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अब शी-बॉक्स के जरिये कामकाज़ी महिलायें ऑनलाइन कर सकती हैं यौन उत्पीडन की शिकायात 

She box for online complaint

विश्व स्तर पर चलाए जा रहे सोशल मीडिया के अभियान #MeToo को देखते हुए यह महिला और बाल विकास मंत्रालय का सकारात्मक कदम है जिसमें महिलाएं यौन उत्पीड़न और उत्पीड़न झेलने के अपने अनुभव साझा करती हैं।

 नई दिल्ली: महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने 7 नवम्बर को सरकारी और निजी संगठनों में कार्यरत महिलाओं के लिए कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज करवाने के वास्ते व्यापक शी-बॉक्स (She Box) ऑनलाइन शिकायत प्रबंधन प्रणाली का शुभारंभ किया।

यह कदम कार्यस्थल पर महिला यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए आज नई दिल्ली में  लिया गया।

नए शी-बॉक्स पोर्टल पर सरकारी और निजी कर्मचारियों सहित देश की सभी महिला कर्मियों के लिए कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की सुविधा है। यौन उत्पीड़न अधिनियम के अंतर्गत गठित संबंधित आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) या स्थानीय शिकायत समिति (एलसीसी) में पहले से ही लिखित शिकायत दर्ज करवाने वाली महिलाएं भी इस पोर्टल के जरिए अपनी शिकायत दर्ज करवा सकती हैं।

पोर्टल इस लिंक पर उपलब्ध है (http://shebox.nic.in/)

मेनका गांधी ने आश्वासन दिया कि मंत्रालय इन शिकायतों की निगरानी करेगा।

शी-बॉक्स पोर्टल कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न झेल रही महिलाओं की शिकायतों का निवारण उपलब्ध करवाने का एक प्रयास है। पोर्टल पर शिकायत दर्ज करवाने पर यह सीधे संबंधित नियोक्ता की आईसीसी/एलसीसी को भेज दी जाएगी। इस पोर्टल के जरिए मंत्रालय के साथ ही शिकायतकर्ता भी आईसीसी/एलसीसी द्वारा की जा रही जांच की प्रगति की निगरानी कर सकती हैं।

विश्व स्तर पर चलाए जा रहे सोशल मीडिया के अभियान #MeToo को देखते हुए यह महिला और बाल विकास मंत्रालय का सकारात्मक कदम है जिसमें महिलाएं यौन उत्पीड़न और उत्पीड़न झेलने के अपने अनुभव साझा करती हैं।

बॉक्स का उपयोग करने वालों के लिए समय-सीमा के भीतर प्रतिक्रिया मिलने के आश्वासन के साथ इस पोर्टल के जरिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय से बातचीत करने का भी विकल्प है।

कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के मुद्दे पर प्रशिक्षण/कार्यशालाएं आयोजित करने के लिए मंत्रालय द्वारा सूची में सम्मिलित किए गए 112 संस्थानों की जानकारी भी इस पोर्टल पर उपलब्ध है। विभिन्न संगठनों में इस विषय पर प्रशिक्षण में योगदान देने के इच्छुक व्यक्तियों और संस्थानों के लिए अपने आवेदन जमा कराने के भी विकल्प हैं। शी

-बॉक्स इन सूची में शामिल संस्थानों/संगठनों को अपने क्षमता निर्माण गतिविधियों को मंत्रालय के साथ साझा करने के लिए मंच उपलब्ध कराएगा। जिससे देश भर के सूची में शामिल इन संस्थाओं/संगठनों की गतिविधियों की निगरानी की जा सकेगी।

मंत्रालय ने यौन उत्पीड़न अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी प्रदान करने के लिए इस अधिनियम पर पुस्तिका और प्रशिक्षण निर्देशिका भी प्रकाशित की है, ताकि इनका व्यावहारिक रूप में आसानी से इस्तेमाल किया जा सके। निजी संगठनों को अपने सेवा नियमों तथा निर्दिष्ट अनुशानात्मक प्रक्रियाओं के अनुरूप प्रशिक्षण निर्देशिका को रूचिकर बनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।

 

 

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10 कार्यकर्ताओं के निष्कासन पर ऐबीवीपी का धरना प्रदर्शन,विश्वविद्यालय पर एक तरफा कार्यवाही का लगाया आरोप

ABVP Protest at HPU over suspension of members 2

शिमला– आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इकाई ने विश्वविद्यालय में पिंक पेटल्स चौक पर धरना प्रदर्शन किया । इकाई सचिव अंकित चंदेल ने जानकारी देते हुए बताया की पिछले कल विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से एक तनशाही फैसला निकाला गया जिसमें 10 ऐबीवीपी कार्यकर्ताओं को विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया गया।

गौरतलव है की पिछले 11 जुलाई को विद्यार्थी परिषद ने कैम्पस मे धरना प्रदर्शन किया था जिसके चलते 10 छात्रों का निष्काशन कर दिया है।

ABVP Protest at HPU over suspension of members 3

धरने को संबोधित करते हुए इकाई सचिव अंकित चन्देल ने बताया की एक तरफ जब कर्मचारियों द्वारा कुलपति कार्यालय में नारेबाजी की जाती है तो उन कर्मचारियों क खिलाफ कुलपति साहब की कोई प्रतिक्रिया नही आती, परन्तु जब ऐबीवीपी कैम्प्स में धरना प्रदर्शन करते है तो उन्हें तुरन्त प्रभाव से निष्कासित कर दिया जाता है जोकि सरासर एकतरफा कार्यवाही है।

चन्देल ने कहा कि विश्वविद्यालय अपनी कमियों को छुपाने क लिए तरह-2 के हथकण्डे अपना रहा है। जहाँ अधूरे परिणामों की वजह से प्रदेश भर के छात्र परेशानी में हैं वहीँ प्रशासन अपने मुंह मिया मिठु बनने में कोई कसर नही छोड़ता।

ABVP Protest at HPU over suspension of members

चन्देल ने कहा कि सभी को ज्ञात है विवि में नौ महीने में पीएचडी (P.hD) और एमसीऐ (MCA) में फर्जी तरीके से प्रवेश के मामले सामने आते है, और इन सभी गडवड़ियों के विरोध करने वाले छात्र संगठनों की आवाज को दबाने का प्रयास विश्वविद्यालय प्रशासन् कर रहा है।

धरने क माध्यम से प्रशासन को चेताते हुये परिषद ने मांग उठाई विश्वविद्यालय अपना काम करे न कि छात्र संगठनों के कार्य मे दखल दे। ऐबीवीपी ने चेतावनी दी है कि जल्द से जल्द परिषद कार्यकर्ताओं का निष्कासन् वापिस नही करता है तो प्रदेश स्तरीय आंदोलन करने में कोई गूरेज़ नही होगाI ऐबीवीपी ने साथ ही यूजी UG के सभी परीक्षा परणामों को पूरा करने की मांग भी प्रशासन के सामने रखी है।

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सेब के सर्मथन मुल्य में मात्र 50 पैसे बढ़ौतरी बागवानों से भद्दा मजाकः राठौर

Apple proccurement support price in Himachal PRadesh

शिमला -हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा सेब के सर्मथन मुल्य में की गई मात्र 50 पैसे की बढ़ौतरी को बागवानों के साथ किया गया भद्दा मजाक करार दिया है।

आज शिमला से जारी प्रेस वयान में कुलदीप सिंह राठौर ने बताया कि वर्तमान समय में जब बागवानों को अपनी फसल तैयार करने के लिए भारी मंहगाई का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि जी.एस.टी के चलते सेब से संबंधित पैकिंग से लेकर फफूंद नाशक दवाईयां एवं अपनी फसलों को मंण्ड़ियों तक पहुॅचाने के लिए किराया भी कई गुणा बढ़ गया है इसके चलते सेब के सर्मथन मुल्य कम से कम 10 रूपये होना चाहिए।

कुलदीप राठौर ने कहा कि सेब इलाकों में बहुत जगह सड़कों की हालत खराब पड़ी है और सेब को मण्ड़ियों तक पहुॅचाने वाले ट्रक व गाड़ियों के मालिक खराव सडकों पर गाडियाॅं भेजने को मना कर रहे हैं इसलिए सरकार को चाहिए कि ख़राब सडकों को जल्दी से जल्दी ठीक करवायें।

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हिमाचल सरकार पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे : कर्मचारी नेता

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शिमला -हिमाचल प्रदेश कर्मचारी महासंघ के पूर्व अध्यक्ष सुरेन्द्र मनकोटिया, पूर्व सयुक्त सचिव सेन राम नेगी,पूर्व प्रेस सचिव हरीश गुलेरिया, गैर शिक्षक महासंघ के महासचिव दीप राम शर्मा ,इंदिरागांधी आयुर्विज्ञान मेडिकल कॉलेज के पूर्व महासचिव आत्मा राम शर्मा ने प्रदेश सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद करने के निर्णय की आलोचना करते हुए इसे कर्मचारी विरोधी बताया है।

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि जब जब प्रदेश में भाजपा सरकार सत्ता में आई तब तब प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद किया गया,जो कि कर्मचारियों के साथ अन्याय है।

कर्मचारी नेताओं ने जयराम सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि भाजपा कभी भी कर्मचारी हितेषी नही रही है।पूर्व में धूमल सरकार ने भी सत्ता में आते ही इसे बंद किया था अब बर्तमान में जयराम सरकार ने भी ऐसा ही किया है।उनका कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रख कर इसे खोला था।इसे खोलने का एक ही उद्देश्य था कि जो सरकार के किसी भी गलत फैंसले को चुनौती देने के लिए स्वतंत्र था और उसे जल्द और सस्ता न्याय मिल जाता था।

नेताओं का कहना है कि अब ऐसा नही होगा।किसी भी कर्मचारी को न्याय के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना होगा जहां पहले ही हजारों मामले सुनवाई के लिए लंबित पड़े है।

कर्मचारी नेताओं ने मुख्यमंत्री जयराम से आग्रह किया है कि वह इस मामले पर पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे। इसे उन्हें अपनी किसी भी प्रतिष्ठा का प्रश्न नही बनना चाहिए।

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