबूरी यह परिवहन विभाग व् सरकार पर निर्भर करता है ! उन्होंने कहा की समिति ध्यान में सवारियों द्वारा लाया गया है की यह बसें लांगरुट के लिए आरामदायक भी नहीं है और सीटों पर थकावट महसूस होती हैं !

समिति ने मुख्यमंत्री व् परिवहन मंत्री से जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन की नई बसों को शहरी इलाकों के दायरे में चलाने की मांग की है और स्थानीय शहरी बस सेवाओं को जनहित में सुदृढ़ करने की बात कही है जिसके लिए केन्द्र सरकार ने इस मिशन को अंजाम दिया है ! गुप्ता ने कहा की परियोजनाओं का इस्तेमाल उसी कार्य के लिए किया जाना चाहिए जिसके लिए योजना बनाई जाती हैं ! उन्होंने कहा की प्रशासन /सरकारों द्वारा योजनाओं का सही रूप से इस्तेमाल न करना जन सुविधाओं के विपरीत है जो की असहनीय है !

हिमाचल वॉचर हिंदी के एंड्रायड ऐप के लिए यहां क्लिक करें

NO COMMENTS