एचपीयू 2016-17 सत्र में रूसा के पहले सत्र में छात्रों को मेजर-माइनर विषय से मिला छुटकारा

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शिमला- सत्र 2016-17 से लागू होने जा रहे नए रूसा में छात्रों को मेजर-माइनर विषय नहीं पढ़ना होगा। एचपीयू द्वारा इस सत्र में रूसा यूजीसी के नियमों और पाठ्यक्रम के तहत लागू किया जा रहा है। इसके लिए प्रवेश के नए नियम भी कालेजों को यूजीसी की तय गाइडलाइन के आधार पर विवि को जारी कर दिए हैं। इन नियमों के तहत सत्र 2016-17 में रूसा के पहले सत्र में छात्रों को मेजर-माइनर विषयों का चयन नहीं करना होगा।

यूजीसी के रूसा के लिए तय नियमों में मेजर-माइनर विषय की कोई शर्त शामिल नहीं है। अब छात्रों को केवल अपने संकाय से जुड़े विषयों के साथ कुछ अनिवार्य विषय पढ़ने होंगे। इस सत्र कालेजों द्वारा इसी गाइडलाइन के तहत छात्रों को प्रवेश दिया जा रहा है। आयोग द्वारा प्रवेश के लिए बनाए गए नियम एचपीयू ने भी अपनाए हैं और इस सत्र इन्हीं नियमों के तहत प्रवेश छात्रों को दिया जा रहा है। यूजीसी द्वारा तय सब्जेक्ट कांबीनेशन के तहत इस बार फर्स्ट सेमेस्टर में छात्रों को अपने संकाय यानी बीए,बीकॉम में दो विषय सब्जेक्ट कांबीनेशन में पढ़ने होंगे। इन विषयों के छह-छह क्रेडिट छात्रों के लिए तय होंगे। इसके अलावा एक लैंग्वेज विषय छात्रों को छह क्रेडिट का पढ़ना होगा। एक लैंग्वेज सब्जेक्ट इंग्लिश के अलावा एन्वायरनमेंट साइंस विषय छात्रों को पढ़ना होगा, जिसके लिए चार क्रेडिट नए नियमों के तहत तय किए गए हैं। साइंस विषय के छात्रों के लिए सब्जेक्ट कांबीनेशन में पहले सेमेस्टर में अपने संकाय से तीन विषय पढ़ना अनिवार्य होगा। हिंदी,अंग्रेजी भाषा विषय में से कोई एक विषय के साथ एन्वायरनमेंट साइंस विषय छात्र को पढ़ना होगा, जिसके चार क्रेडिट छात्र को मिलेंगे।

छात्र साइंस में ही चुनेंगे कोर्स

रूसा के तहत साइंस संकाय के छात्र अपने ही संकाय से विषय चुनेंगे। उन्हें आर्ट्स और अन्य विषयों से सब्जेक्ट कांबीनेशन नहीं चुनने होंगे। अब छात्र प्योर साइंस ही पढ़ेंगे।

सिंपल सब्जेक्ट कांबीनेशन

नए नियमों में छात्रों को सिंपल सब्जेक्ट कांबीनेशन होगा, इससे मेजर और माइनर विषयों को पढ़ाने में आ रही दिक्कतों का समाधान नई रूसा का समाधान नई रूसा में छात्रों और शिक्षकों को मिलेगा।

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