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शिमला- छोटा शिमला थाना में करीब दो साल पहले दर्ज हुए मुकदमे की सीआईडी जांच में सत्ताधारी पार्टी से जुड़े एक प्रधान की ओर से दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा कर पंचायत की जमीन कब्जाने का मामला सामने आया है। हाईकोर्ट के निर्देश पर जांच कर रही सीआईडी की जांच के दौरान फर्जीवाड़े के साथ ही शिमला पुलिस की करतूत भी सामने आ गई।

जांच में मिले सबूतों के आधार पर सीआईडी ने शिमला प्रशासन से आरोपी प्रधान के खिलाफ अभियोजन मंजूरी मांगी थी। डीसी शिमला ने आरोपी प्रधान के खिलाफ अभियोजन मंजूरी दे दी। जिसके बाद अब सीआईडी ने कोर्ट में चालान पेश कर दिया है। बता दें, साल 2014 में शिमला से सटी एक पंचायत प्रधान के खिलाफ साल 2014 में धोखाधड़ी कर पंचायत की जमीन अपने परिवार के सदस्यों के नाम करने का मामला सामने आया।

आरटीआई कार्यकर्ता गोविंद शांडिल की शिकायत पर तत्कालीन एएसआई राम लाल ने छोटा शिमला थाने में प्रधान के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। इसके बाद जब सीआईडी को जांच मिली तो आरोपी के फर्जीवाड़े की असलियत सामने आ गई। सीआईडी को कई ऐसे सबूत मिले जिनसे यह साबित हो गया कि उसने दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा किया था।

खास बात यह है कि सीआईडी ने इस मामले में भी वैज्ञानिक जांच का सहारा लिया और हर सबूत को वैज्ञानिक रूप से पुष्ट किया। इसके बाद प्रधान के खिलाफ अभियोजन मंजूरी मिलने के बाद सीआईडी ने सीजेएम कोर्ट में चालान पेश कर दिया है।

शिमला पुलिस ने खारिज कर दिए थे आरोप

जिस समय मामला दर्ज हुआ और तत्कालीन एएसआई रामलाल ने जांच शुरू की तो शिमला पुलिस के आला अधिकारियों ने ही आरोपों को खारिज कर दिया था। यही नहीं, उन्होंने आरोपी प्रधान को बचाते हुए अन्य लोगों पर ही जांच केंद्रित कर दी थी।

हालांकि शिमला पुलिस के इस खेल के खिलाफ पीड़ित ने हाईकोर्ट से किसी और जांच एजेंसी से जांच कराने की गुजारिश की थी। जिसके बाद हाईकोर्ट ने सीआईडी को जांच के निर्देश दिए थे।

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