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नगर निगम शिमला द्वारा प्रस्तुत द्वितीय बजट केवल पिछले बजट की कॉपी पेस्ट, आय स्रोतों में 38% की गिरावट: कांग्रेस,पूर्व मेयर

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Shimla MC Budget 2019-20

शिमला- नगर निगम शिमला ने वीरवार को वर्ष 2019-20 का 297 करोड़ का बजट पेश किया। बजट में शहर के लोगों पर कोई नया टैक्स नहीं लगा है।

विपक्षी दलों ने महापौर के पेश किए गए बजट को घाटे का बजट करार दिया है। उन्होंने कहा कि बजट में कुछ नया नहीं है। तीन-चार नई योजनाओं को छोड़ दें तो इस बजट में नया और कुछ नहीं।

कांग्रेस ने कहा कि शहर को मूलभूत सुविधाए मुहैया करवा पाने में असमर्थ रहा निगम जनता का ध्यान समस्याओं से हटाने हेतु अनोखे प्रयोग लेकर आया है, महिलाओ को आत्म निर्भर करने को मिली 50 लाख की धनराशि को लेप्स करवाने के बाद अब स्कूलो में लेप टाप बांटने की योजनाए गिनाई जा रही है जो की पहले ही राज्य सरकार कर रही है इसमे निगम का कोई रोल है ही नही , मरीजो को मुफ़त खाना व डेड बॉडी वेन शहर में अनेकों समाज सेवी संस्थाएं पहले से ही चला रहीं हैं ऐसे में शहर की मूलभूत सुविधाओं पर किसी प्रकार कि कोई स्कीम न बना पाना निगम कि अपरिपक्वता दर्शाता है ।

कांग्रेस ने कहा कि भाजपा की सरकार प्रदेश में होने के बावजूद भाजपा शासित निगम किसी भी तरह की अतिरिक्त ग्रांट प्राप्त करने में पूर्णतः विफल रही है निगम को कोई भी अतिरिक्त सहायता सरकार की ओर से नहीं मिली हैं ये निगम और सरकार में रही तालमेल कि कमी को साफ दिखाता है ।

पुराने बजट में की गई घोषनाए, शहर के हर वार्ड में पार्क व जिम्नेजियम , व्यस्ततम सड़कों पर ओवर हेड ब्रिज , तेहबाजरियों के लिए स्थायी नीति , वेस्ट से विधयुत उत्पादन , नई पार्किंग सब धरे के धरे रह गए हैं अब इस बार फिर से केवल औपचारिताएं पूरी करने हेतु बजट पढ़ा गया है।

शिमला के पूर्व मेयर संजय चौहान ने नगर निगम शिमला द्वारा प्रस्तुत द्वितीय बजट को केवल पिछले नगर निगम द्वारा प्रस्तुत बजट की ही कॉपी पेस्ट किया गया दस्तावेज बताते हुए कहा कि पिछले नगर निगम द्वारा वर्ष 2016-17 व वर्ष 2017-18 के बजट में जिन योजनाओं की प्रस्तावना की गई थी उन्हीं का जिक्र पिछले बजट में भी किया गया था और इस वर्ष के बजट में भी अधिकांश वहीं प्रस्तावित की गई है।

संजय चौहान ने कहा कि ये बजट बिल्कुल ही प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा बनाया गया आंकड़ों का केवल हेर फेर हैं।

संजय चौहान ने कहा कि नगर निगम वित्तीय संकट में चला गया है। जबकि पूर्व नगर निगम के अंतिम बजट वर्ष 2017-18 को देखा जाये तो इस बजट में 4453.50 लाख रुपये का व्यय आय से कम प्रस्तावित था। जोकि सरप्लस बजट था। जबकि आज बजट में गत वर्ष की तुलना में 1607.23 लाख रुपये का घाटा दर्शाया गया है। कहा कि इससे नगर निगम का वित्तीय संकट और अधिक बढ़ेगा।

बजट में आज भी पिछले समय से चली आ रही योजनाओं का ही जिक्र किया गया है । निर्माणाधीन पार्किंग, पार्क, सामूदायिक भवन,एम्बुलेंस रोड,ओवरब्रिज आदि का ही हवाला दिया गया है परंतु कब पूर्ण होगी इसका कोई भी वचनबद्धता इसमे नहीं है। तहबाजारियों को बसाने की योजना पूरी तरह से ठंडे बस्ते में डाल दी गई है। शहरी गरीब, महिलाओं, मजदूरों के लिए जो पूर्व नगर निगम के द्वारा जो योजनाएं निर्धारित की गई थी वह बन्द कर दी हैं क्योंकि इस बजट में लेबर होस्टल के निर्माण, शहरी गरीब व महिलाओं के लिए जो प्रावधान किए गए थे उन्हें इससे हटा दिया है।

संजय चौहान ने कहा कि युवाओं व बुजुर्गों के लिए भी बजट में कुछ भी ठोस रूप से दर्शाया नहीं गया है।
संजय चौहान ने कहा कि बीजेपी की पूर्व सरकार 2012 में भी शिमला शहर के पेयजल का निजीकरण कर रही थी जिसे पूर्व नगर निगम ने बदल दिया था और नगर निगम के अधीन ही पेयजल की व्यवस्था को रखा गया था। परन्तु वर्तमान नगर निगम ने इसे बदल कर पुनः कंपनी बनाकर निजीकरण की प्रक्रिया आरम्भ कर दी है। जिसके चलते शहरवासियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। जोकि इस वर्ष के बजट में विकासात्मक गतिविधियों के लिए बजट अनुमानों के विवरण(पेज 36) में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि इसमें पूर्व बजट में जो प्रावधान पानी और सीवरेज के लिए रखा गया था अब यह प्रावधान ही नहीं रखा गया है।

संजय चौहान ने कहा कि इसके साथ साथ ही पानी की दरों में वर्ष 2018 में लगभग 35% की वृद्धि कर बिल दिये जा रहे है।

संजय चौहान ने कहा कि इस बजट में बिना धन के प्रावधान से जो नए टाउन हॉल का प्रस्ताव जो रखा गया है वह भ्रमित करने वाला है। टाऊन हाल एक ऐतिहासिक धरोहर है जिसका मालिक व कब्जा दशकों से नगर निगम का ही हैं और इसमें नगर निगम का कार्यालय ही रहा है।

संजय चौहान ने कहा कि पूर्व नगर निगम द्वारा चलाई गई योजनाओं को ही इस बजट में रेखांकित कर विकास दिखाने का प्रयास किया गया है। अपनी कोई भी नई योजना बजट में नहीं डाली गई है।

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हिमाचल की तीन ग्राम पंचायतों में 435 एकड़ भूमि पर लगे 76,000 से अधिक सेब के पौधे

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nauni university himachal pradesh

शिमला- डॉ यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के विस्तार शिक्षा निदेशालय में पहाड़ी कृषि एवं ग्रामीण विकास एजेंसी(हार्प), शिमला द्वारा एक अनुभव-साझाकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया।

इस कार्यशाला में जिला किन्नौर के निचार विकास खंड के रूपी, छोटा कम्बा और नाथपा ग्राम पंचायतों के 34 किसानों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर जीएम नाबार्ड डॉ. सुधांशु मिश्रा मुख्य अतिथि रहे जबकि नौणी विवि के अनुसंधान निदेशक डॉ रविंदर शर्मा ने विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत की।

संस्था के अध्यक्ष डॉ. आर एस रतन ने कहा कि यह कार्यक्रम एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना के तहत रूपी, छोटा कम्बा और नाथपा ग्राम पंचायतों में वर्ष 2014 से आयोजित किया जा रहा है। परियोजना को नाबार्ड द्वारा वित्त पोषित किया गया है और इसे हार्प द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।

उन्होंने यह बताया कि यह एक बागवानी आधारित आजीविका कार्यक्रम है जिसे किसानों की भागीदारी से लागू किया गया है। इन तीन ग्राम पंचायतों में 435 एकड़ भूमि पर 76,000 से अधिक सेब के पौधे लगाए गए हैं और 607 परिवार लाभान्वित हुए हैं।

डॉ. सुधांशु मिश्रा ने यह भी कहा कि नाबार्ड हमेशा सामाजिक-आर्थिक उत्थान कार्यक्रमों के संचालन में आगे रहा है। उन्होंने इस कार्यशाला में भाग लेने वाले किसानों से अपने सहयोग से विभिन्न कार्यक्रमों को सफल बनाने का आग्रह किया।

अनुसंधान निदेशक डॉ. रविंदर शर्मा और विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. दिवेंद्र गुप्ता ने नाबार्ड और हार्प के प्रयासों की सराहना की और किसानों को आश्वासन दिया कि विश्वविद्यालय किसानों को तकनीकी रूप से समर्थन देने के लिए हमेशा तैयार है।

डॉ. नरेद्र कुमार ठाकुर ने कहा कि हार्प ने कृषक समुदाय के समन्वय से दुर्गम क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियों में काम किया है। इस अवसर पर एक किसान-वैज्ञानिक परिचर्चा का भी आयोजन किया गया जिसमें भाग लेने वाले किसानों के तकनीकी प्रश्नों को संबोधित किया गया।

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हिमाचल सरकार पुलिसकर्मियों का कर रही है शोषण

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hp police

पुलिसकर्मियों की डयूटी बेहद सख्त है,कई-कई बार तो चौबीसों घण्टे वर्दी व जूता उनके शरीर में बंधा रहता है।थानों में खाने की व्यवस्था तीन के बजाए दो टाइम ही है,राजधानी शिमला के कुछ थानों के पास अपनी खुद की गाड़ी तक नहीं है,हैड कॉन्स्टेबल से एएसआई बनने के लिए सत्रह से बीस वर्ष भी लग जाते हैं।

शिमला सीटू राज्य कमेटी ने प्रदेश सरकार पर कर्मचारी विरोधी होने का आरोप लगाया है। कमेटी ने यह कहा है कि वह हिमाचल प्रदेश के पुलिसकर्मियों की मांगों का पूर्ण समर्थन करती है। आरोप लगाते हुए सीटू ने कहा है कि प्रदेश सरकार पुलिसकर्मियों का शोषण कर रही है।

राज्य कमेटी ने प्रदेश सरकार से यह मांग की है कि वर्ष 2013 के बाद नियुक्त पुलिसकर्मियों को पहले की भांति 5910 रुपये के बजाए 10300 रुपये संशोधित वेतन लागू किया जाए व उनकी अन्य सभी मांगों को बिना किसी विलंब के पूरा किया जाए।

सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा व महासचिव प्रेम गौतम ने प्रदेश सरकार पर कर्मचारी विरोधी होने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जेसीसी बैठक में भी कर्मचारियों की प्रमुख मांगों को अनदेखा किया गया है। उन्होंने कहा कि जेसीसी बैठक में पुलिसकर्मियों की मांगों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है।

सीटू कमेटी ने कहा कि सबसे मुश्किल डयूटी करने वाले व चौबीस घण्टे डयूटी में कार्यरत पुलिसकर्मियों को इस बैठक से मायूसी ही हाथ लगी है। इसी से आक्रोशित होकर पुलिसकर्मी मुख्यमंत्री आवास पहुंचे थे। उनके द्वारा पिछले कुछ दिनों से मैस के खाने के बॉयकॉट से उनकी पीड़ा का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि पुलिस कर्मियों के साथ ही सभी सरकारी कर्मचारी नवउदारवादी नीतियों की मार से अछूते नहीं है। कमेटी ने कहा कि पुलिसकर्मियों की डयूटी बेहद सख्त है। कई-कई बार तो चौबीसों घण्टे वर्दी व जूता उनके शरीर में बंधा रहता है।

कमेटी ने यह भी कहा है कि थानों में स्टेशनरी के लिए बेहद कम पैसा है व आईओ को केस की पूरी फ़ाइल का सैंकड़ों रुपये का खर्चा अपनी ही जेब से करना पड़ता है। थानों में खाने की व्यवस्था तीन के बजाए दो टाइम ही है। मैस मनी केवल दो सौ दस रुपये महीना है जबकि मैस में पूरा महीना खाना खाने का खर्चा दो हज़ार रुपये से ज़्यादा आता है। यह प्रति डाइट केवल साढ़े तीन रुपये बनता है, जोकि पुलिस जवानों के साथ घोर मज़ाक है। यह स्थिति मिड डे मील के लिए आबंटित राशि से भी कम है।

उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के जमाने के बने बहुत सारे थानों की स्थिति खंडहर की तरह प्रतीत होती है जहां पर कार्यालयों को टाइलें लगाकर तो चमका दिया गया है परन्तु कस्टडी कक्षों,बाथरूमों,बैरकों,स्टोरों,मेस की स्थिति बहुत बुरी है। इन वजहों से भी पुलिस जवान भारी मानसिक तनाव में रहते हैं।

सीटू ने कहा कि पुलिस में स्टाफ कि बहुत कमी है या यूं कह लें कि बेहद कम है व कुल अनुमानित नियुक्तियों की तुलना में आधे जवान ही भर्ती किये गए हैं जबकि प्रदेश की जनसंख्या पहले की तुलना में काफी बढ़ चुकी है यहाँ तक पुलिस के पास रिलीवर भी नहीं है।

आरोप लगाते हुए कमेटी ने कहा कि प्रदेश की राजधानी शिमला के कुछ थानों के पास अपनी खुद की गाड़ी तक नहीं है। वहीं पुलिस कर्मी निरन्तर ओवरटाइम डयूटी करते हैं। इसकी एवज में उन्हें केवल एक महीना ज़्यादा वेतन दिया जाता है। इस से प्रत्येक पुलिसकर्मी को वर्तमान वेतन की तुलना में दस से बारह हज़ार रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है। उन्हें लगभग नब्बे साप्ताहिक अवकाश,सेकंड सैटरडे,राष्ट्रीय व त्योहार व अन्य छुट्टियों के मुकाबले में केवल पन्द्रह स्पेशल लीव दी जाती है।

सीटू कमेटी ने यह भी कहा कि वर्ष 2007 में हिमाचल प्रदेश में बने पुलिस एक्ट के पन्द्रह साल बीतने पर भी नियम नहीं बन पाए हैं। इस एक्ट के अनुसार पुलिसकर्मियों को सुविधा तो दी नहीं जाती है परन्तु कर्मियों को दंडित करने के लिए इसके प्रावधान बगैर नियमों के भी लागू किये जा रहे हैं जिसमें एक दिन डयूटी से अनुपस्थित रहने पर तीन दिन का वेतन काटना भी शामिल है। पुलिसकर्मियों की प्रोमोशन में भी कई विसंगतियां हैं व इसका टाइम पीरियड भी बहुत लंबा है। हैड कॉन्स्टेबल से एएसआई बनने के लिए सत्रह से बीस वर्ष भी लग जाते हैं।

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किन्नौर में लापता पर्यटकों में से 2 और के शव बरामद, 2 की तालाश जारी,आभी तक कुल 7 शव बरामद

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kinnaur trekker deaths

शिमला रिकोंगपिओ में 14 अक्तुबर को उत्तरकाशी के हर्षिल से छितकुल की ट्रैकिंग पर निकले 11 पर्यटकों में से लापता चार पर्वतारोहीयों में से दो  पर्वतारोहियों के शवो को आई.टी.बी.पी व पुलिस दल द्वारा पिछले कल सांगला लाया गया था जहां सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सांगला में दोनों शवों का पोस्टमार्टम किया गया।

यह जानकारी देते हुए उपायुक्त किन्नौर अपूर्व देवगन ने बताया कि इन दोनों की पहचान कर ली गई है जिनमे मे एक उतरकाशी व दूसरा पश्चिम बंगाल से सम्बंधित था।

उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन किन्नौर द्वारा आज एक शव वाहन द्वारा उतरकाशी को भेज दिया गया है जहाँ शव को जिला प्रशासन उतरकाशी को सौंपा जाएगा। जब कि दूसरा शव वाहन द्वारा शिमला भेजा गया है जिसे शिमला में मृतक के परिजनों को सौंपा जायेगा।

उपायुक्त अपूर्व देवगन ने बताया कि अभी भी लापता दो  पर्यटकों की तलाश आई.टी.बी.पी के जवानों द्वारा जारी है। उल्लेखनीय है कि गत दिनों उतरकाशी से छितकुल के लिये 11 पर्वतारोही ट्रेकिंग पर निकले थे जो बर्फबारी के कारण लमखंगा दर्रे में फंस गये थे जिसकी सूचना मिलने पर जिला प्रशासन द्वारा सेना के हेलीकॉप्टर व आई.टी.बी.पी के जवानों की सहायता से राहत व बचाव कार्य आरम्भ किया था। सेना व आई.टी.बी.पी के जवानों ने 21 अक्टूबर को दो पर्यटकों को सुरक्षित ढूंढ निकाला था। इसी दौरान उन्हें अलग अलग स्थानों पर पाँच ट्रेकरों के शव ढूंढ निकलने में सफलता मिली थी। जबकि 4 पर्यटक लापता थे जिसमे से राहत व बचाव दल को 22 अक्तुबर को 2 शव ढूढ़ निकालने में सफलता मिली थी। अभी भी दो पर्यटक लापता हैं जिनकी राहत व बचाव दल द्वारा तलाश जारी है।

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