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भाजपा ने डीसी शिमला को सौंपी अपनी चार्ज शीट,पढ़िए कांग्रेस और सीपीआईएम पर लगाए क्या क्या आरोप

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हिमाचल प्रदेश विशेष रूप से जिसकी राजधानी शिमला है पिछले पांच वर्षो से एक भ्रष्ट सरकार को झेल रही है:भाजपा

शिमला- शिमला भाजपा ने आज डीसी शिमला को कम्युनिस्ट पार्टी और कांग्रेस सरकर पर लगाए आरोपों की अपनी चार्ज शीट सौंपी। भाजपा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की राजधानी तथा अन्तर्राष्ट्रीय ख्याती प्राप्त प्रर्यटन नगरी शिमला को कम्युनिस्ट तथा भ्रष्ट कोंग्रेसी सरकार दोनों ने मिलकर शिमला शहर को तबाह करने में कोई कसर नहीं छोडी है।

भाजपा ने यह भी कहा कि प्रदेश में इस भ्रष्ट सरकार के राज में कार्यरत सभी गतिविधियों का अड्डा शिमला बन गया है तथा कम्युनिष्टों ने शिमला नगर-निगम क्षेत्र को स्लम बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है जो शिमला सफाई तथा पर्यटन नगरी के रूप में विश्व विख्यात था आज पूरा शहर सफाई के क्षेत्र में 47वें स्थान पर पहंच गया है तथा पर्यटन में भी पिछड़ा जा रहा है।

भाजपा शिमला मण्डल ने कहा कि उनका मानना है कि कांग्रेस सरकार तथा नगर-निगम शिमला पिछले 5 वर्षों में शिमला शहर के विकास तथा जनता की समस्याएं सुलझाने तथा मूल-भूत सुविधाएं देने में असफल रही हैं तथा मेयर व डिप्टी मेयर शहर की समस्याओं का समाधान करने के स्थान पर विदेशी दौरों पर मोज-मस्ती करते रहे।

पढ़िए क्या आरोप लगाए भाजपा ने नगर निगम शिमला पर

1. पिछले पांच वर्षाें मे कम्युनिष्टों तथा काग्रेंस सरकार शिमला की जनता को पीने का पानी देने में असफल रही है। निगम के मेयर व डिप्टी मेयर द्वारा 24×7 समय शहर की जनता को पानी देने का वायदा किया था जो झूठा साबित हुआ है। आज शहर की जनता को महीने में 7 दिन पानी मिलता है तथा पानी का बिल पूरे महीने का लिया जाता है आज भी शिमला की जनता बूंद-बूंद पानी के लिये तरस रही है क्या ये कांग्रेसी सरकार व कम्युनिष्टों की वायदा खिलाफी नहीं है? क्या ये शिमला की जनता से धोखा- धडी नहीं है?

2. कम्युनिष्टों और कांग्रेसियों की सरकार जनता को बूंद-बूंद पानी को तरसा रही है। अब जनता से सिवरेज सैस के नाम पर भी अवैध वसूली की जा रही है।

3.शिमला के सभी सिवरेज ट्रिटमेन्ट प्लाॅट भ्रष्टाचार के अड्डे बने हुए है ठेकेदारों के साथ मिलकर भ्रष्टाचार हो रहा है। सिवरेज ट्रिटमेंट प्लाॅट जहाँ पानी में गन्दगी फैला रहा है वहीं पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचा रहा है।

4.शिमला शहर की जनता को काग्रेंस सरकार व कम्युनिष्टों की मिली भगत से मल-मूत्र मिला पानी पिलाया गया। जिसके कारण 32 लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पडा तथा हज़ारों लोग पीलिया रोग से ग्रस्त हुए जो कि एक लापरवाही ही नहीं एक भयंकर अपराध है जिसके लिए दोषियों को दण्डित किया जाना चाहिए।

5.शिमला नगर-निगम के मेयर व डिप्टी मेयर डिंडोरा पिटते थकते नहीं थे कि वो यूनिट-ऐरिया मैथड़ शिमला में लागू नहीं होने दंेगे जबकि सत्ता में आने के बाद इस प्रणाली को लागू करके टैक्स का बोझ जनता पर ड़ाल दिया।

6.शिमला एक पर्यटन नगरी है उसके व्यवसाय पर विभिन्न प्रकार के टैक्स थोंप कर समाप्त करने का प्रयास कांग्रेस व कम्युनिस्टों का गठजोड़ कर रहा है ग्रीन टैक्स के नाम पर प्रर्यटकों के लिए कोई सुविधा दिए बिना वसूली की जा रही है।

7. कम्युनिस्ट जब से नगर निगम की सत्ता पर काबिज हुए है तब सें प्रदेश के बाहर से आने वाले लोग अवैध रूप सेबाज़ारों में बैठ रहे हैं जिससे बाजार व गलियां संकरी होती जा रही है व शहर की जनता को परेशानी हो रही है।

8.क्म्युनिष्टों व कांग्रेस सरकार के गठजोड़ के कारण शिमला मे अवैध, निर्माण तीव्र गति से बढा़ है जिसका मुख्य कारण भ्रष्टाचार है।

9.शिमला मे भरयाल कुड़ा संयंत्र से एक ठेकेदार भाग गया तथा अब दूसरी कंपनी को काम सौंपा गया है। इस कुड़ा संयंत्र के निर्माण व कार्य की उच्च स्तरीय जांच की जानी चाहिए।

10.शिमला के हाॅलीलाॅज को जाने वाली सड़क को चौड़ा करने के लिए जबरदस्ती निजी भूमि लेने के लिए अधिकारियो द्वारा दबाव डाला जा रहा है तथा तथा जोधा निगम स्थित पार्किंग के साथ खड़े हरे पेडों को काटने की अनुमति नगर निगम व सरकार द्वारा किस आधार पर दी गई। जबकि वर्ष 2003 में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने वन व पेडो को काटने से रोकने हेतु नगर निगम की पार्किंग की ऊपरी मंजिल के निर्माण को रोक दिया था। इसी प्रकार हाॅलीलाॅज में गैस्टहाउस के निर्माण के लिए नगर निगम व सरकार द्वारा ही पेड़ को काटने की अनुमति प्रदान कर अपराध किया गया

11.एशियन विकास बैंक के सहयोग से मालरोड़ क्षेत्र के सौदर्यकरण परियोजना को बदला जा रहा है हरियाली के स्थान पर कंकरीट की दिवारें बनाई जा रही है अनारकली के जंगलो को बदल कर घटिया लोहे के जंगले लगाए जा रहे हैं । मालरोड़ के दोनों तरफ पत्थर बिछा कर सड़क को संकरा किया जा रहा है। वर्षा शालिकाओं को हैरीटेज़ की अनदेखी की जा रही है तथा निर्माण कार्यो मे भारी भ्रष्टाचार हो रहा है।

12.सारे शहर का विकास कार्य ठप पड़ा है तथा एक क्षेत्र के सौंदर्यकरण के नाम पर भ्रष्टाचार हो रहा है।

13.ए.डी.वी. का पैसा भारी भरकम पैमाने पर व्यय किया जा रहा है तथा लाखों रूपया खर्च करके हिमाचल से बाहर की वस्तुओं को भारी भरकम मानदेय व वेतन पर नियुक्त किया गया।

14.सैहब सोसाइटी द्वारा जो पैसा इक्ट्ठा किया जा रहा है जिसका दुरूपयोग किया जा रहा है। अगर नगर-निगम निचले स्तर पर सफाई कर्मचारियों की भर्ती करे तो लोगो को रोजगार भी मिलेगा।

15.स्मार्ट सिटी जो कि शिमला शहर को मिलनी थी लेकिन कम्युनिष्ट और वर्तमान काग्रेंस सरकार की मिली भगत से स्र्माट सिटी को शिमला शहर से वंचित रखा गया। शहर को स्र्माट सिटी से वंचित रखने के लिए वामपंथियों व सरकार ने शिमला शहर को मिले अंको के साथ छेड़-छाड़ कर धर्मशाला को स्र्माट सिटी बना डाला।

16.केंद्र सरकार द्वारा जो अमृत मिशन में करोड़ों रूपया दिया जा रहा है जिसका कम्युनिस्ट व काग्रेंस द्वारा दुरूपयोग किया जा रहा है। जबकि यह पैसा शहर के विकास के लिए दिया था।

17.एसआरएल (SRL) लैब को फायदा पहुंचाने के लिए टेस्टिंग का काम आउटसोर्स किया गया निजी लैब में टेस्ट के दाम बार-बार बढाये जा रहे है तथा हाॅस्पिटल का बडा भाग इनको सौंपा गया है टेस्टिंग व व आउटसोर्स के माध्यम से अपने चहिते कर्मचारियों को नौकरियां दी जाती है और उनका वेतन सामान्य वेतन से 30 प्रतिशत अधिक होता है। डीडीयू में पूर्व भाजपा सरकार द्वारा नये भवन निर्माण कार्य प्रारम्भ किया गया था लेकिन कांग्रेस सरकार ने अपनी पट्टिका लगाने के लिये अधूरे हस्पताल का उद्घाटन कर दिया। अस्पतालों में सफाई व डाइट के ठेके देने मे भाई-भतीजा वाद किया जा रहा है तथा बिना टैंडरों के अपने चहेतों को काम दिया जा रहा है।

परिवहन

1. जेएनएनयूआरएम(Jnnurm) के अंतर्गत 800 बसों की खरीद की गई जिसमे 300 करोड़ भारत सरकार से प्राप्त हुआ था। इन बसों की बाॅडी आदि बनाने में बडा घोटाला हुआ है। ये बसें Jnnurm के तहत शिमला शहर में चलाई जानी थी लेकिन ये बसें शिमला की सड़कों मे चलने लायक नहीं है लम्बी बसों के कारण शिमला में आए दिन जाम लगता है तथा शिमला शहर के सभी भागों में यह बस नहीं चलाई जा सकती है जिसके कारण जनता को काफी परेशानियों का सामना करना पड रहा है।

2. नौकरियां कॉर्पोरेट केयर (Corporate Care) नाम की संस्था द्वारा आउटसोर्स कर के दी गई हैं जिससे एक भी विशेषयज्ञों से 52000/- पर हस्ताक्षर लिये जाते है तथा उसे केवल 25000/- रूपये दिया जाता है 22 करोड से अधिक वेतन आदि पर खर्च किया गया है।

3. क्राइस्ट चर्च व कैथोलिक चर्च के सौन्दर्याकरण के नाम पर भी करोडों रूपये खर्च किये जा रहे हैं। जिसके लिए कॉर्पोरेट केयर आउटसोर्स (Corporate Care Outsource) कम्पनी द्वारा नियुक्त करवाए गए सलाहकारों को लाखों रूपया दिया जा रहा है।

4. टाउन हाॅल की रैनोवेशन के नाम पर मामूली बदलाव के नाम पर करोडों रूपये खर्च किये जा रहे है। शहर में सभी सुविधाओं टेलीफोन, बिजली, पानी की लाईनों को एक साथ रखने के लिए डक्ट का निर्माण किया जाना था जिसे सौन्दर्यकरण परियोजना से हटा दिया गया। नगर निगम शिमला के अनेकों स्थानों पर एस्कलेटरो का निर्माण इस योजना के अंर्तगत किया जाना था अपितु अभी तक इस कार्य पर कोई काम नहीं हुआ और इसको परियोजना से रद्द कर दिया गया है। इस योजना की डी.पी.आर. तैयार करने के लिए करोडों रूपये का खर्चा आया जोकि व्यर्थ हो गया। इसकी जांच होनी चाहिए।

बिजली (विद्युत)

1.सरकार द्वारा शिमला में जबरदस्ती विद्युत विभाग द्वारा बिना किसी शिकायत से पुराने मिटर जो बढ़िया काम कर रहे थे। उन मीटरों को बदल कर नए घटिया मिटर लगा दिए गए जिन्हे लगाने से भारी घोटाला हुआ है।

2.हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री अपने चहेते शहरी विकास मंत्री के प्रेम में इतने मदहोश हो गए हैं कि 68 लाख की आबादी वाले छोटे से प्रदेश में दुसरी राजधानी बनाने की घोषणा करके शिमला के महत्व को कम कर रहे हैं।

3.हिमाचल सरकार व नगर निगम शिमला की कार्य प्रणाली का नमुना इस वर्ष जनवरी माह में देखा। जब एक रात बर्फ गिरने के बाद शहर 7 दिन तक बिजली और पानी से महरूम रहा तथा नगर निगम के रास्तों को चलने के लायक बनाने मे भी 15 दिन लग गए।

भाजपा शिमला मण्डल ने आरोप लगते हुए कहा है कि हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार प्रदेश चुनाव आयोग तथा नगर निगम के मेयर, डिप्टी मेयर अपनी असफलताओं को छुपाने के लिए लोकतन्त्र की हत्या कर रहें है तथा नगर निगम का चुनाव न करवाकर संविधान का उल्लंघन कर रहें हैं। भाजपा ने कहा कि व राज्यपाल से विन्रम निवेदन करते है कि उपरोक्त तथ्यों को ध्यान मे रखकर प्रदेश सरकार को भंग करने की सिफारीश करें, चुनाव आयोगों को बरर्खास्त करें और आरोपो की जांच उच्च जांच एजेंसी से करवाकर कार्यवाही करने के आदेश दें।

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ऐबीवीपी ने यूजी परीक्षा परिणाम मे हो रही देरी और अनियमिताओं को लेकर किया कुलसचिव का घेराव

ABVP Protest

शिमला-वीरवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद विश्वविद्यालय इकाई ने यूजी (UG ) के परीक्षा परिणाम मे हो रही देरी और अनियमिताओं को लेकर कुलसचिव का घेराव किया व उनके आफिस के बाहर धरना-प्रदर्शन किया!

ABVP protest for ug results

विद्यार्थी परिषद ने निम्न मांगो को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन को कल शाम तक का समय दिया था:

  • यूजी 6th सेमेस्टर का पूरा परीक्षा परिणाम घोषित किया जाए! छात्रों के परीक्षा परिणामों में आ रही डबल स्टार की दिक्कत को शीघ्र ठीक किया जाए!
  • यूजी 2nd और 4th सेमेस्टर का री-आप्पीयर (Re-appear ) परीक्षा परिणाम शीघ्र घोषित किया जाए!
  •  एचपीयू काउंसलिंग में अपीयर छात्रों को अपने रिजल्ट ठीक कराने की तिथि को 20 जुलाई तक किया जाए!
  •  एचपीयू के अलावा दूसरे विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने वाले छात्रों को कॉन्फिडेंशियल रिजल्ट दिया जाए ताकि वह छात्र दूसरे विश्वविद्यालय में ऐडमिशन ले सकें!
  •  यूजी 3rd सेमेस्टर गणित के रिजल्ट को फिर से ईवैलुएट किया जाए!

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद विश्वविद्यालय इकाई ने कहा है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की नाकामियों के कारण हिमाचल के हजारों छात्र हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय और देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेने से वंचित रह रहे है! विद्यार्थी परिषद ने कहा है कि अगर इन सभी मांगों को शीघ्र पूरा नहीं किया गया तो विद्यार्थी पर अपना आंदोलन विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ और तेज करेगी!

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हिमाचल परिवहन की खस्ताहाल बसें, कर्मियों की कमी, पूर्व सूचना बिना रूटों का बंद करना लोगों के लिए बन रहा आफत

Poor HRTC Bus Conditions and Services

शिमला- 20 जून को बंजार में और हाल ही की 1 जुलाई को खलिनी के पास झिंझिडी में हुए दो हालिया बस हादसों ने न केवल सरकार की सुरक्षित आवागमन प्रदान करने में असमर्थता को उजागर किया है, बल्कि इन दुर्घटनाओं के पीछे के वास्तविक कारण की पहचान करने के लिए इसका मायोपिक (नाकाफी) दृष्टिकोण भी बताया है। यह कहना है ठियोग विधानसभा क्षेत्र के विधायक और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के वरिष्ठ नेता राकेश सिंघा का।

सिंघा ने प्रबंध निदेशक, हिमाचल सड़क परिवहन निगम, के माध्यम से एक ज्ञापन सौंप कर 11 जुलाई से पहले आवश्यक मुद्दों के तहत एक बैठक बुलाने के लिए सरकार को नोटिस भेजा है।

इस ज्ञापन में कहा गया है कि पूरे राज्य में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या में हो रही वृद्धि और बस सेवाओं की संख्या में निरंतर में भारी अंतर है। इस अंतर को दूर करने के लिए निर्मित और स्वीकृत सड़कों पर न केवल अतिरिक्त बसें चलाने की आवश्यकता होती है बल्कि आवागमन के वर्तमान सार्वजनिक और निजी मोड को कुशलतापूर्वक और सुरक्षित रूप से चलाने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की भी आवश्यकता होती है।

सिंघा ने कहा कि इस ज्ञापन का मसौदा तैयार करते समय, पूरे राज्य के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन अगर शिमला जिले के परिवहन डिपो में से कुछ में कर्मियों की चल रही कमी की जांच की जाती है, तो यह राज्य में मौजूद गंभीर स्थिति के बारे में वैश्विक दृष्टिकोण पेश करेगा।

हिमाचल प्रदेश के शिमला लोकल डिपो में अभी 240 बसें ही चल पा रही है जबकि शिमला लोकल डिपो के तहत 283 स्वीकृत बस रूट हैं, 111 चालक और 98 परिचालक कम हैं और कर्मचारियों की अत्यधिक कमी को देखते हुए 12 मार्गों को स्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया है। तारादेवी डिपो के तहत ड्राइवरों की कमी 55 है और कंडक्टरों का आंकड़ा 65 पर है।

सिंघा ने ज्ञापन में कहा कि रोहड़ू डिपो में स्थिति समान रूप से दयनीय है, जहां 24 बसें शून्य मान बुक में हैं यानी तय दूरी चल चुकी है और अब और चलने की स्थिति में नही है और इन बसों को एच आर टी सी सड़को पर दौड़ा रहा है जबकि इन बसों को कबाड़खाने में होना चाहिए था। इस डिपो के तहत 16 बसें 9 साल से अधिक पुरानी हैं और अभी भी चल रही हैं और हर कोई जानता है कि राज्य के अंदरूनी हिस्सों में सड़कों की स्थिति क्या है। इसके अलावा ड्राइवरों की कमी का आंकड़ा 49 है और परिचालकों की 46 है।

रामपुर डिपो के तहत जीरो वैल्यू बुक बसों की संख्या 11 है और ड्राइवरों और कंडक्टरों की कमी क्रमशः 60 और 42 है।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परिवहन की इस तरह की दयनीय स्थिति के साथ राज्य में बस सेवाओं को सुरक्षित और सुचारू रूप से चलाना संभव नहीं है। HRTC प्रबंधन राज्य में लगातार हो रहे हादसों को रोकने में नाकामयाब हो गया है। बार-बार होने वाली “मजिस्ट्रियल पूछताछ” दुर्घटनाओं की संख्या को कम करने के लिए कोई परिणाम नहीं दे पाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूछताछ केवल लोगो को दिखाने और सरकारी रिकॉर्ड के लिए की जा रही है किसी को कभी भी चूक के लिए दंडित नहीं किया जाता और प्रमुख कमियों को दूर करने के लिए कभी कोई कदम नहीं उठाया जाता है।

उन्होंने आगे कहा है कि एचआरटीसी के हालिया फैसले जिसमे “बसो में क्षमता से अधिक सवारियां न बिठाए जाने का फैसला हुआ” उससे लोगों को अधिक असुविधा हुई है। हर दिन लगभग 3 लाख छात्र इन बसों से सफर करते है लेकिन नवीनतम निर्णय के बाद वे ऐसा करने में असमर्थ हुए हैं। हजारों कर्मचारी अपने कार्यालयों तक पहुंचने में असमर्थ हैं।

उनका ये भी कहना है कि लोगों को पूर्व सूचना दिए बिना हर रोज सौ रूटों को निलंबित किया जा रहा है। यह विशेष रूप से बीमार व्यक्तियों, महिलाओं, बुजुर्गों व किसानों के लिए कठिनाइयों का कारण बना है जो अपने खेत का उत्पादन इस सार्वजनिक परिवहन से बाजार तक पहुंचते हैं। अकेले ठियोग में कई बस मार्गों को अभी निलंबित किया जा रहा है इन मार्गों में शिमला-सांभर, शिमला-अलवा, शिमला-गगनघट्टी, शिमला-माहीपुल वाया तल्ली, शिमला-मुंडो, ठियोग जारई, शिमला-श्यामनगर वाया कोटगढ़ व अन्य मुख्य है।

सिंघा ने कहा है कि ड्राइवरों व कंडक्टरों की नई भर्ती करके स्टाफ में चल रही कमी को पूरा करने के अलावा,
इन समस्याओं का कोई अस्थायी समाधान या “स्टॉप गैप सॉल्यूशन” नहीं हो सकता है, इसके अलावा उन बसों की कबाड़ में भेज दिया जाना चाहिए जो “शून्य बुक वैल्यू” यानी नकारा हो चुकी है और साथ ही नए वाहनों की खरीद की जानी चाहिए, यही इसका स्थाई समाधान होगा।

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डॉ परविंदर कौशल ने संभाला नौणी विवि के कुलपति का कार्यभार

UHF nauni's new VC Dr Parvinder Kaushal

सोलन- डॉ परविंदर कौशल ने आज डॉ वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के कुलपति का कार्यभार संभाला। उनकी नियुक्ति की अधिसूचना हिमाचल प्रदेश राज्यपाल सचिवालय द्वारा जारी कर दी गई है। डॉ॰ परविंदर कौशल,इससे पहलेबिरसा कृषि विश्वविद्यालय,रांची,झारखंड के बतौर कुलपति कार्यरत थे।

हिमाचल प्रदेश के जिला सोलन के ग्राम कहन्नीमें जन्में डॉ कौशलनौणी विवि के पूर्व छात्र भी रह चुके हैं। उन्होनें अपनी एमएससी वानिकी की पढ़ाई विश्वविद्यालय से हासिल की है जिसके बादफ्रांस के यूनिवर्सिटी ऑफ नैंसी से फॉरेस्ट्री में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की।

डॉ कौशल पिछले 35 वर्षों से शिक्षण,अनुसंधान और विकास, विस्तार और प्रशासन में सक्रिय रूप से शामिल हैं, जिसके दौरान उन्होंने विभिन्न क्षमताओं में अलग अलग संस्थानों और विश्वविद्यालयों में अपनी सेवाएँ दी। इनमें से प्रमुख हैं, इंडियन काउंसिल फॉर फॉरेस्ट्री रिसर्च एंड एजुकेशन देहरादून (1979-1981), पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, लुधियाना में असिस्टेंट और एसोसिएट प्रोफेसर (1981-1992) और बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, रांचीमें वानिकी संकाय में डीन (2005-2009)। नौणी विश्वविद्यालय में वह पर्यावरण, जल और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के राष्ट्रीय वनीकरण और पर्यावरण विकास बोर्ड के क्षेत्रीय निदेशक और समन्वयक के रूप डॉ कौशल ने कई वर्षो तक कार्य किया।

UHF Nauni's New VC

डॉ कौशल ने 100 से अधिक शोध पत्र और तकनीकी रिपोर्ट प्रकाशित करने के अलावा 13 से अधिक पुस्तकों के अध्याय और मैनुअल लिखे हैं। उन्होंने 26 विश्व कांग्रेस और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में भाग लिया है और 63 परियोजनाओं को संभाला है। कई पुरस्कारों से सम्मानित डॉ कौशल को 1989 में राष्ट्रीय युवा वैज्ञानिक पुरस्कार और 2014 में हिमाचल श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें फ्रेंच सरकार द्वारा भी वर्ष 1984 में डॉक्टरल अनुसंधान के लिए फेलोशिप प्रदान की गई थी। इसके अलावा,उन्होंने फ्रांस, इटली, यूनाइटेड किंगडम, मैक्सिको, ऑस्ट्रिया, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, यूगोस्लाविया, बेल्जियम, हॉलैंड, स्पेन, एस्टोनिया, कनाडा, फिनलैंड, तुर्की, मलेशिया और श्रीलंका सहित कई देशों का दौरा किया है।

डॉ परविंदर कौशल ने विभिन्न महत्वपूर्ण समितियों और समूहों के सदस्य के रूप में काम किया है। इनमें प्रमुख हैं क्षेत्रीय डीन समिति दक्षिण एशिया (2009); कृषि विज्ञान में पीजी पाठ्यक्रम की समीक्षा और पुनर्गठन के लिए नेशनल कोर ग्रुप (आईसीएआर) के सदस्य; आईसीएआर की वानिकी में ब्रॉड सब्जेक्ट मैटर एरिया कमेटी (BSMA)के संयोजक (2007); इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ नैचुरल रेसिंस अँड गम्स के लिए क्विनक्वीनियल रिव्यू टीम (QRT) के सदस्य(2001-2007);शेर-ए-कशमीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी, श्रीनगर की मान्यता के लिए पीयर रिव्यू टीम (आईसीएआर प्रत्यायन बोर्ड) के सदस्य(2008); यूजीसी की कृषि,बागवानी और वानिकी,पर्यावरण,कौशल विकास आदि पर विभिन्नविशेषज्ञ समितियों के सदस्य (2013-2016);आईसीएआर-केंद्रीय कृषि-वानिकी अनुसंधान संस्थान झांसी के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा गठित सदस्य अनुसंधान सलाहकार समितिके सदस्य (2015-17)। डॉ कौशल ने इंटरनेशनल यूनियन ऑफ फॉरेस्ट रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (IUFRO)के रिसर्च ग्रुप ‘फॉरेस्ट स्टैंड एस्टेब्लिशमेंट ऑपरेशंस एंड टेक्नीक्स’के डिप्टी लीडर(2000-05)के रूप में भी काम किया है। वह वृक्षारोपण प्रतिष्ठान (1990-2000) पर IUFROवर्किंग पार्टी के अध्यक्ष भी रहे।

इस अवसर पर डॉ कौशल ने हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, मुख्यमंत्री श्री जय राम ठाकुर और हिमाचल प्रदेश सरकार के पूरे मंत्रीमण्डल का धन्यवाद किया। उन्होनें कहा कि उनका पूरा प्रयास रहेगा कि नौणी विश्वविद्यालय को नई ऊंचाईयों पर ले जाया जा सके।

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