फेसबुक और गुगल में आपत्तिजनक तथ्यों को लेकर शिकायत करने का नहीं है कोई प्रावधान

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“सोशल नेटवर्किंग साइट गूगल और फेसबुक पर आपत्तिजनक तथ्यों को हटाने के लिए शिकायत करने का विकल्प नहीं दिया गया है और न ही इन्होंने ऐसी चेतावनी लगाई है, जिसमें यह कहा गया हो कि 13 साल से कम उम्र के बच्चे इसका इस्तेमाल नहीं कर सकते”

नई दिल्ली, आपत्तिजनक तथ्यों को लेकर दायर याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सोशल नेटवर्किंग साइट गूगल और फेसबुक से पूछा है कि उनके यहां शिकायत करने का क्या तरीका हैघ् कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश बीडी अहमद व न्यायमूर्ति विभू बाखरू की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता से कहा कि इन साइट्स के खिलाफ उनके पास जो शिकायत हैं, उसे वे केंद्र सरकार को दें। केंद्र गूगल व फेसबुक से बात कर यह तय करे कि क्या कार्रवाई की जानी चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 23 अगस्त को होगी।

हाई कोर्ट के समक्ष याचिकाकर्ता के वकील विराग गुप्ता ने कहा कि दोनों साइट्स पर आपत्तिजनक तथ्यों को हटाने के लिए शिकायत करने का विकल्प नहीं दिया गया है और न ही इन्होंने ऐसी चेतावनी लगाई है,जिसमें यह कहा गया हो कि 13 साल से कम उम्र के बच्चे इसका इस्तेमाल नहीं कर सकते। इस दलील पर फेसबुक की ओर से कहा गया कि उनके पास ऐसा प्रावधान नहीं है, जिसके तहत वे साइट पर यह चेतावनी लिखें। उनकी साइट अमेरिकी कानून के तहत कार्य करती है। इस पर अदालत ने कहा कि अमेरिकी कानून की बात कहकर किसी भी कार्रवाई से नहीं बचा जा सकता।

वहीं गूगल ने कहा कि वे भारतीय आइटी एक्ट के दायरे में आते हैं। भारतीय कानून में ऐसा कोई नियम या बंदिश उन पर नहीं डाली गई है, जिसके तहत उन्हें किसी भी तरह की चेतावनी या बॉक्स साइट पर डालना पड़े। फिर भी वे मामले में सुझावों को लागू करने का प्रयास कर रहे हैं। ज्ञात हो कि इस मामले में भाजपा के पूर्व वरिष्ठ नेता केएन गोविंदाचार्य ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।

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