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सोलन- किसानों को अब जंगली जानवरों के उत्पात से फसलों को बचाने के लिए खेतों की मेंढ पर बैठने की जरूरत नहीं। न ही रात को पहरा देने के लिए मचान बनाने की आवश्यकता है। किसानों की इन तमाम तकलीफों का हल सोलर फेंसिंग से होगा। खेतों के चारों तरफ फेंसिंग करने के बाद इसमें सोलर एनर्जी से तैयार होने वाली बिजली की सप्लाई दी जाएगी। रात या दिन को कोई जानवर जैसे ही खेतों की तरफ बढ़ेगा वह करंट का झटका खाते ही वहां से भाग जाएगा। सोलर फेंसिंग की खासियत यह होगी कि इससे जानवर को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा।

मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना के तहत प्रदेश के किसान 60 फीसदी अनुदान पर अपने खेतों में सोलर इलेक्ट्रिक फेंसिंग कर सकते हैं। इससे बंदरों और जंगली जानवरों की वजह से फसलों को होने वाले नुकसान से बचाया जा सकेगा। सोलर फेंसिंग से खेतों में एक सोलर पेनल लगाया जाता है। इसमें एक बैटरी लगी होती है, इसके बाद खेतों में पांच पांच मीटर की दूरी पर1.5 मीटर से 2.10 मीटर ऊंचाई के लकड़ी या आरसीसी के पोल लगाए जाते हैं। इसमें 5 से 9 मीटर तक हाईटेंशन वारयर लगाई जाती है। बैटरी के जरिये इन तारों में करंट दिया जाता है। इसे बंदर या जंगली जानवर जब छूता है तो उसे करंट का झटका लगता है और वह खेतों से दूर भाग जाता है।

कितना करना होगा खर्च

किसानों को खेतों में 100 मीटर सोलर फेंसिंग के लिए 111685 रुपये देने होंगे। इसमें उन्हें 60 फीसदी अनुदान मिलेगा। 200 मीटर फेंसिंग के 166417 रुपये, 300 मीटर के 215983 और 500 मीटर के 315115 रुपये देने होंगे। 700 मीटर के 414706, 1000 मीटर के 566509, 15000 मीटर के 814798 रुपये मिलेंगे। इस फेंसिंग को किसान व्यक्तिगत या सामूहिक रूप से अपने खेतों में लगवा सकते है।

सोलर फेंसिंग का जिले में काम शुरू

सोलर फेंसिंग आसानी से लगाई जा सकती है और खेतों में एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में भी इसमें आसानी रहती है। यह जंगली जानवरों और आवारा पशुओं से फसलों को बचाने में पूरी तरह से सक्षम है। कृषि विभाग के उपनिदेशक हरनाम सिंह राठौर ने बताया कि सोलर फेंसिंग के लिए विभाग को किसानों के आवेदन मिलना शुरू हो गए हैं। सोलन में एक सोलर फेंसिंग लगाई जा चुकी है। सोलर फेंसिंग लगाने के लिए किसानों को मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना के तहत 60 प्रतिशत अनुदान भी दिया जा रहा है।

उत्पाद सालाना कारोबार
सेब 180 करोड़
टमाटर 70 करोड़
शिमला मिर्च 30 करोड़
भिंडी-फ्रांसबीन 20 करोड़
अन्य पैदावार 100 करोड़

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