किसानो, बागवानों का ए.पी.एम.सी दफ्तर के बहार धरना, ज्ञापन सौंप राखी ये 11 मांगे

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शिमला– किसान संघर्ष समिति का आज ए.पी.एम.सी (शिमला- किन्नौर) के ढली, शिमला स्थित कार्यालय के बाहर धरना दिया। इसमें सैंकड़ों किसानों व बागवानों ने भाग लिया। बागवानों का आरोप है कि पिछले कुछ समय से किसान बागवान कृषि मण्डियों में आढ़तियों द्वारा बकाया भुगतान नहीं किया जा रहा और ए.पी.एम.सी इस पर कोई भी कार्यवाही नहीं कर रही हैं।

ए पी एम सी अधिनियम, 2005 के प्रावधान के तहत किसानों व बागवानों को उचित मुल्य सुनिश्चित करना ए.पी.एम.सी की जिम्मेदारी है जिसे यह करने में यह बिल्कुल विफल रहा है। धरने को विधायक राकेश सिंघा, समिति के अध्यक्ष सुरिंदर ठाकुर, सचिव संजय चौहान व किसान सभा के राज्य अध्यक्ष कुलदीप सिंह तंवर ने संबोधित किया। धरने के पश्चात एक ज्ञापन अध्यक्ष ए.पी.एम.सी को दिया गया।

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किसान संघर्ष समिति ने ज्ञापन में अध्यक्ष ए.पी.एम.सी से कहा कि शिमला व किन्नौर क्षेत्र में विभिन्न कृषि मडिण्यों में प्रदेश का सब्जी व फल उत्पादक ए.पी.एम.सी द्वारा नियंत्रित मण्डियों में अपने उत्पादन को बेचने में कठिनाईयों का सामना कर रहा है तथा इन मण्डियों में किसान शोषित महसूस कर रहा है।

समिति ने ज्ञापन में कहा कि फल व सब्जी उत्पादक अपना उत्पाद लेकर इन मण्डियों में लेकर आता है तो कई प्रकार की काट इनसे की जाती है। कई कृषि मण्डियों में सेब व अन्य फलों की प्रति पेटी पर 20-30 रुपए की गैर कानूनी काट की जा रही है जो कि ए.पी.एम.सी अधिनियम, 2005 की खुली अवहेलना है। इन्हीं मण्डियों मे कई आढ़ती ऐसे भी हैं जिन्होंने हज़ारों बागवानों का बकाया भुगतान करना है तथा यह बकाया भुगतान की राशी सैंकड़ों करोड़ रुपए में है।HP Kisan Sangharsh Samiti Protest Against APMC 2

समिति ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि इससे बागवानों को इन आढ़तियों के द्वारा आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। हिमाचलप्रदेश कृषि एवं औद्यानिकीय उपज विपणन (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 2005 के तहत यह उत्तरदायित्व ए.पी.एम.सी का ही बनता है कि इन मण्डियों में निष्पक्ष व्यवहार से व्यापार किया जाए और किसानों व बागवानों को उनके त्पादन का उचित मुल्य सुनिश्चित किया जाए।

किसान संघर्ष समिति ने निम्नलिखित मांगे रखी हैं:

  1. विभिन्न कृषि मण्डियों में किसानों व बागवानों का आढ़तियों से बकाया भुगतान तुरंत करवाया जाए
    तथा दोषी आढ़तियों के विरूद्ध सख्त कानूनी कार्यवाही अमल मे लाई जाए।
  2. विभिन्न कृषि मण्डियों में बागवानों से की जा रही 20-30 रुपए प्रति पेटी की गैर कानूनी काट
    पर तुरंत रोक लगाई जाए तथा पिछले वर्षो में आढ़तियों द्वारा की गई इस गैर कानूनी काट को
    बागवानों को वापिस लौटाया जाएं।
  3. सब्जी मण्डियों में गैर कानूनी रूप से की जा रही 2-5 कि।ग्रा। प्रति नग की काट पर तुरंत रोक
    लगाई जाए।
  4. हिमाचल प्रदेश कृषि एवं औद्यानिकीय उपज विपणन (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 2005
    (अनुभाग 39, उप अनुभाग 2 की धारा गपग) को प्रदेश की समस्त मण्डियों में लागू किया जाएं तथा
    जिस दिन माल बिके किसानों व बागवानों को उसी दिन भुगतान किया जाए।
  5. हिमाचल प्रदेश कृषि एवं औद्यानिकीय उपज विपणन (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 2005
    (अनुभाग 39, उप अनुभाग 2 की धारा गपग) के प्रावधान के अनुसार खरीददार को लाइसेंस जारी व
    नवीनीकरण के समय उनसे सुरक्षा के रूप में कम से कम 50 लाख रुपए की बैंक गारंटी को
    सुनिश्चित किया जाए।
  6. समस्त कृषि मण्डियों का विस्तार कर फड़ों को बढ़ाया जाए।
  7. विभिन्न कृषि मण्डियों के साथ किसानों व बागवानों को उनके उत्पादों को शीत भण्डारण में रखने
    हेतु सी।ए। स्टोर का निर्माण किया जाए।
  8. समस्त कृषि मण्डियों में आधुनिक सुविधाओं से लैस शैडों का निर्माण किया जाए।
  9. समस्त कृषि मण्डियों में लोडिंग, अनलोडिंग व पार्किंग की उचित व्यवस्था की जाए।
  10. समस्त कृषि मण्डियों में किसानों, बागवानों व मजदूरों के लिए कैंटीन व ठहरने की सस्ती व उचित
    व्यवस्था की जाए।
  11. प्रत्येक कृषि मण्डी में हिमाचल प्रदेश कृषि एवं औद्यानिकीय उपज विपणन (विकास एवं विनियमन)
    अधिनियम, 2005 के प्रावधानों व उपनियमों की जानकारी हेतु होर्डिग व बोर्ड लगाए जाए।

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