जिले के किसानों से 14 रुपये किलो खरीद कर बाजार में 40 रुपये किलो बेच रहे गोभी

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मेहोगी (भट्ठाकुफर)। हरी सब्जियों की सही कीमत न मिलने से किसान निराश हैं। सरकारी तंत्र गहरी नींद सोया है। कड़ी मेहनत के बाद किसानों को फसल के वाजिब दाम नहीं मिल रहे। फसल लगाना किसान के लिए जुआ बन गया है। मंडियों में किसानों की फसल कौड़ियों के भाव बिक रही है।

शिमला शहर के साथ लगते भट्ठाकुफर क्षेत्र के मेहोगी गांव के रामकृष्ण अपनी पत्नी और दो बेटों के साथ दिनरात खेतों में मेहनत करने के बावजूद फसल की सही कीमत न मिलने से निराश हैं। रामकृष्ण के परिवार की कमाई का जरिया खेतीबाड़ी ही है। जून में बंद गोभी की फसल लगाई थी, अब तैयार होने लगी है। लेकिन मंडी में गोभी आठ से चौदह रुपये प्रति किलो से अधिक नहीं बिक रही। हालांकि खुले बाजार में (रिटेल) बंद गोभी 30 से 40 रुपये प्रतिकिलो बिक रही है। रामकृष्ण ने बताया कि कंडाघाट से गोभी की नर्सरी खरीदी थी। अच्छी पैदावार के लिए 12,32,16 खाद का इस्तेमाल किया। फसल को फंगस और कीड़ों से बचाने के लिए महंगी दवाओं छिड़की। कड़ी मेहनत के बाद अब फसल मंडी पहुंचाई तो आठ रुपये प्रतिकिलो की दर से बिकी।

गौरतलब है कि शिमला जिले में सबि्जयों का बड़े स्तर पर कारोबार होता है लेकिन दाम सही नहीं मिलते। इसके साथ शिमला जिले के साथ लगते जिलों में भी सबि्जयों की भारी मात्रा में पैदावार की जाती है।

दूध बेच कर चला रहे गुजारा

रामकृष्ण का परिवार दूध बेचकर गुजर बसर कर रहा है। दूध के लिए दो गाय पाल रखी हैं। रामकृष्ण का बेटा हर रोज दूध लेकर शिमला जाता है। दूध बेचकर जो कमाई होती है उससे फसलों के लिए खाद और दवाएं खरीदते हैं लेकिन फसल तैयार होने के बाद मंडी में कीमत नहीं मिलती।

बंदरों से दिन रात करनी पड़ रही रखवाली

टमाटर और गोभी की सफल अभी तैयार नहीं हुई। दिनरात पक्षियों और बंदरों से फसल की रखवाली करनी पड़ रही है। मौका मिलते ही चिड़ियाें के झुंड टमाटर की सफल पर टूट पड़ते हैं। बंदर गोभी, खीरा और टमाटर सब उजाड़ देते हैं। खेत के कोने में फसल की रखवाली के लिए तान (शेड) बना रखा है। इस पर बैठकर परिवार के सदस्यों हर रोज पहरा देना पड़ रहा है। इसके बाद अगर सब्जियों के सही दाम नहीं मिले तो दुख होता है।

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चार महीने कड़ी मेहनत, कमाई 625 रुपये

चार महीनों की कड़ी मेहनत के बाद रामकृष्ण के परिवार के हर सदस्य की कमाई 625 रुपये प्रतिमाह होगी। रामकृष्ण को उम्मीद है कि 50 कट्टे बंद गोभी पैदा होगी। अधिकतम 400 रुपये प्रति कट्टा की दर से गोभी बिकी तो 20 हजार कमाई होगी। फसल तैयार करने और मंडी तक पहुंचाने पर दस हजार रुपये खर्चा आएगा। चार महीनों की मेहनत के बाद अगर परिवार दस हजार रुपये कमाई करता है तो परिवार के प्रत्येक व्यक्ति की मासिक कमाई सिर्फ 625 रुपये होगी।

खेतों में खून-पसीना एक करने के बावजूद किसानों को मेहनत की सही कीमत नहीं मिल रही। मूसलाधार बारिश हो या चटक धूप हर परिस्थिति में किसान खेतों में दिनरात एक कर रहे हैं। बावजूद इसके मंडियों में फसल औने-पौने दामों में बिक रही है। कई बार किसानों के लिए फसल की लागत निकालना तक मुश्किल हो रहा है। किसानों की समस्याओं को सामने लाने के लिए सोमवार को ‘अमर उजाला’ भट्ठाकुफर क्षेत्र के मेहोगी गांव पहुंचा। पेश है लाइव रिपोर्ट :-

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