आईपीएच विभाग की एक और लापरवाही, शिमला की दर्जनों पंचायतों को अभी भी दूषित पानी की हो रही सप्लाई

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Shimla Water Supply Contamination

शिमला -आईपीएच विभाग की लापरवाही का एक और नमूना सामने आया है। यहां मुख्यमंत्री के विस क्षेत्र के सैकड़ों गांवों को स्लज का पानी पिला दिया गया। लक्कड़ बाजार नाले में बने गोल्छा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से नाममात्र के ट्रीट इस पानी को नयासेर खड्ड में बहाया जा रहा है। हैरान करने वाला पहलु यह है कि प्लांट की लगभग सारी मशीनरी चौपट है। दस पेयजल योजनाओं के जरिये यह पानी लोगों को तक पहुंच रहा है।

परियोजना से शिमला ग्रामीण की दर्जनों पंचायतों के हजारों लोगों को दूषित पानी की सप्लाई हो रही है। पीने के पानी में सीवेज की गंदगी मिलने से अंजान हजारों लोग रोजाना इस पानी का पीने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। गंभीर बात यह है कि दूषित पानी का सेवन करने के 45 दिन बाद तक पीलिया के लक्षण सामने आते हैं। पाहल पंचायत में पीलिया के सामने आए हैं।

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के चुनाव क्षेत्र शिमला ग्रामीण की अधिकतर आबादी को नयासेर खड्ड से पीने के पानी की सप्लाई हो रही है। नयासेर खड्ड आगे जा कर सतलुज नदी में मिलती है लेकिन इससे पहले ही इन दस योजनाओं से पानी उठा कर शिमला ग्रामीण के गांवों को सप्लाई किया जा रहा है। गोल्छा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट खराब होने के कारण सीवेज बिना ट्रीट किए ही सीधे नाले में बहाई जा रही है। राजधानी शिमला में चल रहे आईपीएच के अधिकतर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट खराब साबित हुए हैं। हजारों लोगों की सेहत से सरेआम खिलवाड़ हो रहा है।

चार सैंपल हुए फेल
शिमला में पीलिया फैलने की जांच कर रही एसआईटी टीम की ओर से पुणे को भेजे पानी के पांच में चार सैंपल फेल हो गए हैं। ये वही पानी है जिसे आईपीएच ने क्लीन चिट दे दी थी। आईपीएच ने यह सैंपल 27 दिसंबर को भरे थे। जबकि, मामले की जांच कर रही एसआईटी ने पानी के सैंपल दो जनवरी को भरे थे। पुलिस की ओर से भरे गए पानी के पांच सैंपल में से चार फेल हो गए हैं।

जांच के लिए राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान पुणे भेजा गया, वहां से आई रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है। ढली सीवेज प्लांट के आउट लेट में हेपेटाइटिस-ई पाया गया, लेकिन यहां से छह किलोमीटर दूर बहने वाले पानी का लिया गया सैंपल सही पाया गया। इसके अलावा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट मल्याणा और अश्वनी खड्ड के पानी में हेपेटाइटिस- ई पाया गया। आईपीएच ने अश्वनी के पानी की टेस्ट रिपोर्ट सही करार दी थी। आईपीएच के मुताबिक यह सैंपल अश्वनी खड्ड से 27 दिसंबर को भरे थे।

ऐसे में आईपीएच पर यह सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या उन्होंने पानी के सैंपल अश्वनी खड्ड से भरे थे या फिर कहीं और से ? जब रिपोर्ट ठीक आई तो आईपीएच की ओर से कहा गया कि अश्वनी खड्ड के पानी को क्लीन चिट मिल गई है। इसके ठीक बाद पुलिस ने यह सैंपल भरे थे, ऐसे में यह कैसे संभव हो सकता है कि आईपीएच के सैंपल को क्लीन चिट दे दी जाती है और पुलिस के सैंपल फेल हो जाते हैं। एसआईटी इस मामले को लेकर आईपीएच की वह टेस्ट रिपोर्ट कब्जे में ले रही है। एसपी शिमला डीडब्ल्यू नेगी ने कहा कि पांच में से चार सैंपल फेल हुए हैं। पुलिस के पास पानी के सैंपलों की रिपोर्ट आ चुकी है। रिपोर्ट आने के बाद एसआईटी हर पहलू पर जांच कर रही है।

Image: Representational Purpose Only

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