आईपीएच मंत्री ने दिए पीलिया को रोकने के लिए एहतियाती उपाय अपनाने के निर्देश

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“शिमला शहर में पीलिया रोग अपने पांव पसरता जा रहा है जिसे ले कर प्रशासन द्वारा संभव एहतियात कदम उठाए जा रहे है ताकी इस रोग की चपेट में आने वाले रोगियों की संख्या पर रोक लगाई जा सकें”

शिमला शहर के विकासनगर कसुम्पटी और पंथाघाटी से पीलिया रोग के सबसे ज्यादा मामले सामने आ रहे है । शिमला शहर मे विशेषकर अश्वनी खडड जलापूर्ति योजना से जुडे क्षेत्रों में पीलिया के मामले सबसे ज्यादा सामने आ रहे है। सरकार शहर में फैल रहें इस रोग को फैलने से रोकने के लिए हर संभव उपाए कर रही है।

इसी के चलते सिंचाई एंव जन स्वास्थ्य एंव शहरी विकास विभागों तथा शिमला नगर निगम के अधिकारियों के साथ शहर में फैल रहे पीलिया रोग के मामले को लेकर एक बैठक का आयोजन किया गया जिसमें सिंचाई एंव जन स्वास्थ्य मंत्री विद्या स्टोक्स ने स्वास्थ्य विभाग तथा शिमला नगर निगम को इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां अश्वनी खड्ड से पानी की आपूर्ति की जा रही है।

उन्होंने शहरवासियों को की जा रही पेयजल आपूर्ति की गुणवत्ता जांचने तथा मल्याणा उपचार संयंत्र के बहिःस्राव की गुणवत्ता के लिए अल्पावधि एवं दीर्घावधि उपाय सुनिश्चित बनाने के भी निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग को मल्याणा मल निकासी उपचार संयंत्र तथा अश्वनी खड्ड जलापूर्ति योजना के सुनियोजित कार्यान्वयन को सुनिश्चित बनाने के निर्देश दिए।

वहीं शिमला शहर से लगते क्षेत्रों में प्रदूषित स्थानीय जल स्रोतों के उपयोग को भी बंद करने के निर्देश दिए है इन क्षेत्रों में नगर निगम शिमला जलापूर्ति की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित बनाएगा। नगर निगम जल ग्रहण क्षेत्र में आने वाले सभी मकानों को मल निकासी प्रणाली से जोड़ने के लिए अभियान चलाने के साथ.साथ उन मकानों के पानी के कुनैक्शन काटने के निर्देश भी दिए गए है जिनके पास मल निकासी कुनैक्शन नहीं है।

वही बैठक में मल्याणा मल निकासी उपचार संयंत्र तथा अश्वनी खड्ड पेयजल आपूर्ति योजना से सैंपल लेने के लिए दो टीमें गठित करने का निर्णय लिया गया।

स्टोक्स ने कहा कि नगर निगम को ज्वाहर लाल नेहरु शहरी नवीकरण मिशन के अंतर्गत प्राथमिकता के आधार पर अश्वनी खड्ड जल प्रवाह क्षेत्र में मल निकासी परियोजना की मुरम्मत का कार्य करना चाहिए। उन्होंने निर्माण कार्यों का मलबे को वैज्ञानिक तरीके से ठिकाने लगाने के लिए भी कहा ताकि इसके कारण जलापूर्ति एवं मल निकासी पाइपों को नुक्सान न पहुंचे। उन्होंने नए भवनों में वर्षा जल संग्रहण प्रणाली सुनिश्चित बनाने के भी निर्देश दिए।

विद्या स्टोक्स ने वर्षा के दौरान सैप्टिक टैंकों से स्थानीय नालों में बहने वाले मल पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नगर निगम को ऐसे क्षेत्र चिन्हित कर उन्हें मल निकासी प्रणाली से जोड़ना चाहिए।

नगर निगम के उप महापौर टिकेन्द्र पंवर ने कहा कि मल उपचार संयंत्र से प्रवाहित होने वाले मल के कारण शिमला के कुछ क्षेत्रों में पीलिया के मामले सामने आने का अंदेशा है।

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