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एचपीयू में 31 मई से शुरू होंगी पीजी प्रवेश परीक्षाएं, देखें शेड्यूल

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शिमला- एचपीयू ने शैक्षणिक सत्र 2017-18 के लिए संशोधित अकादमिक और प्रवेश का शेडयूल जारी किया है। प्रवेश परीक्षाएं सेंट्रलाइज्ड होंगी। पहली बार सभी कोर्सों के लिए ऑनलाइन आवेदन होगा। फीस भी ऑनलाइन ही जमा करवाई जा सकेगी। स्नातकोत्तर कोर्स की प्रवेश परीक्षाएं 31 मई से शुरू होंगी और 17 जून तक चलेंगी। कोर्स के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तारीख 29 अप्रैल है।

अन्य विषयों के लिए 15 जून तक आवेदन किया जा सकता है। विद्यार्थियों को प्रोस्पेक्टस ऑनलाइन मिलेंगे। आवेदन करने वाले छात्रों को अलग से लॉगइन आईडी मिलेगा। इससे प्रवेश परीक्षा से संबंधित हर प्रकार की जानकारी मिलेगी। विवि की अधिष्ठाता अध्ययन प्रो. गिरिजा शर्मा ने कहा कि संशोधित शेडयूल के मुताबिक प्रवेश प्रक्रिया पूरी होगी। इसे विवि की वेबसाइट www.hpuniv.in पर उपलब्ध करवाया है। ऑनलाइन प्रोस्पेक्टस और फार्म साइट पर उपलब्ध होने की जानकारी जल्द दी जाएगी।

29 अप्रैल तक करना होगा ऑनलाइन आवेदन

विवि के पीजी सेंटर में स्नातकोत्तर कोर्स में प्रवेश के लिए आवेदन करने की अंतिम तारीख 29 अप्रैल है। एमएमसी (फिजिक्स, केमिस्ट्री, बॉटनी, जूलॉजी, जियोग्राफी, मैथेमेटिक्स), एमए (फिजिकल एजूकेशन, इंग्लिश, सोशल वर्क), एमएड, डीएचआरडी, पीजीडीएमसी, एलएलबी (तीन वर्षीय), एमएबीई, एमए (हिंदी ट्रांसलेशन, संस्कृत, म्यूजिक, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, लोक प्रशासन, राजनीति विज्ञान, साइकोलॉजी, इतिहास, विजुअल आर्ट (पेंटिंग) योगा स्टडीज, ग्रामीण विकास और एमकॉम कोर्स में प्रवेश को ऑनलाइन आवेदन करना होगा।

किस पीजी कोर्स की कब होगी प्रवेश परीक्षा

ट्रांसलेशन, विजुअल आर्ट म्यूजिक 31 मई, एमए (सोशल वर्क/इंग्लिश) 1 जून, पीजीडीएमसी/डीएचआरडी 2 जून, एमए फिजिकल एजूकेशन, एमपीएड 3,4,5 जून, साइकोलॉजी, इतिहास 6 जून, ग्रामीण विकास /योगा 7 जून, एमएमसी/एमएससी मैथ 8 जून, एमएससी (फिजिक्स, बॉटनी/केमिस्ट्री) 16 जून, एलएलबी/एमएससी जूलॉजी 12 जून, एमकॉम/एमएबीई 16 जून, एमए अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र 14 जून, एमए लोेक प्रशासन राजनीति विज्ञान 15 जून, एमएड /एमएससी भूगोल 16 जून, एमए हिंदी, संस्कृत 17 जून। इसके अलावा एडवांस डिप्लोमा इन आरएस एंड जीआईएस 19 सितंबर, एमफिल/एलएलएम 19 और 20 सितंबर।

एक जुलाई को आएंगे प्रवेश परीक्षा के नतीजे

प्रवेश परीक्षा वाले सभी पीजी कोर्स का परिणाम एक जुलाई को घोषित होगा। एमफिल और एलएलएम और एडवांस डिप्लोमा इन आरएस एंड जीआईएस का नतीजा 12 अक्तूबर को घोषित किया जाएगा।

सब्सिडाज्ड सीटों के लिए साक्षात्कार 10 जुलाई से

विवि के विभिन्न कोर्स की प्रवेश परीक्षा के बाद इंटरव्यू की तारीख भी तय की गई है। एमएससी फिजिक्स, केमिस्ट्री, गणित, भूगोेल पीजीडीएमसी एमए सोशल वर्क की काउंसलिंग दस जुलाई, एमएससी जियोलॉजी, बॉटनी और एमएमसी कोर्स की 11 जुलाई, एलएलबी कोर्स में प्रवेश को सब्सिडाइज्ड सीट के लिए 12 जुलाई, एमए इंग्लिश, साइकोलॉजी, एमए लोक प्रशासन, शारीरिक शिक्षा, समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान, म्यूजिक, योग और एमए ग्रामीण विकास के लिए 13 जुलाई को काउंसलिंग होगी।

एमए इतिहास, संस्कृत, अर्थशास्त्र, हिंदी, विजुअल आर्ट पेंटिंग, ट्रांसलेशन, सर्टिफिकेट और एडवांस डिप्लोमा भोटी और योग के लिए 17 जुलाई को काउंसलिंग होगी। इसके अलावा सभी डिप्लोमा, एडवांस डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स के लिए 15 जून को साक्षात्कार होगा।

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10 कार्यकर्ताओं के निष्कासन पर ऐबीवीपी का धरना प्रदर्शन,विश्वविद्यालय पर एक तरफा कार्यवाही का लगाया आरोप

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शिमला– आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इकाई ने विश्वविद्यालय में पिंक पेटल्स चौक पर धरना प्रदर्शन किया । इकाई सचिव अंकित चंदेल ने जानकारी देते हुए बताया की पिछले कल विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से एक तनशाही फैसला निकाला गया जिसमें 10 ऐबीवीपी कार्यकर्ताओं को विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया गया।

गौरतलव है की पिछले 11 जुलाई को विद्यार्थी परिषद ने कैम्पस मे धरना प्रदर्शन किया था जिसके चलते 10 छात्रों का निष्काशन कर दिया है।

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धरने को संबोधित करते हुए इकाई सचिव अंकित चन्देल ने बताया की एक तरफ जब कर्मचारियों द्वारा कुलपति कार्यालय में नारेबाजी की जाती है तो उन कर्मचारियों क खिलाफ कुलपति साहब की कोई प्रतिक्रिया नही आती, परन्तु जब ऐबीवीपी कैम्प्स में धरना प्रदर्शन करते है तो उन्हें तुरन्त प्रभाव से निष्कासित कर दिया जाता है जोकि सरासर एकतरफा कार्यवाही है।

चन्देल ने कहा कि विश्वविद्यालय अपनी कमियों को छुपाने क लिए तरह-2 के हथकण्डे अपना रहा है। जहाँ अधूरे परिणामों की वजह से प्रदेश भर के छात्र परेशानी में हैं वहीँ प्रशासन अपने मुंह मिया मिठु बनने में कोई कसर नही छोड़ता।

ABVP Protest at HPU over suspension of members

चन्देल ने कहा कि सभी को ज्ञात है विवि में नौ महीने में पीएचडी (P.hD) और एमसीऐ (MCA) में फर्जी तरीके से प्रवेश के मामले सामने आते है, और इन सभी गडवड़ियों के विरोध करने वाले छात्र संगठनों की आवाज को दबाने का प्रयास विश्वविद्यालय प्रशासन् कर रहा है।

धरने क माध्यम से प्रशासन को चेताते हुये परिषद ने मांग उठाई विश्वविद्यालय अपना काम करे न कि छात्र संगठनों के कार्य मे दखल दे। ऐबीवीपी ने चेतावनी दी है कि जल्द से जल्द परिषद कार्यकर्ताओं का निष्कासन् वापिस नही करता है तो प्रदेश स्तरीय आंदोलन करने में कोई गूरेज़ नही होगाI ऐबीवीपी ने साथ ही यूजी UG के सभी परीक्षा परणामों को पूरा करने की मांग भी प्रशासन के सामने रखी है।

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सेब के सर्मथन मुल्य में मात्र 50 पैसे बढ़ौतरी बागवानों से भद्दा मजाकः राठौर

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शिमला -हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा सेब के सर्मथन मुल्य में की गई मात्र 50 पैसे की बढ़ौतरी को बागवानों के साथ किया गया भद्दा मजाक करार दिया है।

आज शिमला से जारी प्रेस वयान में कुलदीप सिंह राठौर ने बताया कि वर्तमान समय में जब बागवानों को अपनी फसल तैयार करने के लिए भारी मंहगाई का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि जी.एस.टी के चलते सेब से संबंधित पैकिंग से लेकर फफूंद नाशक दवाईयां एवं अपनी फसलों को मंण्ड़ियों तक पहुॅचाने के लिए किराया भी कई गुणा बढ़ गया है इसके चलते सेब के सर्मथन मुल्य कम से कम 10 रूपये होना चाहिए।

कुलदीप राठौर ने कहा कि सेब इलाकों में बहुत जगह सड़कों की हालत खराब पड़ी है और सेब को मण्ड़ियों तक पहुॅचाने वाले ट्रक व गाड़ियों के मालिक खराव सडकों पर गाडियाॅं भेजने को मना कर रहे हैं इसलिए सरकार को चाहिए कि ख़राब सडकों को जल्दी से जल्दी ठीक करवायें।

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हिमाचल सरकार पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे : कर्मचारी नेता

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शिमला -हिमाचल प्रदेश कर्मचारी महासंघ के पूर्व अध्यक्ष सुरेन्द्र मनकोटिया, पूर्व सयुक्त सचिव सेन राम नेगी,पूर्व प्रेस सचिव हरीश गुलेरिया, गैर शिक्षक महासंघ के महासचिव दीप राम शर्मा ,इंदिरागांधी आयुर्विज्ञान मेडिकल कॉलेज के पूर्व महासचिव आत्मा राम शर्मा ने प्रदेश सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद करने के निर्णय की आलोचना करते हुए इसे कर्मचारी विरोधी बताया है।

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि जब जब प्रदेश में भाजपा सरकार सत्ता में आई तब तब प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद किया गया,जो कि कर्मचारियों के साथ अन्याय है।

कर्मचारी नेताओं ने जयराम सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि भाजपा कभी भी कर्मचारी हितेषी नही रही है।पूर्व में धूमल सरकार ने भी सत्ता में आते ही इसे बंद किया था अब बर्तमान में जयराम सरकार ने भी ऐसा ही किया है।उनका कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रख कर इसे खोला था।इसे खोलने का एक ही उद्देश्य था कि जो सरकार के किसी भी गलत फैंसले को चुनौती देने के लिए स्वतंत्र था और उसे जल्द और सस्ता न्याय मिल जाता था।

नेताओं का कहना है कि अब ऐसा नही होगा।किसी भी कर्मचारी को न्याय के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना होगा जहां पहले ही हजारों मामले सुनवाई के लिए लंबित पड़े है।

कर्मचारी नेताओं ने मुख्यमंत्री जयराम से आग्रह किया है कि वह इस मामले पर पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे। इसे उन्हें अपनी किसी भी प्रतिष्ठा का प्रश्न नही बनना चाहिए।

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