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स्वास्थ्य

2.50 लाख रूपये वार्षिक आय वाले परिवार चिकित्सा सहायता के लिये पात्र

DR. Ambedkar Medical Aid Scheme

हमीरपुर- एडीसी रूपाली ठाकुर ने जानकारी देते हुए बताया कि डॉ अम्बेदकर मैडिकल ऐड योजना को संशोधित कर दिया गया है। अब इस योजना के तहत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग से संबन्ध रखने वाले व्यक्ति जिनकी वार्षिक पारिवारिक आय 2.50 लाख रूपये तक है वे परिवार इस योजना का लाभ लेने के लिये पात्र हैं।

इस योजना के तहत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के रोगी जो किडनी सर्जरी, हार्ट, लीवर, कैंसर, ब्रेन, जीवन को खतरा करने वाले अन्य गम्भीर रोगों से पीडि़त तथा अंग प्रत्यारोपण और सपाईनल सर्जरी के लिये चिकित्सा सहायता प्रदान की जाती है।

इस योजना के तहत चिकित्सा सहायता प्राप्त करने के लिये निर्धारित प्रपत्र पर आवेदन करना होगा जिसके साथ आय प्रमाण-पत्र, राशन कार्ड और चिकित्सा के लिये संबन्धित अस्पताल के मैडिकल सुपरिन्टैंडैंट द्वारा उपचार के लिये प्रमाणित की गई अनुमानित राशि पत्र साथ लगा कर अपने क्षेत्र के मैडिकल सुपरिन्टेंडेंट को आवेदन करना होगा।

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आईजीएमसी में अमृत फार्मेसी दुकान पर 70 से 90% सब्सिडी पर मिलेगी दवाईयां

Shimla Amrit Pharmacy inaugurated

आईजीएमसी में सुपरस्पेस्लिटी ब्लॉक और कैंसर टर्शरी केन्द्र की आधारशिला रखी गयी

शिमला- मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आईजीएमसी मेडिकल कॉलेज में अमृत स्टोर का शुभारम्भ किया हैं। अमृत स्टोर में अब 90 फीसदी तक दवाईयां सस्ती मिलेगी। सस्ती दवाईयों की दुकान के अंतर्गत इससे प्रदेश के रोगियों को 70 से 90 प्रतिशत उपदान दरों पर दवाईयां उपलब्ध होंगी, जिससे ऐसे रोगियों को भारी राहत मिलेगी, जो कैंसर, हृदय रोग व अन्य के बीमारियों के उपचार के लिए मंहगी दवाईयां खरीदने में असमर्थ हैं।

इससे रोगियों को एक ही छत्त के नीचे सभी दवाईयां खरीदने की सुविधा उपलब्ध होगी और उन्हें अन्य दुकानों पर दवाईयां खरीदने के लिए नहीं जाना पड़ेगा।

इसके अलावा आईजीएमसी परिसर में सुपरस्पेस्लिटी खण्ड की आधारशिला रखी गयी, जिसका चम्याणा में निर्माण किया जाएगा। यह आईजीएमसी का दूसरा परिसर होगा, जिसे 20 हेक्टेयर भूमि पर लगभग 250 करोड़ रुपये की लागत से भारत सरकार व प्रदेश सरकार द्वारा 80ः20 के अन्तर्गत निर्मित किया जाएगा। प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सेवा योजना के अन्तर्गत भारी खर्चे का वहन हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा किया जाएगा

वहीं आईजीएमसी में टर्शरी देखभाल कैंसर केन्द्र की भी आधारशिला भी रखी गयी, जिससे कैंसर पीड़ितों को वर्तमान केन्द्र से विश्व स्तरीय सुविधाएं उपलब्ध होगी, जो अब टर्शरी कैंसर देखभाल केन्द्र के नाम से जाना जाएगा और जो ‘टर्शरी कैंसर देखभाल केन्द्र सुदृढ़ीकरण योजना’ के अन्तर्गत कार्य करेगा।

आईजीएमसी के प्रवक्ता ने बताया कि प्रदेश में प्रति वर्ष लगभग 5000 नए कैंसर मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें से 50 प्रतिशत आईजीएमसी में पंजीकृत होते हैं। लगभग 100 रोगियों की प्रतिदिन रेडियो थैरेपी होती है। इसके अतिरिक्त, 50 रोगी प्रतिदिन कीमोथैरेपी लेते हैं।

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हिमाचल स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न श्रेणियों में 9000 पद खाली, 600 से ज्यादा डाक्टरों की कमी

Over one thousand vacancies in hp health department

हिमाचल में करीब 60 लाख लोगों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी जिस स्वास्थ्य विभाग पर है, उस विभाग का अपना स्वास्थ्य ही खराब है

शिमला- हिमाचल प्रदेश सरकार ने साढ़े चार साल पहले सत्ता में आते ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाने के वादे किए थे। धीरे-धीरे समय गुजरता गया, पर स्वास्थ्य विभाग ज्यों का त्यों बदहाल रहा। लेकिन समय के गुजरने के साथ-2 विभाग की स्तिथि ज्यों का त्यों ही है।

अभी प्रदेश सरकार के पांच साल पूरे होने में थोड़ा समय शेष है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग में सैकड़ों पद खाली हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आखिर अपने वादों पर कितना खरा उतर पाई सरकार। दैनिक समाचार-पत्र में छपी खबर के मुताबिक: हिमाचल में करीब 60 लाख लोगों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी जिस स्वास्थ्य विभाग पर है, उस विभाग का अपना स्वास्थ्य ही खराब है।

दरअसल स्वास्थ्य विभाग में हजारों की संख्या में विभिन्न श्रेणी के पद खाली पड़े हैं, जिसके कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वर्तमान में प्रदेश स्वास्थ्य विभाग के तहत विभिन्न श्रेणी के 22212 पद स्वीकृत हैं और उनमें से नौ हजार 87 पद खाली पड़े हैं। सबसे बड़ी समस्या डाक्टरों की है। डाक्टरों के ही 600 से अधिक पद खाली पड़े हैं। ऐसे में सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं का हाल समझा जा सकता है।

नियमों के मुताबिक पीएससी के लिए एक डाक्टर, एक फार्मासिस्ट और एक सहायक, सीएचसी में चार डाक्टर व एक डेंटल डाक्टर, 50 बेडिड अस्पताल में आठ डाक्टरों व अन्य स्टाफ की व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन अधिकतर अस्पतालों में ये नियम पूरे नहीं होते। वर्ष 2012 में प्रदेश में कुल 1597 डाक्टर थे, लेकिन 2012 से मार्च 2017 तक करीब 500 डाक्टरों के नए पद सृजत किए हैं।

इसके साथ ही विभिन्न श्रेणी के 3248 पद स्वीकृत किए गए हैं। चिकित्सा अधिकारियों के 550 पद भरे हैं और 1250 के करीब स्टाफ नर्सों की भर्ती भी की। इसके बावजूद अभी भी डाक्टरों के 600 से अधिक पद खाली हैं।

प्रदेश में 2706 स्वास्थ्य केंद्र

वर्तमान में प्रदेश मे अलग-अलग श्रेणियों में डाक्टरों के 1897 डाक्टरों के पद हैं। इनमें से करीब 500 डाक्टरों के पद खाली हैं। इसके अलावा पैरामेडिकल स्टाफ की स्थिति भी कुछ खास अच्छी नहीं है। पूरे प्रदेश में वर्तमान में 2706 स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनमें 61 अस्पताल, 80 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 497 पीएचसी और 2068 उपस्वास्थ्य केंद्र हैं। साथ ही 11 ईएसआई औषद्यालय केंद्र भी हैं। प्रदेश में नर्सिंग की स्थिति भी काफी खराब है।

टीएमसी-आईजीएमसी में ये हाल

आईजीएमसी शिमला में 2278 में से 1085 पद और टीएमसी में 1351 में से 524 पद खाली हैं। नाहन में केवल 47 पद भरे हैं, जबकि 1712 पद खाली हैं। चंबा में अभी तक एक पद भरा है और 200 खाली हैं व नेरचौक में 773 पद खाली हैं। हाल ही में नए कालेजों के लिए भी इन अस्पतालों के लिए फैकल्टी शिफ्ट की गई है।इसके कारण इन स्वास्थ्य संस्थानों में स्वास्थ्य सेवाओं पर विपरीत प्रभाव डाला है।

हालांकि विभाग की ओर से प्रदेश ही नहीं, प्रदेश से बाहर भी डाक्टरों की भर्ती के लिए वॉक-इन-इंटरव्यू आयोजित किए गए, लेकिन कोई डाक्टर आने को तैयार नहीं है। वर्तमान में प्रदेश में चिकित्सों के 600 से भी अधिक पद खाली पड़े हैं। पर्याप्त बजट के बाद भी प्रदेश में डाक्टर ढूंढे नहीं मिल रहे हैं।

कई बार डाक्टरों को लगातार 36 घंटों तक ड्यूटी देनी पड़ती है। यही कारण है कि आईजीएसी से डाक्टरी करने के बाद ही कई डाक्टर विदेशों की और रुख कर कर लेते है, तो कई बीच में ही सरकार की नौकरी को छोड़कर अपने क्लीनिक खोल लेते हैं। परिणामस्वरूप राज्य के दूरस्थ क्षेत्र ही नहीं, शिमला में भी हालात खस्ता हैं। प्रदेश के बड़े अस्पताल में ही चिकित्सकों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ के करीब 300 पद खाली पड़े हैं।

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हिमाचल में फिर से स्वाइन फ्लू अलर्ट जारी, विस्तार से जानिए इससे बचने के तरीके

Swine flu awareness in himachal

शिमला- स्वाइन फ्लू एक बार फिर हिमाचल प्रदेश में पांव पसार रहा है।अब तक शिमला में स्वाइन फ्लू से दो मौतें हो चुकी हैं जबकि कई मरीज अपना उपचार करवा रहे हैं। वहीँ शिमला आईजीएमसी एक प्रोफेसर को स्वाइन फ्लू होने का मामला सामने आया है। अब तक आईजीएमसी में स्वाइन फ्लू का 13 मामला आ चुके है। स्वाइन से डरने की कोई जरुरत नहीं है केवल इसके लक्षणों के बारे में जानने और सावधानी बरतने से आप स्वास्थ्य और जागरूक रह सकते हैं। आइए बताते हैं आपको स्वाइन फ्लू से किस तरह से आप खुद को बचा सकते हैं और इसका उपचार करवा सकते हैं ।

जानिए क्या है स्वाइन फ्लू

स्वाइन फ्लू श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारी है। जो ए टाइप के इनफ्लुएंजा वायरस से होती है। स्वाइन फ्लू इनफ्लुएंजा यानी फ्लू वायरस के अपेक्षाकृत नए स्ट्रेन इनफ्लुएंजा वायरस A से होने वाला इनफेक्शन है। इस वायरस को ही एच1 एन1 कहा जाता है। इसके इनफेक्शन ने 2009 और 10 में महामारी का रूप ले लिया था-लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन(WHO) ने 10 अगस्त 2010 में इस महामारी के खत्म होने का भी ऐलान कर दिया था। अप्रैल 2009 में इसे सबसे पहले मैक्सिको में पहचाना गया था। तब इसे स्वाइन फ्लू इसलिए कहा गया था क्योंकि सुअर में फ्लू फैलाने वाले इनफ्लुएंजा वायरस से ये मिलता-जुलता था।

कैसे फैलता है यह फ्लू

जब आप खांसते या छींकते हैं तो हवा में या जमीन पर या जिस भी सतह पर थूक या मुंह और नाक से निकले द्रव कण गिरते हैं, वह वायरस की चपेट में आ जाता है। यह कण हवा के द्वारा या किसी के छूने से दूसरे व्यक्ति के शरीर में मुंह या नाक के जरिए प्रवेश कर जाते हैं। मसलन, दरवाजे, फोन, कीबोर्ड या रिमोट कंट्रोल के जरिए भी यह वायरस फैल सकते हैं, अगर इन चीजों का इस्तेमाल किसी संक्रमित व्यक्ति ने किया हो।

जानिए शुरुआती लक्षण
1 नाक का लगातार बहना, छींक आना, नाक जाम होना।
2 मांसपेशियां में दर्द या अकड़न महसूस करना।
3 सिर में भयानक दर्द।
4 कफ और कोल्ड, लगातार खांसी आना।
5 ठीक से नींद न आना , बहुत ज्यादा थकान महसूस होना।
6बुखार होना, दवा खाने के बाद भी बुखार का लगातार बढ़ना।
7 गले में खराश होना और इसका लगातार बढ़ते जाना।

नॉर्मल फ्लू से कैसे अलग है स्वाइन फ्लू

सामान्य फ्लू और स्वाइन फ्लू के वायरस में एक फर्क होता है। स्वाइन फ्लू के वायरस में चिड़ियों, सूअरों और इंसानों में पाया जाने वाला जेनेटिक मटीरियल भी होता है। सामान्य फ्लू और स्वाइन फ्लू के लक्षण एक जैसे ही होते हैं, लेकिन स्वाइन फ्लू में यह देखा जाता है कि जुकाम बहुत तेज होता है। नाक ज्यादा बहती है। पीसीआर टेस्ट के माध्यम से ही यह पता चलता है कि किसी को स्वाइन फ्लू है। स्वाइन फ्लू होने के पहले 48 घंटों के भीतर इलाज शुरू हो जाना चाहिए।इसका इलाज पांच दिन का इलाज होता है, जिसमें मरीज को टेमीफ्लू दी जाती है।

कब तक और कहाँ एक्टिव रहता है यह वायरस

एच1एन1 वायरस स्टील, प्लास्टिक में 24 से 48 घंटे, कपड़े और पेपर में 8 से 12 घंटे, टिश्यू पेपर में 15 मिनट और हाथों में 30 मिनट तक एक्टिव रहते हैं। इन्हें खत्म करने के लिए डिटर्जेंट, एल्कॉहॉल, ब्लीच या साबुन का इस्तेमाल कर सकते हैं। किसी भी मरीज में बीमारी के लक्षण इन्फेक्शन के बाद 1 से 7 दिन में डिवेलप हो सकते हैं। लक्षण दिखने के 24 घंटे पहले और 8 दिन बाद तक किसी और में वायरस के ट्रांसमिशन का खतरा रहता है।

इलाज के दौरान मरने वालों की संख्या केवल 0.4 फीसदी

इस बीमारी से लड़ने के लिए सबसे जरूरी है दिमाग से डर को निकालना। ज्यादातर मामलों में वायरस के लक्षण कमजोर ही दिखते हैं। जिन लोगों को स्वाइन फ्लू हो भी जाता है, वे इलाज के जरिए सात दिन में ठीक हो जाते हैं। कुछ लोगों को तो अस्पताल में एडमिट भी नहीं होना पड़ता और घर पर ही सामान्य बुखार की दवा और आराम से ठीक हो जाते हैं। कई बार तो यह ठीक भी हो जाता है और मरीज को पता भी नहीं चलता कि उसे स्वाइन फ्लू था। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट बताती है कि जिन लोगों का स्वाइन फ्लू टेस्ट पॉजिटिव आता है, उनमें से इलाज के दौरान मरने वालों की संख्या केवल 0.4 फीसदी ही है। यानी एक हजार लोगों में चार लोग। इनमें भी ज्यादातर केस ऐसे होते हैं, जिनमें पेशंट पहले से ही हार्ट या किसी दूसरी बीमारी की गिरफ्त में होते हैं या फिर उन्हें बहुत देर से इलाज के लिए लाया गया होता है।

स्वाइन फ्लू से बचाव और इसका इलाज,स्वाइन फ्लू न हो इसके लिए क्या करें?

1 साफ-सफाई का ध्यान रखा जाए और फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखते ही सावधानी बरती जाए, तो इस बीमारी के फैलने के चांस न के बराबर हो जाते हैं।

2 जब भी खांसी या छींक आए रूमाल या टिश्यू पेपर यूज करें।

3 इस्तेमाल किए मास्क या टिश्यू पेपर को ढक्कन वाले डस्टबिन में फेंकें।

4 थोड़ी-थोड़ी देर में हाथ को साबुन और पानी से धोते रहें।

5 लोगों से मिलने पर हाथ मिलाने, गले लगने या चूमने से बचें।

6 फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखते ही अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

7 अगर फ्लू के लक्षण नजर आते हैं तो दूसरों से 1 मीटर की दूरी पर रहें।

8 फ्लू के लक्षण दिखने पर घर पर रहें। ऑफिस, बाजार, स्कूल न जाएं।

9 बिना धुले हाथों से आंख, नाक या मुंह छूने से परहेज करें।

यह लोग रहें सावधान
5 साल से कम उम्र के बच्चे, 65 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं। जिन लोगों को इनमे में से कोई बीमारी है, उन्हें अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए:

1 फेफड़ों, किडनी या दिल की बीमारी

2 मस्तिष्क संबंधी (न्यूरोलॉजिकल) बीमारी मसलन, पर्किंसन

3 कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग

4 डायबिटीज

5 ऐसे लोग जिन्हें पिछले 3 साल में कभी भी अस्थमा की शिकायत रही हो या अभी भी हो। ऐसे लोगों को फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखते ही डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

6गर्भवती महिलाओं का प्रतिरोधक तंत्र (इम्यून सिस्टम) शरीर में होने वाले हॉरमोन संबंधी बदलावों के कारण कमजोर होता है। खासतौर पर गर्भावस्था के तीसरे चरण यानी 27वें से 40वें सप्ताह के बीच उन्हें ज्यादा ध्यान रखने की जरूरत है।

लोगों द्वारा अकसर पूछे जाने वाले सवाल

1 अगर किसी को स्वाइन फ्लू है और मैं उसके संपर्क में आया हूं, तो क्या करूं?

सामान्य जिंदगी जीते रहें, जब तक फ्लू के लक्षण नजर नहीं आने लगते। अगर मरीज के संपर्क में आने के 7 दिनों के अंदर आपमें लक्षण दिखते हैं, तो डॉक्टर से सलाह करें।

2 अगर साथ में रहने वाले किसी शख्स को स्वाइन फ्लू है, तो क्या मुझे ऑफिस जाना चाहिए?

हां, आप ऑफिस जा सकते हैं, मगर आपमें फ्लू का कोई लक्षण दिखता है, तो फौरन डॉक्टर को दिखाएं और मास्क का इस्तेमाल करें।

3 स्वाइन फ्लू होने के कितने दिनों बाद मैं ऑफिस या स्कूल जा सकता हूं?

अस्पताल वयस्कों को स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखने पर सामान्यत 5 दिनों तक ऑब्जर्वेशन में रखते हैं। बच्चों के मामले में 7 से 10 दिनों तक इंतजार करने को कहा जाता है। सामान्य परिस्थितियों में व्यक्ति को 7 से 10 दिन तक आराम करना चाहिए, ताकि ठीक से रिकवरी हो सके। जब तक फ्लू के सारे लक्षण खत्म न हो जाएं तब तक काम से दूर रखना ही बेहतर है।

4 क्या किसी को दो बार स्वाइन फ्लू हो सकता है?

जब भी शरीर में किसी वायरस की वजह से कोई बीमारी होती है, शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र उस वायरस के खिलाफ एक प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेता है। जब तक स्वाइन फ्लू के वायरस में कोई ऐसा बदलाव नहीं आता, जो अभी तक नहीं देखा गया, किसी को दो बार स्वाइन फ्लू होने की आशंका नहीं रहती। लेकिन इस वक्त फैले वायरस का स्ट्रेन बदला हुआ है, जिसे हो सकता है शरीर का प्रतिरोधक तंत्र इसे न पहचानें। ऐसे में दोबारा बीमारी होने की आशंका हो सकती है।

आयुर्वेद के जरिये ऐसे करें बचाव

इनमें से एक समय में एक ही उपाय आजमाएं।

1 4-5 तुलसी के पत्ते, 5 ग्राम अदरक, चुटकी भर काली मिर्च पाउडर और इतनी ही हल्दी को एक कप पानी या चाय में उबालकर दिन में दो-तीन बार पिएं।
2 गिलोय (अमृता) बेल की डंडी को पानी में उबाल या छानकर पिएं।

3 गिलोय सत्व दो रत्ती यानी चौथाई ग्राम पौना गिलास पानी के साथ लें।

4 5-6 पत्ते तुलसी और काली मिर्च के 2-3 दाने पीसकर चाय में डालकर दिन में दो-तीन बार पिएं।

5 आधा चम्मच हल्दी पौना गिलास दूध में उबालकर पिएं। आधा चम्मच हल्दी गरम पानी या शहद में मिलाकर भी लिया जा सकता है।
6 आधा चम्मच आंवला पाउडर को आधा कप पानी में मिलाकर दिन में दो बार पिएं। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

स्वाइन फ्लू होने पर क्या करें

यदि स्वाइन फ्लू हो ही जाए तो वैद्य की राय से इनमें से कोई एक उपाय करें

1 त्रिभुवन कीर्ति रस या गोदंती रस या संजीवनी वटी या भूमि आंवला लें। यह सभी एंटी-वायरल हैं।

2 साधारण बुखार होने पर अग्निकुमार रस की दो गोली दिन में तीन बार खाने के बाद लें।

3 बिल्वादि टैब्लेट दो गोली दिन में तीन बार खाने के बाद लें।

होम्योपैथी द्वारा कैसे करें स्वाइन फ्लू से बचाव

फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखने पर इन्फ्लुएंजाइनम-200 की चार-पांच बूंदें, आधी कटोरी पानी में डालकर सुबह-शाम पांच दिन तक लें। इस दवा को बच्चों समेत सभी लोग ले सकते हैं। मगर डॉक्टरों का कहना है कि फ्लू ज्यादा बढ़ने पर यह दवा पर्याप्त कारगर नहीं रहती, इसलिए डॉक्टरों से सलाह कर लें। जिन लोगों को आमतौर पर जल्दी-जल्दी जुकाम खांसी ज्यादा होता है, अगर वे स्वाइन फ्लू से बचना चाहते हैं तो सल्फर 200 लें। इससे इम्यूनिटी बढ़ेगी और स्वाइन फ्लू नहीं होगा।

स्वाइन फ्लू होने पर क्या है इलाज

बीमारी के शुरुआती दौर के लिए

1 जब खांसी-जुकाम व हल्का बुखार महसूस हो रहा हो तब इनमें से कोई एक दवा डॉक्टर की सलाह से ले सकते हैं:
एकोनाइट (Aconite 30), बेलेडोना (Belladona 30), ब्रायोनिया (Bryonia 30), हर्परसल्फर (Hepursuphur 30), रसटॉक्स (Rhus Tox 30), चार-पांच बूंदें, दिन में तीन से चार बार।

2 अगर फ्लू के मरीज को उलटियां आ रही हों और डायरिया भी हो तो नक्स वोमिका (Nux Vomica 30), पल्सेटिला (Pulsatilla 30), इपिकॉक (Ipecac-30) की चार-पांच बूंदें, दिन में तीन से चार बार ले सकते हैं।

3 जब मरीज को सांस की तकलीफ ज्यादा हो और फ्लू के दूसरे लक्षण भी बढ़ रहे हों तो इसे फ्लू की एडवांस्ड स्टेज कहते हैं। इसके लिए आर्सेनिक एल्बम (Arsenic Album 30) की चार-पांच बूंदें, दिन में तीन-चार बार लें। यह दवा अस्पताल में भर्ती व ऐलोपैथिक दवा ले रहे मरीज को भी दे सकते हैं।

योग
शरीर के प्रतिरक्षा और श्वसन तंत्र को मजबूत रखने में योग मददगार साबित होता है। अगर यहां बताए गए आसन किए जाएं, तो फ्लू से पहले से ही बचाव करने में मदद मिलती है। स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले अभ्यास करें।

1 कपालभाति, ताड़ासन, महावीरासन, उत्तानपादासन, पवनमुक्तासन, भुजंगासन, मंडूकासन, अनुलोम-विलोम और उज्जायी प्राणायाम तथा धीरे-धीरे भस्त्रिका प्राणायाम या दीर्घ श्वसन और ध्यान।

2 व्याघ्रासन, यानासन व सुप्तवज्रासन। यह आसन लीवर को मजबूत करके शरीर में ताकत लाते हैं।

आहार

1 घर का ताजा बना खाना खाएं। पानी ज्यादा पिएं।

2 ताजे फल, हरी सब्जियां खाएं।

3 मौसमी, संतरा, आलूबुखारा, गोल्डन सेव, तरबूज और अनार खाएं।

4 सभी तरह की दालें खाई जा सकती हैं।

5 नींबू-पानी, सोडा व शर्बत, दूध, चाय, सभी फलों के जूस, मट्ठा व लस्सी भी ले सकते हैं।

6 बासी खाना और काफी दिनों से फ्रिज में रखी चीजें न खाएं। बाहर के खाने से बचें।

मास्क पहनने की जरूरत

1 मास्क पहनने की जरूरत सिर्फ उन्हें है, जिनमें फ्लू के लक्षण दिखाई दे रहे हों।

2 फ्लू के मरीजों या संदिग्ध मरीजों के संपर्क में आने वाले लोगों को ही मास्क पहनने की सलाह दी जाती है।

3 भीड़ भरी जगहों मसलन, सिनेमा हॉल या बाजार जाने से पहले सावधानी के लिए मास्क पहन सकते हैं।

4 मरीजों की देखभाल करने वाले डॉक्टर, नर्स और हॉस्पिटल में काम करने वाला दूसरा स्टाफ।

5 एयरकंडीशंड ट्रेनों या बसों में सफर करने वाले लोगों को ऐहतियातन मास्क पहन लेना चाहिए।

कितनी देर काम करता है मास्क

1 स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए सामान्य मास्क कारगर नहीं होता, लेकिन थ्री लेयर सर्जिकल मास्क को चार घंटे तक और एन-95 मास्क को आठ घंटे तक लगाकर रख सकते हैं।

2 ट्रिपल लेयर सजिर्कल मास्क लगाने से वायरस से 70 से 80% तक बचाव रहता है और एन-95 से 95% तक बचाव संभव है।

3 वायरस से बचाव में मास्क तभी कारगर होगा जब उसे सही ढंग से पहना जाए। जब भी मास्क पहनें, तब ऐसे बांधें कि मुंह और नाक पूरी तरह से ढक जाएं क्योंकि वायरस साइड से भी अटैक कर सकते हैं।

4 एक मास्क चार से छह घंटे से ज्यादा देर तक न इस्तेमाल करें, क्योंकि खुद की सांस से भी मास्क खराब हो जाता है।

5सिर्फ ट्रिपल लेयर और एन 95 मास्क ही वायरस से बचाव में कारगर हैं।

6 सिंगल लेयर मास्क की 20 परतें लगाकर भी बचाव नहीं हो सकता।

7 मास्क न मिले तो मलमल के साफ कपड़े की चार तहें बनाकर उसे नाक और मुंह पर बांधें। सस्ता व सुलभ साधन है। इसे धोकर दोबारा भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

ध्यान रखने की बात

1जब तक आपके आस-पास कोई मरीज या संदिग्ध मरीज नहीं है, तब तक मास्क न लगाएं।

2 अगर मास्क को सही तरीके से नष्ट न किया जाए या उसका इस्तेमाल एक से ज्यादा बार किया जाए तो स्वाइन फ्लू फैलने का खतरा और ज्यादा होता है।

3 खांसी या जुकाम होने पर मास्क जरूर पहनें।

4 मास्क को बहुत ज्यादा टाइट पहनने से यह थूक के कारण गीला हो सकता है।

5 अगर यात्रा के दौरान लोग मास्क पहनना चाहें तो यह सुनिश्चित कर लें कि मास्क एकदम सूखा हो। अपने मास्क को बैग में रखें और अधिकतम चार बार यूज करने के बाद इसे बदल दें।

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शिमला-भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने भारतीय संविधान के अनुछेद 370 को हटाने के कदम को जम्मू कश्मीर की जनता के...

CM Jairam Thakur and BJP Welcomes Move to Scrap Article 370 CM Jairam Thakur and BJP Welcomes Move to Scrap Article 370
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अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के निर्णय से जम्मू और कश्मीर के सामाजिक एवं आर्थिक जन-जीवन तथा विकास पर पड़ेगा सकारात्मक प्रभाव: मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर व हिमाचल बीजेपी

शिमला-मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने भारत सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के निर्णय को ऐतिहासिक बताया है जिससे...

HPU ABVP Celebrats Article 370 HPU ABVP Celebrats Article 370
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अनुच्छेद 370 के हटने से जम्मू कश्मीर की अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़े वर्ग तथा अल्पसंख्यकों को मिलेगा आरक्षण का लाभ:ऐबीवीपी

शिमला-अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद राष्ट्रपति आदेश द्वारा जम्मू कश्मीर से स्थाई अनुच्छेद 370 को हटाने के ऐतिहासिक कदम का स्वागत...

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