बारूद के ढेर पर शिमला शहर, प्रशासन खामोश

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शिमला– दिवाली को बस दो दिन बाकी हैं। बाजार तरह-तरह के सजावटी सामान से सज गए हैं। पटाखे की दुकानें भी लग गई हैं। लेकिन, एक खतरा ऐसा है जो हर साल शहर पर मंडराता है। पटाखों का कारोबार अनचाहे ही शहर को बारूद के ढेर पर ला बिठा देता है। हर साल की तरह इस बार भी हिल्स क्वीन रोशनी और खुशियों में नहाने की पूरी तैयारी में है।

बाजारों में रौनक है तो मोहल्लों में रात के सन्नाटे में अचानक किसी पटाखे का धमाका बता देता है कि दिवाली नजदीक है। हादसे न हों, इसके लिए प्रशासन नियमों की सूची जारी करने की बात कर रहा है। लेकिन यह देखने वाला कोई नहीं कि घनी आबादी के बीच में बारूद के जाने कितने ढेर लगते हैं। इस दौरान यहां किसी बड़े हादसे का अंदेशा हमेशा बना रहता है।

शहर की सबसे अधिक घनी आबादी वाले लोअर बाजार में कई सालों से पटाखों के गोदाम चलाए जा रहे हैं। दिवाली के आसपास तो इन गोदामों में कई क्विंटल पटाखों का स्टॉक रहता है। इतना ही नहीं यहां कुछ दुकानदार बिना लाइसेंस के पटाखे बेचते नजर आते हैं, जिसकी इजाजत प्रशासन नहीं देता।

लेकिन जुगाड़ तंत्र से सब चलता है, पूछने की हिम्मत कोई नहीं जुटा पाता। आबादी के बीच बने इस गोदाम के आसपास एक छोटी चिंगारी भी घातक हो सकती है। इसी तरह शहर के विभिन्न हिस्सों में पटाखों के गोदाम आबादी वाले इलाकों में बनाए गए हैं।

पटाखा कारोबार से जुडे़ लोगों की मानें तो शिमला में पटाखों का काराबोर तो बीस लाख का भी आंकड़ा पार नहीं कर पाता। अधिकांश कारोबार बिना बिल (दो नंबर) से हो रहा है। शिमला में अंबाला और सहारनपुर से पटाखा लाया जाता है। शहर में हर साल पटाखों की करीब तीन सौ दुकानें लगती हैं।

हर खुदरा व्यापारी तीस से पचास हजार रुपये तक के पटाखे खरीदता है लेकिन बिल मात्र 5 से 10 हजार के बीच ही लेता है। इसमें थोक व खुदरा व्यापारी दोनों का ही फायदा है। वैट चुकाने के झंझट से भी छुटकारा मिल जाता है।

हर बार तोड़े जाते हैं ये नियम
-दो पटाखों की दुकान में 15 मीटर की दूरी
-पटाखे की दुकान से ज्वलनशीन की दुकान 15 मीटर दूर
-दुकान के सामने की सड़क 30 फीट चौड़ी होनी चाहिए
-दुकान पर आग बुझाने के लिए अग्निशमन यंत्र जरूरी
-दुकान की लंबाई 10 फीट व चौड़ाई 10 फीट होनी चाहिए
-पक्की दुकान व छत पट्टी व आरसीसी की होना जरूरी
-दुकान के बाहर पटाखे रखकर बेचने पर रोक

एडीएम ला एंड आर्डर डीके रतन ने कहा कि प्रशासन गंभीर है। नियमों को ताक पर रखकर पटाखों का कारोबार करने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। घनी आबादी के बीच पटाखों के भंडारण और बेचने पर रोक है। प्रशासन की ओर से खुले में पटाखे बेचने के लिए स्थान चिन्हित कर लिए गए हैं।

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