शिमला के निजी स्कूल ने एक साल में 28 हज़ार से 63 हज़ार कर दी फीस, अभिभावकों ने किया विरोध प्रदर्शन

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Chapslee School, Shimla Fees

शिमला- शिमला का चेप्सली स्कूल प्लस वन में छात्रों से दसवीं के मुकाबले में लगभग ढाई गुणा राशि वसूल रहा है। प्लस वन में दाखिल होने वाले छात्रों से स्कूल के प्रबंधन ने दसवीं में लगभग अट्ठाइस हज़ार रुपये फीस वसूली थी परन्तु प्लस वन में यह स्कूल इन छात्रों से कला,वाणिज्य विज्ञान संकाय के लिए अब 63 हज़ार से से लेकर 65 हज़ार रुपये फीस वसूल रहा है। एक ही वर्ष में यह लगभग दो सौ बत्तीस प्रतिशत अथवा ढाई गुणा की फीस बढ़ोतरी है।

ये आरोप अभिभावकों द्वारा आज दिनांक 28 मार्च को इस निजी स्कूल पर लगाए गए! अभिभावकों ने इसी के खिलाफ आज छात्र अभिभावक मंच के झंडे तले चेप्सली स्कूल लोंगवुड के बाहर प्रदर्शन किया।

अभिभावकों ने कहा कि इसी तरह इस स्कूल की पहली से दसवीं कक्षा तक कि फीस 2014 व 2019 के मध्य ग्यारह हजार रुपये से बढ़कर लगभग इकत्तीस हज़ार रुपये हो गई है जोकि लगभग तीन गुणा बढ़ोतरी है। इसके अलावा हर वर्ष हर छात्र से चार हज़ार रुपये एडवांस फीस के रूप में भी वसूले जा रहे हैं।
Chapslee fee comparision

अभिभावकों ने कहा कि यह खुली लूट है व निजी स्कूलों की शैक्षणिक अराजकता नहीं तो और क्या है।

अभिभावकों ने कहा कि चेप्सली स्कूल की इस मनमानी से स्पष्ट है कि वह सरकारी निर्देशों व न्यायालयों कद आदेशों की परवाह नहीं करता है। उन्होंने चेप्सली स्कूल से तत्काल प्लस वन की फीस बढ़ोतरी वापिस लेने की मांग की है और कहा है कि अन्यथा इस स्कूल के खिलाफ मोर्चेबन्दी होगी।

अभिभावकों मंच ने निजी स्कूलों की मनमानी व लूट पर प्रदेश सरकार की खामोशी की कड़ी निंदा की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि प्रदेश सरकार व शिक्षा विभाग की इसी खामोशी के कारण निजी स्कूलों की मनमानी को मूक समर्थन मिल रहा है व ये स्कूल 18 मार्च की शिक्षा निदेशालय की अधिसूचना के बावजूद छात्रों व अभिभावकों पर भारी फीसें लाद रहे हैं।

उन्होंने कहा कि निजी स्कूल मनमानी से बाज नहीं आ रहे हैं। जहां इन स्कूलों के द्वारा फीसों में भारी बढ़ोतरी की जा रही है वहीं आई कार्ड के नाम पर भी भारी ठगी की जा रही है। इसके अलावा पिकनिक को स्वैच्छिक करने के बजाए अनिवार्य करके अभी भी हज़ारों रुपये वसूले जा रहे हैं।

उन्होंने प्रधान शिक्षा सचिव व शिक्षा निदेशक को निजी स्कूल शिक्षा निदेशालय के 18 मार्च के आदेशों की पालना नहीं करने पर अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा है! अभभवकों ने पुछा है कि क्या महज़ एक अधिसूचना जारी करके उनकी जिम्मेवारी खत्म हो गई या फिर उन पर कोई दवाब है जिस कारण वे इस अधिसूचना को धरातल पर लागू नहीं करवा पा रहे हैं

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