चौंकाने वाला खुलासा: सिरदर्द बने तेंदुओं पर कैसे पायें काबू, हिमाचल वन विभाग के पास नहीं हैं ट्रैंक्यूलाइजर बंदूकें

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फाइल चित्र: हिमाचल वॉचर/सांकेतिक

ट्रैंक्यूलाइजर गन्स का प्रस्ताव एक साल से लटका, हिमाचल में 1990 के बाद लैपर्ड गणना ही नहीं हुई है।

शिमला- हिमाचल में शहरी व ग्रामीण लोगों के लिए सिरदर्द बने तेंदुए कैसे काबू में आएंगे, जब वाइल्ड लाइफ विंग के पास ट्रैंक्यूलाइजर गन्स ही नहीं हैं। सरकार को यह प्रस्ताव भेजे हुए एक वर्ष से भी ज्यादा का समय हो चुका है, मगर इसकी मंजूरी ही नहीं मिल पा रही है। दरअसल, तेंदुओं को जिस इंजेक्शन से बेहोशी की दवा दी जाती है, वह एक खास किस्म की बंदूक होती है, जिसे विदेशों से आयात किया जाता है। हर वर्ष इसके स्पेयर पार्ट्स बदलने आवश्यक होते हैं। हिमाचल में पिछले दो वर्षों से इन बंदूकों का अकाल पड़ा है। सूत्रों के मुताबिक यह प्रस्ताव अभी तक भी मंजूर नहीं हो सका है।

तेंदुओं को काबू में करने के लिए इसी बंदूक द्वारा इंजेक्शन दागा जाता है। बेहोशी के बाद तेंदुओं व अन्य जंगली जानवरों को काबू में करके रेस्क्यू सेंटर तक ले जाया जाता है। हिमाचल में कभी ऊना, सिरमौर, हमीरपुर तो कभी बिलासपुर, मंडी व शिमला में तेंदुओं के हमले बढ़ रहे हैं। यही नहीं, हिमाचल में 1990 के बाद लैपर्ड गणना ही नहीं हुई है। अब पूरे देश के विभिन्न राज्यों में लैपर्ड गणना का कार्य लगभग पूरा होने को है, मगर हिमाचल व उत्तराखंड इसमें शामिल नहीं है, जबकि दोनों ही प्रदेशों में इनकी संख्या बढ़ रही है। अब यह गणना मार्च महीने में शुरू करवाने की तैयारी है।

प्रदेश में वाइल्ड लाइफ विंग ने मुंबई की एक एनजीओ को लैपर्ड बिहेवियर स्टडी का जिम्मा सौंपा है, मगर इसकी रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। जानकारों के मुताबिक प्रदेश के जंगलों में लैपर्ड की बढ़ती संख्या के कारण इसकी फूड चेन का हिस्सा वानर व लंगूर शहरों में शरण ले रहे हैं। प्रदेश के विभिन्न जिलों में तेंदुए के हमले के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। हर साल औसतन 1200 के करीब ऐसे मामले रिपोर्ट होते हैं। विंग के मुताबिक ऐसे मामले तो आते हैं, मगर इनकी संख्या 100-150 के लगभग ही होती है। हिमाचल में 1990 में जब लैपर्ड सेन्सस किया गया था, तो उस दौरान जंगलों में इनकी संख्या 65 के लगभग आंकी गई थी। अब सिकुड़ते जंगलों के कारण इनकी चहलकदमी शहरी क्षेत्रों में भी बढ़ रही है।

स्पीति में 18 स्नो लैपर्ड रिपोर्ट

हिमाचल में बर्फानी तेंदुए की गणना लाहुल-स्पीति में जारी है। अभी तक स्पीति क्षेत्र में 18 स्नो लैपर्ड रिपोर्ट हुए हैं। यह आंकड़ा खुद में दिलचस्प है। स्नो लैपर्ड की बिहेवियर स्टडी अभी तक विश्व में कहीं भी नहीं हो सकी है।

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