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अनुराग ठाकुर को केंद्रीय मंत्री बनने पर भी नहीं है अपनी जिम्मेदारियों का एहसास, जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान जमकर उड़ी कोरोना प्रोटोकॉल की धज्जियाँ
शिमला- केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर हिमाचल प्रदेश में पांच दिन की जन आशीर्वाद यात्रा पर आए थे। इस दौरान चंड़ीगढ़, सोलन, शिमला, बिलासपुर, मंडी, हमीरपुर तथा काँगड़ा तक 630 किलोमीटर का सफर तय किया। इस जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान कोरोना नियमो की जमकर धज्जियां उड़ी। इनके कार्यक्रमों में उपस्थित जनता के साथ-2 नेताओं ने भी कोरोना नियमो का पालन नहीं किया। खुद केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के साथ कई अन्य मंत्री और विधायक भी बिना मास्क और समाजिक दूरी का पालन न करते हुए दिखे।
धर्मशाला में प्रेसवार्ता के दौरान जब एक पत्रकार ने कोरोना प्रोटोकॉल को लेकर सवाल किये तो केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर कोई भी जवाब नहीं दे पाए ,केवल धन्यवाद कहा। इस दौरान वहां भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुरेश कश्यप और मंत्री सरवीण चौधरी भी मौजूद थी। सुरेश कश्यप ऐसा सवाल पूछने पर हंसने लगे और मुस्कुराते हुए अनुराग की तरफ देखने लगे। इनमे से किसी भी नेता ने मास्क नहीं लगाया था। जब पेट्रोल और डीजल की बढ़ती हुई कीमतों को लेकर केन्द्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर से सवाल किया गया तो उन्होंने कांग्रेस पार्टी को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया।
सवाल यह उठता है की कोरोना के नियम क्या आम लोगों के लिए ही बने है। प्रदेश सरकार ने कोरोना नियमो का उलंघन करने वालों पर चालान काटने की प्रकिया शुरू की है। क्या चालान ऐसी जगह नहीं काटे जाते जहां ये नेता लोग इतनी सारी भीड़ इकठा करते है? क्या इनके भीड़ इकठा करने पर कोरोना नहीं फैलता? आखिर पत्रकार के कोरोना प्रोटोकॉल पर सवाल करने पर अनुराग ठाकुर की बोलती क्यों बंद हो गई? बात सिर्फ नियमो की नहीं है बात यह है की नियम बनाये क्यों गए। ये नियम सभी सुरक्षा के लिए बनें हैं। यह गर्व की बात है कि अनुराग ठाकुर को केंद्रीय मंत्री का दर्जा मिला है। लेकिन यह शर्म की बात है की उन्हें अपनी जिम्मेदारी का एहसास नहीं है। ऐसी जन आशीर्वाद यात्रा करके वह क्या साबित करना चाहते थे? क्या आने वाले उप चुनाव के लिए यह सब किया जा रहा है ?
वैज्ञानिकों ने कोरोना की तीसरी लहर की चेतावनी दी है। ऐसे में भी राजनितिक दल अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे। कोरोना के कारण प्रदेश में हजारों तथा देश में लाखों लोगों की मृत्यु हो चुकी है। इस महामारी में कई बच्चे अनाथ हो गए है तथा कई लोगो का रोजगार चला गया है। ऐसी स्थिति में ये भीड़ इकट्ठी करना क्या जरूरी है? इस संकट के समय में अगर कोई व्यक्ति किसी को कॉल भी करता है तो कॉल के माध्यम से भी कोरोना के नियमो का सख्ती से पालन करने के लिए प्रेरित किया जाता है तो दूसरी तरफ राजनैतिक दल कोरोना को बढ़ावा देने के लिए राजनितिक रैलियां आयोजित कर रहे है। ये गैरज़िम्मेदराना हरकतें केवल भाजपा तक सिमित नहीं हैं , बल्कि अन्य राजनितिक दल भी करोना के नियमो का पालन नहीं कर रहे है। अगर किसी नेता या मंत्री को कोरोना हो जाये तो वह बड़े से बड़े अस्पताल में अपना ईलाज करवाता है। पर आम आदमी को कोरोना हो जाये तो उनको अस्पताल में जाकर लाइन में लगना पड़ता है और बीएड तक नसीब नहीं होते ।
बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर में भी मौत का तांडव देखने को मिला था जिसमे लाखों लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था, अस्पताल में कोरोना मरीजों को बेड नहीं मिल पा रहे थे,शमशान घाटों के बाहर लाशों की इतनी लंबी कतारें लगी थी कि लाशों को जलाने के लिए कई दिनों का इंतजार करना पड़ता था। लाशों को जलाने के लिए लकड़ियां की भी कमी पड़ रही थी, लाशो को श्मशान घाट तक पहुँचाने के लिए एम्बुलेंस भी नहीं मिल रही थी और लाशों को कन्धों पर उठाकर शमशानघाट तक ले जाना पद रहा था। हमारे माननीय मंत्री और नेताओं के लिए ये सब कोई माईने नहीं रखता। मायने रखती है तो सिर्फ एक चीज़ – राजनितिक स्वार्थ। इसके लिए चाहे लोगों की जान ही दांव पर क्यों न लगनी पद जाये।
बता दें कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने अपने एक बयान में कहा था कि पर्यटकों के आगमन से राज्य के विभिन्न हिस्सों में कोरोना का कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। उन्होंने विवाह समारोह, दावतें आदि को कोरोना फैलने का कारण माना था। अब सवाल ये उठता है कि ऐसे राजनितिक कार्यक्रमों के आयोजन से क्या कोरोना नहीं फैलता? इतनी भारी भरकम भीड़ इकठी करके सरकार क्या साबित करना चाहती है? ये बात सिर्फ भाजपा की ही नहीं, प्रदेश के अन्य राजनितिक दल भी पीछे नहीं है।
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शिमला: चमियाना अस्पताल परिसर में मुंह में इंसानी टांग लेकर घूमते कुत्ते पर अस्पताल ने दी यह सफाई
शिमला: मंगलवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें एक आवारा कुत्ता मुंह में इंसान की कटी हुई टांग दबाकर चमियाना अस्पताल परिसर में घूमता नजर आया। वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली और जैव-चिकित्सकीय अपशिष्ट प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठे। मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी गठित कर जांच के आदेश दिए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जांच में सामने आया कि 19 फरवरी 2026 को अस्पताल में एक मरीज का ऑपरेशन किया गया था, जिसमें चिकित्सकीय प्रक्रिया के तहत उनकी टांग काटी गई। ऑपरेशन के बाद कटी हुई टांग को लिफाफे में बंद कर अस्पताल के स्टोर रूम में सुरक्षित रखा गया था।
ईटीवी भारत द्वारा लिखी गई एक खबर के अनुसार , अस्पताल के एमएस डॉ. सुधीर शर्मा ने बताया कि एम्प्यूटेड अंग को नियमानुसार बायोमेडिकल वेस्ट बैग में पैक कर AIMSS के बायोमेडिकल वेस्ट कॉम्प्लेक्स में आगे निस्तारण के लिए रख दिया गया था, जिसे बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण एजेंसी (Enviro Engineers) द्वारा उठाया जाना था। 21 फरवरी की रात जब बायोमेडिकल वेस्ट को कॉम्प्लेक्स में लाया जा रहा था, उस दौरान सफाई कर्मियों द्वारा बायोमेडिकल वेस्ट कॉम्प्लेक्स का दरवाजा खुला और असुरक्षित छोड़ दिया गया. आशंका है कि इसी दौरान किसी कुत्ते ने पैक किए गए बैग से एम्प्यूटेड अंग निकाल लिया। अगले दिन कॉम्प्लेक्स के बाहर खाली बैग मिला।
मानव अवशेषों के निस्तारण के लिए एक अधिकृत एजेंसी को सूचना दी गई थी, लेकिन निर्धारित समय पर एजेंसी का कोई कर्मचारी अस्पताल नहीं पहुंचा। 23 फरवरी को स्टोर के पास खाली लिफाफा मिलने के बाद प्रशासन को मानव अवशेष के गायब होने की जानकारी मिली।
अमर उजाला में छपी खबर के अनुसार जांच में सामने आया कि सफाई कर्मचारियों ने कटे अंग को अपने स्तर पर खोजने का प्रयास किया और प्रशासन को सूचित नहीं किया। 24 फरवरी को कुत्ते को मुंह में टांग लेकर घूमते हुए देखा गया तो कर्मियों ने उस छीनने का प्रयास किया लेकिन कुत्ता आक्रामक होकर भाग गया। लोगों ने कुत्ते को अस्पताल के मुख्य द्वार की ओर कटी हुई टांग ले जाते हुए देखा और सोशल मीडिया पर वीडियो प्रसारित कर दिया।
अस्पताल प्रशासन ने इस पूरी घटना के लिए सफाई कर्मी और सफाई पर्यवेक्षक को जिम्मेवार ठहराया है। अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. सुधीर शर्मा ने बताया कि इन दोनों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
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समरहिल के सांगटी जंगल में संदिग्ध हालात में मिला युवक का शव, कर रहा था प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी
शिमला: मंगलवार सुबह समरहिल के सांगटी जंगल में एक युवक का शव संदिग्ध हालात में फंदे से लटका मिला। मृतक की पहचान शोभित ठाकुर (29) निवासी सांगटी के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि शोभित प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था।
शुरुआती जांच के अनुसार युवक रविवार सुबह घर से नाश्ता करके निकला था, लेकिन शाम को वापिस नहीं लौटा। परिजनों ने पहले अपने स्तर पर तलाश शुरु की लेकिन युवक का पता न चलने पर उन्होंने समरहिल चौकी में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से युवक की तलाश शुरू की गई।
मंगलवार सुबह लोअर सांगटी के पास सड़क से कुछ दूरी पर युवक का शव पेड़ में कपड़े के बनाए फंदे के सहारे लटका मिला। मामले की सूचना मिलते ही बालूगंज पुलिस स्टेशन की टीम मौके पर पहुंची। डीएसपी शक्ति सिंह ने घटनास्थल का मुआयना किया।
पुलिस ने बीएनएस की धारा 194 के तहत मामला दर्ज किया है। प्रारंभिक जांच में पुलिस मामले को आत्महत्या से जोड़कर देख रही है, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत के सही कारणों का खुलासा हो पाएगा। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करवाने के बाद परिजनों को सौंप दिया है। मंगलवार दोपहर बाद युवक का अंतिम संस्कार कर दिया गया। एसएसपी शिमला गौरव सिंह ने कहा कि पुलिस मामले के हर पहलू की गंभीरता से जांच कर रही है।
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