कोटखाई केस: हाईकोर्ट ने पुलिस एसआईटी को बंद लिफाफे में एफिडेविट जमा करने के दिए आदेश, 24 अगस्त को होगी सुनवाई

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Kotkhai rape and murder case CBI Team

शिमला- गुड़िया मामले में हाईकोर्ट में आज पुलिस अधिकारी पेश हुए। कोर्ट में ने पुलिस कर्मियों व अधिकारियों को बंद लिफाफे में एफिडेविट जमा करने के आदेश दिए हैं। इस मामले की सुनवाई अब 24 अगस्त को होगी। मुख्य कार्यकारी न्यायधीश संजय करोल व न्यायाधीश  संदीप शर्मा की डबल बैंच ने गुड़िया मामले में कोर्ट में पेश हुए सभी अधिकारियों को एफिडेविट जमा करवाने के आदेश दिए।

जाहिर है कि कोर्ट ने तत्कालीन एसआईटी प्रमुख आईजी जहूर जैदी, एसआईटी सदस्य एएसपी भजन देव नेगी, डीएसपी रतन सिंह नेगी, डीएसपी ठियोग मनोज जोशी, सब इंस्पेक्टर धर्मसेन नेगी, एएसआई राजीव कुमार, पुलिस स्टेशन कोटखाई के पूर्व एसएचओ राजिंद्र सिंह और एएसआई दीप चंद को आज भी कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए थे, जिसके चलते ये सभी कोर्ट में पेश हुए। 

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चित्र: अमर उजाला

इसके अलावा कोर्ट ने गत दिवस गुड़िया मामले से जुड़े हिरासत में हत्याकांड की सीबीआई को  जांच को दो हफ्ते में पूरा करने के आदेश भी दिए थे। 

सीबीआई ने मांगा था चार हफ्ते काऔर वक्त

सीबीआई के वकील अंशुल बंसल ने उच्च न्यायालय से मामले की जांच के लिए चार हफ्ते का समय और मांगा था, मगर अदालत ने जांच एजेंसी की मांग को अस्वीकार करते हुए केवल दो हफ्ते का ही समय दिया। सीबीआई द्वारा अतिरिक्त स्टेटस रिपोर्ट को अब भी सार्वजनिक नहीं किया गया।

यह है प्रतिवादी बनी एसआईटी

आईजी जहूर जैदी, एएसपी भजन देव नेगी, डीएसपी ठियोग मनोज जोशी और कोटखाई इंचार्ज एसआई राजिंद्र सिंह एसआईटी में शामिल थे, जिन्हें हाई कोर्ट ने अब निजी तौर पर प्रतिवादी बनाया है।अदालत का आदेश है कि इन्हें प्रतिवादी बनाया जाना इसलिए जरूरी है, ताकि यह पता लग सके कि एसआईटी की 13 दिन की जांच में क्या-क्या हुआ।

सीबीआई पर भी हाई कोर्ट तल्ख

हाई कोर्ट ने सीबीआई की कार्यप्रणाली पर भी कड़ी टिप्पणी करते हुए एसपी सीबीआई को आदेश दिए कि वह शपथ पत्र के माध्यम से अदालत को बताएं कि किस आधार पर 22 जुलाई को प्राथमिकी दर्ज की।

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चित्र: दिव्य हिमाचल

सीबीआई को पुलिस द्वारा दर्ज की गई दोनों प्राथमिकी की जांच करने का जिम्मा दिया गया था, लेकिन उसने अलग से प्राथमिकी दर्ज की।

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