करीब 75,000 महिलाओं के वेतन में एक भी रुपए का इज़ाफा नहीं, मज़दूरों से भी 60 रुपए की ठगी: सीपीआई(एम)

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cpi(M) criticises himachal budget 2016

शिमला- सीपीआई(एम) लोकल कमेटी शिमला ने प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2016-17 के लिए घोषित बजट को मज़दूर व जनता विरोधी करार दिया है। पार्टी सचिव विजेन्द्र मेहरा ने कहा है कि नारी उत्थान व महिला सशक्तिकरण की बातें करने वाली राज्य सरकार ने आंगनबाड़ी,मिड डे मील व आशा वर्करज़ आदि स्कीम वर्करज़ के रूप में कार्यरत लगभग 75 हज़ार महिलाओं के वेतन में एक भी रुपए का इज़ाफा नहीं किया है जिससे उसकी मानसिकता साफ नजर आती है।

कमेटी ने कहा कि मात्र 600 रुपए,1800 रुपए, 3450 रुपए व 1000 रुपए वेतन पाने वाले इन मज़दूरों पर इस सरकार ने कुठाराघात किया है। प्रदेश सरकार ने जलवाहकों के वेतन में केवल 200 रुपए की बढ़ौतरी की है व इसे 1700रु से 1900 रु किया है।

लोकल कमेटी ने बताया कि जलरक्षकों के वेतन में मात्र 150 रु.बढ़ौतरी कर इसे 1350 से बढ़ाकर 1500 रु.किया है और सिलाई-कढ़ाई, अध्यापकों के वेतन में केवल 300 रु बढ़ौतरी कर इसे 2000 रु से 2300 रु किया है। पंचायत चैकीदारों के वेतन में मात्र 200 रु.की बढ़ौतरी कर 1850 रु.से 2050 रु. किया है। यह सब इन तबकों के साथ भद्दा मजाक है।

कमेटी ने ये भी कहा कि प्रदेश सरकार ने मज़दूरों के अथवा महंगाई दर से वेतन को जोड़ा गया है परन्तु हिमाचल प्रदेश में सरकार ने ऐसा न कर मज़दूरों की लूट की है। महंगाई दर के अनुसार प्रदेश में मज़दूरों की दिहाड़ी 260 रु होनी चाहिए परन्तु 200 रुपए दिहाड़ी करके भी सरकार ने मज़दूरों से 60 रुपए की ठगी की है।

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