चीन और न्यूजीलैंड के सेब दे रहे है हिमाचली सेब को चुनौती

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“हिमाचल प्रदेश के सेब को चीन और न्यूजीलैंड से आयातित सेबों से कड़ी चुनौती मिल रही है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि राज्य पहले से ही चीन, न्यूजीलैंड और अन्य देशों से आयात हो रहे सेबों से आहत है। मुख्यमंत्री राज्य के शिमला, कुल्लू और किन्नौर जिलों में ‘सेब का सतत विकास’ परियोजना शुरू करने के अवसर पर बोल रहे थे”

वीरभद्र सिंह ने आज नई दिल्ली में कॉनकोर के काॅरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व एवं निरन्तरता परियोजना का शुभारम्भ किया। यह परियोजना कॉनकोर के सामाजिक उत्तरदायित्व कार्यक्रम के तहत आरके पचौरी की अगुवाई वाली ऊर्जा और संसाधन संस्थान ( टेरी) द्वारा चलाई जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में सेब की पैदावार लक्ष्य तक नहीं पहुंची है इसलिए यह आवश्यक है कि राज्य में विश्वस्तरीय गुणवत्ता वाले सेब पैदा किए जाएं।

उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश में सेब फसल का क्षेत्रफल 2011-12 में बढ़कर 1.04 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है, जो 1960 में 3, 025 हेक्टेयर था। राज्य के कुल फल उत्पादक क्षेत्रफल में सेब फसल का क्षेत्रफल 48 फीसद से अधिक है।

सिंह ने बताया कि सरकार वैश्विक चुनौतियों से निपटने और सेब उद्योग के सतत विकास और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रतिस्पर्धा के लिए सभी उपाय कर रही है।

विकास की इस कॉनकोर परियोजना के अन्तर्गत जल संग्रहण ए यांत्रिकीकरण और कृषि शिक्षा के माध्यम से सेब के बागीचों की उत्पादकता एवं सेब की गुणवत्ता में सुधार के लिए आवश्यक नीति अपनाई जाएगी। परियोजना के तहत बागवानों के प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास पर बल दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह परियोजना नोबल पुरस्कार विजेता डाॅ. आर. के. पचैरी के नेतृत्व में दी एनर्जी एवं रिसोर्सिज इंस्टीच्यूट (टेरी) के माध्यम से कार्यान्वित की जाएगी।

वीरभद्र सिंह ने कहा कि राज्य सरकार वैश्विक चुनौतियों से निपटने और सेब उद्योग को अन्तर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रतियोगी बनाने के लिए सतत् प्रयासरत है। सेब की उत्पादकता बढ़ाने एवं गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए प्रदेश में सेब पुनः रोपण परियोजना कार्यान्वित की जा रही है। इस परियोजना के तहत पुराने तथा आर्थिक रूप से गैर लाभदायक सेब के पौधों को उच्च क्षमतायुक्त तथा विश्व स्तर पर लोकप्रिय सेब की किस्मों से बदला जा रहा है। यह परियोजना 5000 हेक्टेयर क्षेत्र में कार्यान्वित की जा रही है।

उन्होंने कहा कि इस परियोजना के माध्यम से बागवानों की क्षमता विकास तथा स्तरोन्नत सिंचाई सुविधा एवं यांत्रिकीकरण द्वारा बागीचा प्रबन्धन तकनीक में सुधार के राज्य सरकार के प्रयासों को बल मिलेगा। इन सब प्रयासों द्वारा प्रदेश की सेब आर्थिकी को बल मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से न केवल परियोजना क्षेत्र अपितु समूचा प्रदेश लाभान्वित होगा। information and P.R.

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