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शिमला

एक जनवरी से हिम केयर पोर्टल पर लोग बनवा सकेंगे नए कार्ड और करवा सकेंगे नवीनीकरण

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शिमला– आईजीएमसी (IGMC) में केंद्र सरकार की ओर से साल 2018 में आयुष्मान भारत की तर्ज पर हिम केयर योजना का शुभारंभ किया गया था। सरकार द्वारा ऐसे सभी नागरिक जो आयुष्मान भारत योजना के तहत लाभ नहीं उठा पा रहे हैं, उनके लिए हिम केयर योजना शुरू की गई थी। यह जानकारी आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ जनक राज ने प्रेस वार्ता के माध्यम से दी है।

उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि आगामी एक जनवरी से स्वास्थ्य विभाग की ओर से हिम केयर पोर्टल शुरू किया जा रहा है। इसके तहत लोग अपने कार्ड का नवीनीकरण करवा सकते हैं और नए कार्ड बनवा सकते हैं। उन्होंने लोगों से कहा है कि नजदीकी लोक मित्र केंद्र में जाकर कार्ड की वैधता जरूर जांच लें ताकि अस्पताल आने पर उन्हें कार्ड एक्टिवेट करवाने में किसी प्रकार की परेशानी ना आए।

उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत अस्पताल में मौजूदा समय तक 31261 मरीजों को विभिन्न बीमारियों के तहत इलाज से लाभान्वित किया गया है। साल 2018 – 2019 में 2615 मरीजों पर 4,46,35,950 रुपए की राशि खर्च की गई है। वहीं साल 2019-2020 में 10169 मरीजों पर 17,36,38,543 रुपए की राशि खर्च की गई है। साल 2020- 2021 में 11078 मरीजों पर 21,93,86,286 रुपये की राशि खर्च की गई। इसके अलावा साल 2021 में अभी तक 7399 मरीजों पर 13,92,63,813 रुपए की राशि खर्च की गई है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार सहित अस्पताल प्रशासन मरीजों को बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने को लेकर प्रतिबद्ध है ताकि मरीजों को अस्पताल में सरकार की ओर से चलाई जा रही विभिन्न स्वास्थ्य सुविधाओं का पूरा लाभ मिल सके। इसी दिशा में सरकार की ओर से अस्पताल में पिछले दिनों मुफ्त जांच योजना शुरू की गई थी। जहां सभी श्रेणियों के मरीजों के 56 प्रकार के टेस्ट निशुल्क करवाए जाते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि सीटी स्कैन एमआरआई, अल्ट्रासाउंड जैसे टेस्ट भी बीपीएल, कैंसर मरीजों, व दिव्यांग मरीजों के लिए निशुल्क है। साथ ही अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे अति निर्धन मरीजों को भी मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष के जरिए स्वास्थ्य लाभ उपलब्ध करवाया जाता है।

उन्होंने कहा कि आमतौर पर देखा गया है कि मरीज जब अस्पताल पहुंचते हैं तो कार्ड की वैधता समाप्त हो जाने और पारिवारिक सदस्यों का नाम सही से दर्ज ना होने के कारण मरीज के कार्ड को एक्टिवेट करवाने में काफी दिक्कत आती है। ऐसे में मरीजों को उचित इलाज मुहैया करवाने में अस्पताल प्रशासन असमर्थ रहता है और कई बार मरीज की जान पर भी खतरा बन आता है। इसीलिए समय रहते अपने कार्ड की वैधता और नाम सही प्रकार से दर्ज होना चाहिए ताकि कार्ड एक्टिवेट करने में समय व्यर्थ ना हो।

उन्होंने बताया कि एक कार्ड में परिवार के अधिकतम पांच व्यक्तियों को लाभ मिल सकता है और अधिकतम पाँच लाख रुपए तक का स्वास्थ्य लाभ दिया जाता है । लेकिन अगर मरीज किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा है और उसके इलाज में 5 लाख रुपए से अधिक खर्च होने की संभावना होती है, तो ऐसी स्थिति में मरीज के स्वास्थ्य लाभ के लिए विशेष प्रक्रिया अपनाई जाती है, जहां विभाग के चिकित्सक कार्ड में राशि बढ़ाने के लिए प्रार्थना पत्र जारी करते हैं ।

उन्होंने कहा कि अस्पताल में हिम केयर योजना के बेहतर कार्यान्वयन के लिए चार प्रशासनिक अधिकारी और दो नर्सिंग सुपरीटेंडेंट तैनात किए गए हैं। वह सुनिश्चित करते हैं कि अस्पताल में आए मरीजों को हिमकेयर योजना के तहत लाभ मिलने में किसी प्रकार की परेशानी न आये।

उन्होंने कहा कि शहरी निकायों में जनप्रतिनिधियों, पंचायत में वार्ड सदस्य, प्रधान व उपप्रधान सहित सभी जनप्रतिनिधियों को आगे आना चाहिए और सामाजिक परिवेश में लोगों को कार्ड बनवाने व इससे संबंधित जानकारी उपलब्ध करवाने में स्वास्थ्य विभाग का सहयोग देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा उन सब लोगों तक भी स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है जो अपनी आर्थिक स्थिति के कारण अच्छी स्वास्थ्य सेवा वहन नहीं कर सकते हैं।

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LSD तस्करी मामले में अब हरियाणा से सप्लायर गिरफ्तार, आरोपी संदीप सप्लायर को बदले में देता था गांजा

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शिमला: बीते दिनों न्यू शिमला क्षेत्र में पुलिस ने दो आरोपियों को करीब एक करोड़ रुपये की LSD (Lysergic Acid Diethylamide) ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया था। जिसमें एक युवक और युवती शामिल थे। पुलिस ने आरोपियों के पास से 11.57 ग्राम एलएसडी और 562 स्टैंप साइज स्ट्रिप्स बरामद की थी। पुलिस ने अब इस मामले में सप्लायर को गुरुग्राम (हरियाणा) से गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस के अनुसार आरोपी की पहचान नैवियल हैरिसन (27) ,केरल के रूप में हुई है। पुलिस ने जानकारी देते हुए कहा कि जांच के दौरान सामने आया की आरोपी नैवियल हैरिसन और आरोपी संदीप शर्मा काफी समय से एक दूसरे के संपर्क में थे और LSD की तस्करी कर रहे थे। पुलिस ने बताया कि आरोपी नैवियल हैरिसन और आरोपी संदीप शर्मा सिर्फ व्हॉटस्एप कॉल के माध्यम से बातचीत करते थे। आरोपी संदीप नैवियल हैरिसन को बदले में गांजा उपलब्ध करवाता था।

एएसपी हेडक्वार्टर अभिषेक ने मामले की पुष्टी की है। उन्होंने बताया कि मामले में आगामी जांच जारी है।

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शिमला में 1 करोड़ रुपये का LSD बरामद, जानिए भारत में क्यों प्रतिबंधित है यह नशा और क्या है सजा ?

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शिमला: बुधवार को पुलिस ने न्यू शिमला क्षेत्र में एक भवन से करीब एक करोड़ रुपये की LSD (lysergic acid diethylamide) ड्रग्स बरामद की है। बता दें कि भारत में एलएसडी प्रतिबंधित है। एलएसडी रखना, बेचना या तस्करी करना एक गंभीर अपराध है और  मात्रा के आधार पर इसकी सजा तय होती है।

मामले में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है जिसमें एक युवक और युवती शामिल है। आरोपियों की पहचान प्रिया शर्मा, निवासी सिरमौर, संदीप शर्मा, निवसी पंजाब (मोगा) को रुप में हुई है। पुलिस ने बताया कि दोनों आरोपियों के पास कुल 11.57 ग्राम एलएसडी ड्रग्स बरामद की गई है। दोनों आरोपियों को खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

पुलिस ने बताया कि हमें गुप्त सूचना मिली थी कि राजधानी में एलएसडी की तस्करी हो रही है। सूचना के आधार पर पुलिस ने एक टीम का गठन किया और न्यू शिमला के हिम निवास में एक कमरे में ठहरे युवक और युवती की तालाशी ली। इस दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से एलएसडी के साथ 562 स्टैंप साइज सिट्रप्स बरामद किए। एएसपी हेडक्वार्टर अभिषेक ने मामले की पुष्टी करते हुए कहा कि आगामी जांच जारी है।

क्या होता है LSD ? 

एलएसडी (Lysergic Acid Diethylamide) एक बेहद शक्तिशाली हैलूसिनोजेनिक (मतिभ्रम पैदा करने वाला) नशीला पदार्थ है, जो दिमाग की कार्यप्रणाली को प्रभावित करता है। यह एक सिंथेटिक रासायनिक ड्रग है, जो मस्तिष्क में मौजूद सेरोटोनिन रिसेप्टर्स पर असर डालकर व्यक्ति की सोच, भावनाओं और वास्तविकता की अनुभूति को बदल देता है। एलएसडी बहुत कम मात्रा में भी तेज असर दिखाता है। इसे आमतौर पर छोटे कागज़ के टुकड़ों (ब्लॉटिंग पेपर), टैबलेट, जेल टैब या तरल बूंदों के रूप में बेचा जाता है।

यह कैसे बनता है?

LSD एक सिंथेटिक (कृत्रिम) नशा है जिसे ‘लाइसर्जिक एसिड’ से बनाया जाता है। यह एसिड ‘अर्गट’ (Ergot) नामक एक फंगस (कवक) में पाया जाता है, जो राई और अन्य अनाजों पर उगता है। यह नशा इतना शक्तिशाली होता है कि इसकी खुराक माइक्रोग्राम (mcg) जैसे बेहद सूक्ष्म स्तर पर मापी जाती है।

सेवन करने पर क्या होता है?

एलएसडी का सेवन करने के बाद इसका असर आमतौर पर 30 से 60 मिनट में शुरू हो जाता है और 8 से 12 घंटे या उससे अधिक समय तक रह सकता है। इस दौरान व्यक्ति को एक तरह का “ट्रिप” अनुभव होता है, जिसमें उसकी वास्तविकता को समझने की क्षमता बदल जाती है।

सेवन करने वाले व्यक्ति को निम्न अनुभव हो सकते हैं:

  • ऐसी चीजें देखना या सुनना जो वास्तव में मौजूद नहीं होतीं (हैलूसिनेशन)
  • समय और स्थान की समझ में बदलाव
  • भावनाओं में अचानक परिवर्तन
  • वास्तविकता और कल्पना के बीच फर्क समझने में कठिनाई
  • अत्यधिक डर, घबराहट और मानसिक तनाव हो सकता है।
  • दिल की धड़कन तेज होना, शरीर का तापमान बढ़ना, हाई ब्लड प्रेशर, आंखों की पुतलियों का फैलना, मतली, भूख न लगना, शुगर बढ़ना, नींद न आना, मुंह सूखना और शरीर में कंपन या दौरे पड़ना।

भारत में एलएसडी के खिलाफ कानून

भारत में एलएसडी पूरी तरह प्रतिबंधित है और इसके खिलाफ कड़े प्रावधान Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act (NDPS Act), 1985 के तहत लागू हैं। इस कानून के तहत एलएसडी का उत्पादन, खरीद-फरोख्त, परिवहन, भंडारण या सेवन करना अपराध है।

सजा का प्रावधान

मात्रा सजा
छोटी मात्रा अधिकतम 1 वर्ष की जेल या ₹10,000 तक जुर्माना
मध्यम मात्रा 10 वर्ष तक की जेल और ₹1 लाख तक जुर्माना
व्यावसायिक मात्रा 10 से 20 वर्ष तक कठोर कारावास और ₹1–2 लाख तक जुर्माना

दोबारा अपराध करने पर सजा और भी कठोर हो सकती है।

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कविंद्र गुप्ता 10 मार्च को संभालेंगे प्रदेश के 30वें राज्यपाल का पदभार, जानिए इनका राजनीतिक कार्यकाल और विवाद

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शिमला:  कविंद्र गुप्ता, जिन्हें हाल ही में हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया है, आज शिमला पहुंचेंगे। वह 10 मार्च को लोकभवन में आयोजित समारोह में पद एवं गोपनीयता की शपथ लेंगे। इसके साथ ही वह राज्य के 30वें राज्यपाल के रूप में पदभार संभालेंगे।

कौन हैं कविंद्र गुप्ता

कविंद्र गुप्ता का जन्म 2 दिसंबर 1959 को जम्मू में हुआ था। उनके पिता भारतीय डाक विभाग में कार्यरत थे। वर्ष 1963 में उनका परिवार संगरूर (पंजाब) स्थानांतरित हो गया, जहां उनकी प्रारंभिक शिक्षा हुई। बाद में उन्होंने फिरोजपुर और गुरदासपुर में अध्ययन किया और 1979 में गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज गुरदासपुर से स्नातक की डिग्री प्राप्त की।

छात्र राजनीति से  शुरुआत

1970 के दशक की शुरुआत में वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े। भारत में आपातकाल (1975–1977) के दौरान वे संघ के वरिष्ठ नेताओं के साथ गुरदासपुर और पटियाला की जेलों में भी रहे।

इसके बाद उन्होंने छात्र राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। वर्ष 1978 से 1979 तक वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की पंजाब इकाई के सचिव रहे। वर्ष 1988 में उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा, जम्मू-कश्मीर का जिला अध्यक्ष नियुक्त किया गया। बाद में 1993 से 1998 तक वे संगठन के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे।

राजनीतिक सफर

कविंद्र गुप्ता का निर्वाचित राजनीति में प्रवेश नगर निकाय स्तर से हुआ। वे जम्मू नगर निगम के पहले निर्वाचित महापौर बने और 2005 से 2010 तक लगातार तीन कार्यकाल तक इस पद पर रहे।

वर्ष 2014 में उन्होंने गांधी नगर विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतकर विधायक बने। 18 मार्च 2015 को उन्हें जम्मू-कश्मीर विधानसभा का अध्यक्ष चुना गया और वे इस पद को संभालने वाले पहले भाजपा नेता बने। बाद में 30 अप्रैल 2018 को उन्हें जम्मू-कश्मीर का उपमुख्यमंत्री नियुक्त किया गया।

लद्दाख के उपराज्यपाल भी रह चुके हैं

14 जुलाई 2025 को द्रौपदी मुर्मु द्वारा उन्हें लद्दाख का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया, जहां वे केंद्र शासित प्रदेश के तीसरे उपराज्यपाल बने। इसके बाद 5 मार्च 2026 को उन्हें हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया। अब वे 10 मार्च को शपथ ग्रहण कर औपचारिक रूप से राज्य के 30वें राज्यपाल के रूप में पदभार ग्रहण करेंगे।

 विवादों में भी घिरे रहे कविंद्र गुप्ता

  1. कठुआ गैंगरेप को लेकर असंवेदनशील बयान

2018 में नवभारत टाइम्स में प्रकाशित एक खबर के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के नए उपमुख्यमंत्री कविंदर गुप्ता ने शपथ ग्रहण के चंद मिनट बाद ही कठुआ गैंगरेप को लेकर असंवेदनशील बयान दिया था। उन्होंने कहा था इस मामले को बार-बार तूल नहीं देना चाहिए। यह छोटी सी बात है। इसके बाद इसी बयान पर जब उनकी किरकिरी हुई चो उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उनके कहने का मतलब था कि मामले को जानबूझकर भड़काने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

    2. रोहिंग्या मुसलमानों की मौजूदगी को बताया था आर्मी कैंप पर हमले की वजह

फरवरी 2018 में बीबीसी में प्रकाशित एक खबर के अनुसार, स्पीकर कविंदर गुप्ता ने आर्मी कैंप पर हमले की वजह राज्य में रोहिंग्या मुसलमानों की मौजूदगी को बताया है. उन्होंने कहा कि रोहिंग्या की मौजूदगी की वजह से जम्मू के आर्मी कैंप पर हमले हुए। स्पीकर के बयान पर विपक्ष ने हंगामे के बाद सदन से वाकआउट किया, हालांकि बाद में रोहिंग्या मुसलमानों से जुड़े बयान को रिकॉर्ड से हटा दिया गया था।

   3. सरकारी जमीन पर कब्जा करने का आरोप

2021 में The Indian Express  में प्रकाशित एक खबर के अनुसार , जम्मू और कश्मीर के पूर्व उप मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता कविंदर गुप्ता, जिन्होंने पिछले नवंबर में जिला विकास परिषद (डीडीसी) चुनावों से पहले विवादास्पद रोशनी अधिनियम के तहत राज्य की भूमि को निजी व्यक्तियों को हस्तांतरित करने को “भूमि जिहाद” बताया था, स्वयं 2010 से लेकर 2017 की शुरुआत तक राज्य की भूमि पर अवैध रूप से कब्जा किए हुए थे। हालांकि कविंद्र गुप्ता ने सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले आरोप से इनकार किया था।

     4. सिंतबर 2025 में लद्दाख में हुई हिंसा झड़प 

The Statesman में प्रकाशित खबर के अनुसार, लद्दाख में कविंद्र गुप्ता के कार्यकाल के दौरान विरोध प्रदर्शन तेज हुए थे, जिनमें सितंबर 2025 में पुलिस की गोलीबारी में चार युवकों की जान चली गई। The Statesman  के अनुसार इस बीच, गुप्ता से मोबाइल फोन पर संपर्क करने के प्रयास व्यर्थ रहे।

वहीं प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया समाचार एजेंसी के अनुसार, गुप्ता ने कहा, “अधिक हताहतों को रोकने के लिए एहतियाती उपाय के रूप में कर्फ्यू लगाया गया है।”

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