केदारनाथ में बरपा बारिश का कहर, चारों ओर तबाही का मंजर

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“केदारनाथ में भारी बारिश के बाद चारों ओर तबाही का मंजर है प्रकृति ने अपनी विनाशलीला रचने में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन चमत्कारिक रूप से केवल केदारनाथ मंदिर सुरक्षित बचा रह गया है, आसपास का समूचा क्षेत्र तबाह हो गया है। जगह-जगह मलबे के ढेर नजर आ रहे हैं”

जिस जगह से केदारनाथ के दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं की लंबी-लंबी लाइनें लगा करती थीं , वहां आज पहाड़ के बड़े.बड़े टुकड़े और ध्वस्त मकानों के मलबे दिखाई दे रहे हैं।

भारी बारिश और भूस्खलन की वजह से केदारनाथ के पवित्र मंदिर को छोड़कर बहुत ज्यादा हिस्सा बरबाद हो गया है। बारिश के कारण चारों धाम की यात्रा भी फिलहाल स्थगित कर दी गई है और जगह-जगह से लोगों के फंसे रहने की खबरें मिल रही हैं।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने माना कि केदारनाथ मंदिर का मुख्य हिस्सा और मुख्य द्वार अभी भी सुरक्षित है लेकिन आसपास के बाजार और धर्मशालाओं को भारी नुकसान हुआ है। इन स्थानों पर रहने वाले लोग सुरक्षित जगह पहुंच गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 450 मार्ग क्षतिग्रस्त हुए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोग अफवाहों पर बिलकुल ध्यान न दें। प्रदेश सरकार केदारनाथ और आसपास के स्थानों पर फंसे लोगों को बचाने में जुटी हुई है। बहुगुणा ने कहा कि यदि बुधवार को मौसम साफ रहा तो हम सभी फंसे यात्रियों को हेलीकॉप्टर के जरिये सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा देंगे।

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श्री बद्रीनाथ श्री केदारनाथ मंदिर समिति के विशेष कार्य अधिकारी अनसूया सिंह नेगी ने कहाए ष् हमें खबर मिली है कि मंदिर परिसर का एक हिस्सा बह गया है , लेकिन मंदिर को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। चूंकि वहां पहुंचना संभव नहीं है ,ऐसे में नुकसान का सटीक आकलन नहीं किया जा सकता। समय पर मंदिर से सूचना मिल पाना संभव नहीं है क्योंकि संचार संपर्क टूट गए हैं।

अधिकारी ने कहा कि प्रशासन फंसे हुए श्रद्धालुओं की मदद के लिए यथासंभव प्रयास कर रहा है लेकिन कठिन भौगोलिक स्थिति और बिगड़ते मौसम के चलते इन प्रयासों में कोई सफलता नहीं मिल रही है। उन्होंने कहा कि हेलीकॉप्टर से बचाव दल भेजने की कोशिश चल रही है।

यह मंदिर समुद्र तल से 3581 मीटर की ऊंचाई पर है। गौरी कुंड से 14 किलोमीटर दूर इस स्थान पर टट्टू द्वारा या ट्रेकिंग कर या फिर हेलीकॉप्टर से पहुंचा जा सकता है लेकिन खराब मौसम के चलते दोनों ही मार्ग अव्यावहारिक हैं।

उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड में आकस्मिक बाढ़ ए बादल फटने और भूस्खलन से 52 लोगों की जान जा चुकी है और 175 मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
Source: (वेबदुनिया, भाषा)

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Images:HT & IndianExpress

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