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यातायात नियमों की अवहेलना पर अब पांच गुणा जुर्माना, नाबालिग दुर्घटना करता है तो मां-बाप भी होंगे बराबर के दोषी

रायपुर मैदान में आयोजित विधिक जागरूकता शिविर में बोली मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी

ऊना- जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ऊना द्वारा ग्राम पंचायत रायपुर मैदान के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला के प्रांगण मे विधिक जागरूकता शिविर में बोलते हुए सीजेएम सपना पांडे ने सरकार द्वारा संशोधित मोटर वाहन अधिनियम के तहत अब जल्द ही यातायात नियमों की अवहेलना करने पर वाहन चालकों को वर्तमान में लग रहे जुर्माने के मुकाबले पांच गुणा अधिक जुर्माना देना पडेगा।

जबकि इसी अधिनियम के तहत यदि नाबालिग बच्चा वाहन को चलाते समय दुर्घटना करता है तो संबंधित नाबालिग बच्चे के मां-बाप भी बराबर के दोषी माने जाएंगें।

उन्होने अभिभावकों से अपने नाबालिग बच्चों को किसी भी तरह के वाहन चलाने की अनुमति न देने का आहवान दिया। साथ ही लोगों से भी वाहन चलाते समय यातायात नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की भी अपील की ताकि वह सडक़ पर स्वयं की सुरक्षा के साथ-साथ दूसरों को भी सुरक्षित रख सके।

सीजेएम ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का हनन होता है तो वह संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत मामले को कोर्ट में उठा सकते हैं। उन्होने सूचना का अधिकार कानून के हो रहे दुरूपयोग को लेकर भी चिंता व्यक्त की तथा कहा कि इस कानून का इस्तेमाल सही नीयत के साथ जनहित के उदेश्यों के लिए किया जाना चाहिए।

साथ ही कहा कि न्यायालय में किसी भी मामले में गवाह न्यायालय द्वारा जारी समन के आधार पर उपस्थित होना सुनिश्चित करें ताकि मामले के निपटारे में अनावश्यक विलंब से बचा जा सके तथा मामले का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित हो सके।

सीजेएम ने विधिक सेवा प्राधिकरण के अन्तर्गत मिलने वाली कानूनी सहायता की जानकारी देते हुए बताया कि कोई भी व्यक्ति न्याय से वंचित न रहे इसके लिए न्यायालयों द्वारा एेसे व्यक्तियों जिनकी वार्षिक आय एक लाख रुपये से कम हो, यदि अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग से संबंधित हो, यदि महिलाएं एवम बच्चे हों, उद्योगों में काम करने वाले कामगार हों, प्राकृतिक आपदा के शिकार हों, मानसिक रुप से अस्वस्थ हो तो इन्हे मुफत कानूनी सहायता उपलब्ध करवाने का प्रावधान किया है।

शिविर में अधिवक्ता अक्षय भारद्वाज ने सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 तथा अधिवक्ता दिनेश वशिष्ठ ने नागरिकों के मौलिक अधिकारों एवं कत्र्तव्यों बारे विस्तृत जानकारी दी।

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सेब के सर्मथन मुल्य में मात्र 50 पैसे बढ़ौतरी बागवानों से भद्दा मजाकः राठौर

Apple proccurement support price in Himachal PRadesh

शिमला -हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा सेब के सर्मथन मुल्य में की गई मात्र 50 पैसे की बढ़ौतरी को बागवानों के साथ किया गया भद्दा मजाक करार दिया है।

आज शिमला से जारी प्रेस वयान में कुलदीप सिंह राठौर ने बताया कि वर्तमान समय में जब बागवानों को अपनी फसल तैयार करने के लिए भारी मंहगाई का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि जी.एस.टी के चलते सेब से संबंधित पैकिंग से लेकर फफूंद नाशक दवाईयां एवं अपनी फसलों को मंण्ड़ियों तक पहुॅचाने के लिए किराया भी कई गुणा बढ़ गया है इसके चलते सेब के सर्मथन मुल्य कम से कम 10 रूपये होना चाहिए।

कुलदीप राठौर ने कहा कि सेब इलाकों में बहुत जगह सड़कों की हालत खराब पड़ी है और सेब को मण्ड़ियों तक पहुॅचाने वाले ट्रक व गाड़ियों के मालिक खराव सडकों पर गाडियाॅं भेजने को मना कर रहे हैं इसलिए सरकार को चाहिए कि ख़राब सडकों को जल्दी से जल्दी ठीक करवायें।

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हिमाचल सरकार पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे : कर्मचारी नेता

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शिमला -हिमाचल प्रदेश कर्मचारी महासंघ के पूर्व अध्यक्ष सुरेन्द्र मनकोटिया, पूर्व सयुक्त सचिव सेन राम नेगी,पूर्व प्रेस सचिव हरीश गुलेरिया, गैर शिक्षक महासंघ के महासचिव दीप राम शर्मा ,इंदिरागांधी आयुर्विज्ञान मेडिकल कॉलेज के पूर्व महासचिव आत्मा राम शर्मा ने प्रदेश सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद करने के निर्णय की आलोचना करते हुए इसे कर्मचारी विरोधी बताया है।

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि जब जब प्रदेश में भाजपा सरकार सत्ता में आई तब तब प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद किया गया,जो कि कर्मचारियों के साथ अन्याय है।

कर्मचारी नेताओं ने जयराम सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि भाजपा कभी भी कर्मचारी हितेषी नही रही है।पूर्व में धूमल सरकार ने भी सत्ता में आते ही इसे बंद किया था अब बर्तमान में जयराम सरकार ने भी ऐसा ही किया है।उनका कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रख कर इसे खोला था।इसे खोलने का एक ही उद्देश्य था कि जो सरकार के किसी भी गलत फैंसले को चुनौती देने के लिए स्वतंत्र था और उसे जल्द और सस्ता न्याय मिल जाता था।

नेताओं का कहना है कि अब ऐसा नही होगा।किसी भी कर्मचारी को न्याय के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना होगा जहां पहले ही हजारों मामले सुनवाई के लिए लंबित पड़े है।

कर्मचारी नेताओं ने मुख्यमंत्री जयराम से आग्रह किया है कि वह इस मामले पर पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे। इसे उन्हें अपनी किसी भी प्रतिष्ठा का प्रश्न नही बनना चाहिए।

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ऐबीवीपी ने यूजी परीक्षा परिणाम मे हो रही देरी और अनियमिताओं को लेकर किया कुलसचिव का घेराव

ABVP Protest

शिमला-वीरवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद विश्वविद्यालय इकाई ने यूजी (UG ) के परीक्षा परिणाम मे हो रही देरी और अनियमिताओं को लेकर कुलसचिव का घेराव किया व उनके आफिस के बाहर धरना-प्रदर्शन किया!

ABVP protest for ug results

विद्यार्थी परिषद ने निम्न मांगो को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन को कल शाम तक का समय दिया था:

  • यूजी 6th सेमेस्टर का पूरा परीक्षा परिणाम घोषित किया जाए! छात्रों के परीक्षा परिणामों में आ रही डबल स्टार की दिक्कत को शीघ्र ठीक किया जाए!
  • यूजी 2nd और 4th सेमेस्टर का री-आप्पीयर (Re-appear ) परीक्षा परिणाम शीघ्र घोषित किया जाए!
  •  एचपीयू काउंसलिंग में अपीयर छात्रों को अपने रिजल्ट ठीक कराने की तिथि को 20 जुलाई तक किया जाए!
  •  एचपीयू के अलावा दूसरे विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने वाले छात्रों को कॉन्फिडेंशियल रिजल्ट दिया जाए ताकि वह छात्र दूसरे विश्वविद्यालय में ऐडमिशन ले सकें!
  •  यूजी 3rd सेमेस्टर गणित के रिजल्ट को फिर से ईवैलुएट किया जाए!

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद विश्वविद्यालय इकाई ने कहा है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की नाकामियों के कारण हिमाचल के हजारों छात्र हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय और देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेने से वंचित रह रहे है! विद्यार्थी परिषद ने कहा है कि अगर इन सभी मांगों को शीघ्र पूरा नहीं किया गया तो विद्यार्थी पर अपना आंदोलन विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ और तेज करेगी!

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