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नौणी विवि ने विभिन्न कार्यक्रमों में आवेदन करने की अंतिम तिथि 18 अक्टूबर तक बढ़ाई

uhf nauni admissions 2021 dates

सोलन-डॉ. वाई एस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी में 2021-22 शैक्षणिक सत्र के लिए बागवानी, वानिकी, जैव प्रौद्योगिकी, कृषि व्यवसाय और व्यापार प्रबंधन कार्यक्रमों के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 18 अक्टूबर तक बढ़ा दी है। विश्वविद्यालय में स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट कार्यक्रमों के लिए आवेदन करने के इच्छुक छात्र विश्वविद्यालय के एडमिशन पोर्टल  पर ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भर सकते हैं।

इस वर्ष, बीएससी (ऑनर्स) बागवानी, बीएससी (ऑनर्स) वानिकी और बीटेक जैव प्रौद्योगिकी की सामान्य सीटों में एडमिशन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की ICAR AIEEA (UG) 2021 परीक्षा के स्कोर पर मिलेगी। जबकि एमएससी, एमबीए (कृषि व्यवसाय) और पीएचडी की सामान्य और स्व-वित्तपोषित सीटें पर प्रवेश क्रमशः ICAR AIEEA (PG) और AICE-JRF/SRF में प्राप्त अंकों के आधार पर होगा। जिन उम्मीदवारों ने आईसीएआर परीक्षा नहीं दी है, वह भी स्नातक कार्यक्रमों की स्व-वित्तपोषित सीटों के लिए विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

विश्वविद्यालय ने सभी रजिस्टर्ड छात्रों से आग्रह किया है कि नियत तारीख से पहले ऑनलाइन आवेदन पत्र और ऑनलाइन भुगतान रसीद एडमिशन पोर्टल पर अपलोड कर दें। आईसीएआर परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद विश्वविद्यालय द्वारा वेबसाइट पर ऑनलाइन काउंसलिंग के कार्यक्रम की घोषणा की जाएगी। ऑनलाइन मोड के अलावा अन्य किसी भी प्रकार का आवेदन पत्र स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

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एनएसयूआई और एसएफआई ने पीएचडी (PhD) प्रवेश घोटाले को लेकर किया धरना प्रदर्शन, राज्यपाल को सौंपे ज्ञापन

NSUI and SFI hpu protest

शिमला– हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की एनएसयूआई (NSUI) इकाई ने आज विश्वविद्यालय में पीएचडी में अवैध प्रवेश को लेकर राज्यपाल के काफिले के सामने नारेबाजी कर के विरोध जताया, क्योंकि कुछ दिनों पहले विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ० सिकंदर कुमार और उनके प्रशासन के द्वारा हिमाचल विश्वविद्यालय में पीएचडी में अयोग्य लोगों को विश्वविद्यालय के नियमों को ताक पे रखकर प्रवेश दिया गया।

एनएसयूआई ने कहा कि विश्वविद्यालय के द्वारा 21 अगस्त को आयोजित कार्यकारी परिषद की बैठक में हिमाचल प्रदेश विश्विद्यालय के प्रोफेसरों के परिवार के सदस्यों को पीएचडी में सीधे दाखिले देने का प्रस्ताव पास किया गया और इस प्रस्ताव के तहत विश्विद्यालय में नेट, जेआरएफ पास न करने पर भी कुलपति, यूआईआईटी (UIIT) के निदेशक, डीन प्लानिंग एंड डेवलोपमेन्ट के बच्चों को सीधे पीएचडी में प्रवेश दे दिया गया है।

एनएसयूआई ने कहा कि यह विश्विद्यालय के छात्रों के साथ धोखाधड़ी है और प्रदेश विश्वविद्यालय की गुणवत्ता पे बहुत बड़ा हमला है। इसी संदर्भ में एनएसयूआई ने  राज्पाल को ज्ञापन दिया है। एनएसयूआई ने कहा कि राज्यपाल ने उन्हे आश्वासन दिया कि छात्र राजभवन में आये और वहां पे इस विषय पे चर्चा की जाएगी और इसका समाधान किया जाएगा।

एसएफआई ने राज्यपाल को सौंपा मांग पत्र

विश्वविद्यालय के अंदर हुए पीएचडी (PhD) घोटाले को लेकर एक बार फिर से SFI ने प्रशासन और प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। परिसर सचिव रौकी ने विश्वविद्यालय में हुई हाल ही में पीएचडी (PhD) भर्ती पर आपत्ति जताते हुए इसे अध्यादेश और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियमों की अवहेलना बताया।

सचिव ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन मात्र अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए इस तरह की धांधलियां पीएचडी के अंदर कर रहा है। विश्वविद्यालय में जो भी दाखिलें पीएचडी के अंदर हुए हैं, वह यूजीसी और विश्वविद्यालय के अध्यादेश के नियमों को दरकिनार करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा अपने फायदे के लिए किए गए हैं।

रॉकी ने कहा कि कार्यकारी परिषद (EC) में तय किया गया कि हाल ही में जिन प्रोफेसरों की भर्तियां हुई है और जिन अध्यापकों की पीएचडी पूरी नहीं हुई है। वह  पीएचडी में दाखिला बिना किसी प्रवेश परीक्षा के ले सकते हैं। उनके लिए कार्यकारी परिषद के अंदर एक सुपरन्यूमैरेरी सीट का प्रस्ताव पास किया गया। एसएफआई (SFI) ने कहा है कि यदि इस तरह की सुपरन्यूमैरेरी सीट विश्वविद्यालय प्रशासन रख रहा है, तो इसमें जितने भी प्राध्यापक कॉलेजों और विश्वविद्यालय के अंदर पढ़ाते हैं, उन्हें समान अवसर का मौका मिलना चाहिए, जिसे विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा नहीं दिया गया।

रॉकी ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रदेश की सरकार अपने चहेतों की भर्तियां पीएचडी के अंदर करवाना चाहती है और इस विश्वविद्यालय को एक विशेष विचारधारा का अड्डा बनाना चाहती है। एसएफआई (SFI) ने सवाल उठाया है कि अगर एक छात्र पीएचडी में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा पास कर सकता है तो एक अध्यापक क्यों नहीं?

रौकी ने आरोप लगाया है कि वाइस चांसलर ने कहीं ना कहीं अपने बेटे का फर्जी दाखिला पीएचडी (PhD) के अंदर प्रदेश सरकार की पूरी शय के तहत किया है, क्योंकि जब कार्यकारी परिषद (EC) के द्वारा इस कोटे के तहत यह सीटें निकाली गई, तो इन सीटों को विज्ञापित भी नही किया गया और न ही प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया गया।

रौकी ने बताया कि विश्वविद्यालय के अंदर दीनदयाल उपाध्याय नाम से एक पीठ का गठन किया गया है, जिसके अंदर डिप्लोमा कोर्स शुरू किया गया है पर इसकी  अपनी कोई मास्टर डिग्री नहीं है। रॉकी ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने अयोग्य लोगों को भर्ती करने के लिए इस पीठ में पीएचडी का प्रावधान किया। अब सवाल यह है कि जिस पीठ की मास्टर डिग्री ही नहीं है वह पीएचडी कैसे करवा रही है।

रॉकी ने कहा कि इस विश्वविद्यालय के अंदर यह होता आ रहा है कि जितनी सीटें पीएचडी के लिए विज्ञापित की जाती हैं उससे ज्यादा भर्तियां की जा रही हैं।
डीडीयू के अंदर भी इसी तरह की धांधली सामने आई थी, जिसमें पहले पाँच सीटों को विज्ञापित किया गया था परंतु अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए आठ और लोगों को एडमिशन पीएचडी के अंदर दिलाई गई।

एसएफआई ने आरोप लगाए हैं कि विश्वविद्यालय प्रशासन तथा कुलपति प्रदेश सरकार और आरएसएस के इशारे पर इस विश्वविद्यालय के अंदर नियमों को दरकिनार करते हुए, एक विशेष विचारधारा को इस विश्वविद्यालय के अंदर आरक्षण दे रही है, फिर चाहे किसी भी नियम को ताक पर रखना हों।

एसएफआई ने अपनी मांगों को लेकर राज्यपाल को भी मांग पत्र सौंपा और इस मामले की न्यायिक जांच करने की मांग की। एसएफआई ने मांग की है कि जो दोषी अधिकारी इसमें शामिल है, उन पर कड़ी कारवाई की जाए।

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हि.प्र.विश्वविद्यालय में दाखिलों और भर्तियों में हुई धांधलियों को लेकर छात्रों में बढ़ा रोष, बड़े आंदोलन की दी चेतावनी

HPU SFI protest over phd scam

शिमला-हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में हुए पीएचडी (PhD) घोटाले को लेकर एक बार फिर से SFI ने प्रशासन और प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, एसएफआई ने विश्वविद्यालय कैंपस के अंदर विशाल रैली का आयोजन किया और पिंक पेटल के सामने धरना प्रदर्शन किया।

एसएफआई इकाई अध्यक्ष विवेक राज ने विश्वविद्यालय में हाल ही में हुई पीएचडी (PhD) भर्ती पर आपत्ति जताते हुए इसे अध्यादेश और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियमों की अवहेलना बताया। अध्यक्ष ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए इस तरह की धांधलियां पीएचडी के अंदर कर रहा है। विश्वविद्यालय में जो भी दाखिलें पीएचडी के अंदर हुए हैं, वह यूजीसी और विश्वविद्यालय के ऑर्डिनेंस के नियमों को दरकिनार करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा अपने फायदे के लिए किए गए हैं।

देखें विडिओ

विवेक राज ने कहा कि विश्वविद्यालय के अंदर कार्यकारी परिषद (EC) में तय किया गया की हाल ही में जिन प्रोफेसर की भर्तियां हुई है और जिन अध्यापकों की पीएचडी पूरी नहीं हुई है, वो अध्यापक पीएचडी में एडमिशन बिना किसी एंट्रेंस एग्जाम के ले सकते हैं। उनके लिए कार्यकारी परिषद (EC) के अंदर एक सुपरन्यूमैरेरी सीट का प्रस्ताव पास किया गया। एसएफआई ने कहा है यदि इस तरह की सुपरन्यूमैरेरी सीट विश्वविद्यालय प्रशासन रख रहा है, तो इसमें जितने भी प्राध्यापक कॉलेजों और विश्वविद्यालय के अंदर पढ़ाते हैं उन्हें समान अवसर का मौका मिलना चाहिए जोकि प्रवेश परीक्षा के माध्यम से ही दिया जाना था।

अध्यक्ष ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रदेश की सरकार अपने चहेतों की भर्तियां पीएचडी के अंदर करवाना चाहती है और इस विश्वविद्यालय को एक विशेष विचारधारा का अड्डा बनाना चाहती है। एसएफआई ने सवाल उठाया की अगर एक छात्र पीएचडी (PhD) में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा पास कर सकता है तो एक अध्यापक क्यों नहीं?

विवेक ने आरोप लगाया है कि वाइस चांसलर ने कहीं ना कहीं अपने बेटे का फर्जी दाखिला पीएचडी (PhD) के अंदर प्रदेश सरकार के पूरी शय के तहत किया है, क्योंकि जब कार्यकारी परिषद के द्वारा इस कोटे के तहत यह सीटें निकाली गई, तो इन सीटों को विज्ञापित भी नही किया गया और न ही प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया गया, जोकि समान अवसर के अधिकार की भी छीनना है और यूजीसी की गाइड लाइंस की अवहेलना है। सिर्फ और सिर्फ प्रभावशाली लोगों के चहेतों को दाखिला दिया है।

विवेक ने कहा कि विश्वविद्यालय के अंदर दीनदयाल उपाध्याय नाम से एक पीठ का गठन किया गया है, जिसके अंदर डिप्लोमा कोर्स शुरू किया गया है जिसकी अपनी कोई मास्टर डिग्री नहीं है, परंतु विश्वविद्यालय प्रशासन ने अयोग्य लोगों को इस विश्वविद्यालय में भर्ती करने के लिए इस पीठ में पीएचडी (PhD) का प्रावधान किया। अब सवाल यह है कि जिस पीठ की मास्टर डिग्री ही नहीं है वह पीएचडी कैसे करवा रही है?

उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय के अंदर यह होता आ रहा है कि जितनी सीटें पीएचडी के लिए विज्ञापित की जाती हैं उससे ज्यादा भर्तियां की जा रही हैं। ये एक बहुत बड़ी सोची समझी साजिश के तहत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि डीडीयू के अंदर भी इसी तरह की धांधली सामने आई थी, जिसमें पहले 5 सीटों को विज्ञापित किया गया था परंतु अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए आठ और लोगों को पीएचडी के अंदर दाखिला दिलाया गया।

विवेक ने कहा है कि विश्वविद्यालय प्रशासन या कुलपति प्रदेश सरकार और आरएसएस के इशारे पर इस विश्वविद्यालय के अंदर नियमों को दरकिनार करते हुए एक विशेष विचारधारा को इस विश्वविद्यालय के अंदर आरक्षण दे रही है फिर चाहे किसी भी नियम को ताक पर रखना हो। एसएसआई ने प्रदेश सरकार और प्रशासन से यह मांग की है कि इन भर्तियों को निरस्त किया जाए।

एसएफआई ने कहा कि विश्वविद्यालय के अंदर पिछले कुछ समय से निजी शिक्षण संस्थानों से छात्रों की माइग्रेशन हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के अंदर की जा रही है जो सरासर विश्वविद्यालय के अध्यादेश का उल्लंघन करता है । विश्वविद्यालय के अंदर पीएचडी (PhD) में दाखिला लेने के लिए प्रवेश परीक्षा और नेट,जेआरएफ (NET/JRF) पास करना पड़ता है जबकि दूसरी और निजी संस्थानों के अंदर सिर्फ पैसे के बलबूते पर पीएचडी (PhD) में दाखिला ले सकते हैं और अंत में आप अपने चहेते लोगों को एचपीयू (HPU) में पीएचडी (PhD) के अंदर माइग्रेशन करवा देते हो और जो पीएचडी के अंदर बैठने के योग्य ही नहीं हैं।

एसएफआई ने 24 घंटे की हड़ताल का ऐलान किया है और एसएफआई ने मांग की है कि उच्च न्यायलय शीघ्र अति शीघ्र इस पर स्वत: संज्ञान ले और जो दोषी अधिकारी इसमें शामिल है, उन पर कड़ी कार्यवाही अमल मे लाई जाए। एसएफआई ने कहा है कि अगर उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो एसएफआई भ्रष्ट अधिकारियों की एंट्री कैंपस के अंदर बंद करेगी और भूख हड़ताल भी करेगी।

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बिना प्रवेश परीक्षा और नेट/जेआरएफ पीएचडी में प्रवेश के विरोध में एबीवीपी ने किया अधिष्ठाता अध्ययन का घेराव

hp university phd scam

शिमला-आखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई ने छात्रों की मांगो को लेकर अधिष्ठाता अध्ययन का किया घेराव। इकाई सचिव आकाश नेगी ने कहा कि हाल ही में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा यूजीसी के नियमों को ताक पर रखकर बिना किसी प्रवेश परीक्षा व नेट जेआरएफ के पीएचडी में विश्वविद्यालय कर्मचारियों के बच्चों को दाखिला देने का फैंसला कार्यकारी परिषद में लिया गया जो बिल्कुल गलत है और आम छात्रों के साथ धोखा है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन सीधे तौर पर उन छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है, जो पीएचडी में प्रवेश लेने के लिए दिन रात मेहनत कर रहे हैं। इस फैंसले ने प्रदेश भर में विश्वविद्यालय के नाम को खराब करने का काम किया है तथा हर जगह इस फैसले को लेकर विश्वविद्यालय की किरकिरी हो रही है।

उन्होंने कहा कि ऐसे भी मामले सामने आए है जिसमें प्रशासन ने अपने चहेतों को प्रवेश देने के लिए विभागों में सीटों को दो से दस तक कर दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन नियमों को ताक पर रखकर अपनी सहूलियत के अनुसार फैसले ले रहा है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में ऐसे भी विभाग है जिसमें पीएचडी की सीटें खाली पड़ी है लेकिन प्रशाशन को उन सीटों को भरने की कोई सुध नहीं है। यह उन छात्रों के लिए चिंता का विषय बन गया है, जो पीएचडी में प्रवेश लेना चाहते है, लेकिन प्रशाशन द्वारा इनकी काउंसलिंग के बारे अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश के छात्रों में विश्वविद्यालय के प्रति अविश्वास का माहौल बना हुआ है, प्रशाशन ने विश्वविद्यालय के नाम और काम दोनों में दाग लगाने का काम किया है।

उन्होंने कहा कि पीएचडी दाखिलों में आरक्षण सूची को लागू किया जाए ताकि समाज के सभी वर्गों के छात्रों को प्रवेश मिल सके। साथ ही साथ अन्य एनएफएसई (NFSE) छात्रवृति वाले छात्रों को भी पीएचडी दाखिले में तवजो दिया जाना चाहिए।

आकाश नेगी ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने बिना प्रवेश परीक्षा व नेट जेआरएफ के पीएचडी में प्रवेश देने की जो अधिसूचना निकाली है, उसे जल्द वापिस किया जाए और विभागों में पीएचडी की खाली पड़ी सीटों को जल्द भरा जाए और सीटों को भरने लिए आरक्षण सूची को लागू किया जाए।

 

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