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अपनी छुटपुट सी रैली के लिए हिमाचल कांग्रेस ने बंद करवा दी सड़क, यात्रियों से भरी बसें और अन्य वाहनों को घंटो करना पड़ा इंतज़ार

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शिमला- धरना प्रदर्शन, घेराव, ज्ञापन सौंपना यह सब लोकतांत्रिक अधिकार है लेकिन किस संविधान में यह लिखा है कि सड़क जाम करके आम आदमी को परेशान किया जाये, अपने धरना प्रदर्शन की आड़ में लोगो को मजबूरन सड़क पर खडा रखा जाये, वाहनों की आवाजाही को बाधित किया जाये। लेकिन इस देश में शायद ही ऐसी कोई राजनितिक पार्टी होगी जो अनुशासन के साथ धरना प्रदर्शन करती हो।

सोमवार को ऐसा ही उदहारण देखने को मिला जब हिमाचल प्रदेश कांग्रेस पार्टी कार्यकर्ता व नेतागण भारतीय रिजर्व बैंक की शाखा (कसुम्पटी) पहुंचे तो सभी कार्यकर्तों को यह निर्देश दिए गए कि सड़क पर बैठ कर नारेबाजी और नोटबंदी के खिलाफ नारे लगाए जाये और ऐसा ही हुआ कुछ कार्यकर्ता सड़क के बीच में बैठ गए और नारे बाजी करने लग गए। हालाँकि इस रैली मैं रत्ती भर कार्यकर्ता ही मौजूद थे पर फिर भी पुलिस बल का अनुचित प्रयोग कर विकासनगर से पन्थाघाटी जाने वाली सड़क पर सभी वाहनों की आवाजाही को रोक दिया गया।

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तस्वीरों के जरिये आप अच्छी तरह से देख सकते हैं कि आम आदमी की बात करनी वाली पार्टी किस तरह से अपनी रैली को सफल बनने के लिए आम जनता को परेशानी में डाल रही है। यहाँ तक कि बसों के दैनिक रूट को भी कांग्रेस की रैली के चलते बदल दिया गया जिसकी वजह से बसें उन रूटों पर नहीं गयी जहाँ उन्हें जाना था जिसके कारण लोगो को पैदल ही चल कर जाना पड़ा। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस द्वारा नोटबंदी के खिलाफ की गयी इस रैली से आम आदमी को ही मुसीबत का सामना करना पड़ा। सबसे खास बात तो यह है कि यह रैली आम आदमी को नोटबंदी से हो रही असुविधा के खिलाफ थी।
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लोगो की सरकार कह जाने वाली सरकार ने लोगो को ही मुसीबत में डाल दिया जब सवारियों से भरी बस व अपने दैनिक कार्य पर जाने वाले स्थानीय लोगो के वहानों को सड़क के बीच में ही रोक दिया उन्हें आगे नहीं जाने दिया यहाँ तक कि शिमला पुलिस भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं के सामने बेबस नज़र आयी। पार्टी से उन्हें यह निर्देश दिए गए कि किसी भी वाहन को आगे न जाने दिया जाये यहाँ तक कि पुलिस द्वारा एक गाड़ी को खिंच के ले गए।

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यह हाल हिमाचल का नहीं बल्कि पुरे देश का है अपने देखा और पढा होगा कि कहीं पर भी किसी भी पार्टी द्वारा अगर धरना प्रदर्शन होता है तो उसमे आम आदमी को परेशानी होती है, उदाहरण के लिए जाट आरक्षण, पटेल आरक्षण, नोटबंदी, या कोई भी धरना प्रदर्शन जो कि इस देश की राजनीतिक पार्टयों द्वारा किये जाते हैं उन सब प्रदर्शनों में आज आम आदमी को ही मुसीबत का सामना करना पड़ता है। कोई लोग रेल को रोक देते हैं तो कोई चक्का जाम कर के अपनी बातें लोगो तक पहुँचाना चाहते हैं लेकिन वे सब महानुभाव इस बात को भूल जाते है कि उनके द्वारा रेल को रोकना, चक्का जाम इत्यादि करके वे यह नहीं समझते कि उनके अंदर बैठे लोग आम जनता होती है जिनके हित के लिए वे यह राजनितिक पार्टियां धरना प्रदर्शन करती है।

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ऐबीवीपी ने यूजी परीक्षा परिणाम मे हो रही देरी और अनियमिताओं को लेकर किया कुलसचिव का घेराव

ABVP Protest

शिमला-वीरवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद विश्वविद्यालय इकाई ने यूजी (UG ) के परीक्षा परिणाम मे हो रही देरी और अनियमिताओं को लेकर कुलसचिव का घेराव किया व उनके आफिस के बाहर धरना-प्रदर्शन किया!

ABVP protest for ug results

विद्यार्थी परिषद ने निम्न मांगो को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन को कल शाम तक का समय दिया था:

  • यूजी 6th सेमेस्टर का पूरा परीक्षा परिणाम घोषित किया जाए! छात्रों के परीक्षा परिणामों में आ रही डबल स्टार की दिक्कत को शीघ्र ठीक किया जाए!
  • यूजी 2nd और 4th सेमेस्टर का री-आप्पीयर (Re-appear ) परीक्षा परिणाम शीघ्र घोषित किया जाए!
  •  एचपीयू काउंसलिंग में अपीयर छात्रों को अपने रिजल्ट ठीक कराने की तिथि को 20 जुलाई तक किया जाए!
  •  एचपीयू के अलावा दूसरे विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने वाले छात्रों को कॉन्फिडेंशियल रिजल्ट दिया जाए ताकि वह छात्र दूसरे विश्वविद्यालय में ऐडमिशन ले सकें!
  •  यूजी 3rd सेमेस्टर गणित के रिजल्ट को फिर से ईवैलुएट किया जाए!

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद विश्वविद्यालय इकाई ने कहा है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की नाकामियों के कारण हिमाचल के हजारों छात्र हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय और देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेने से वंचित रह रहे है! विद्यार्थी परिषद ने कहा है कि अगर इन सभी मांगों को शीघ्र पूरा नहीं किया गया तो विद्यार्थी पर अपना आंदोलन विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ और तेज करेगी!

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हिमाचल परिवहन की खस्ताहाल बसें, कर्मियों की कमी, पूर्व सूचना बिना रूटों का बंद करना लोगों के लिए बन रहा आफत

Poor HRTC Bus Conditions and Services

शिमला- 20 जून को बंजार में और हाल ही की 1 जुलाई को खलिनी के पास झिंझिडी में हुए दो हालिया बस हादसों ने न केवल सरकार की सुरक्षित आवागमन प्रदान करने में असमर्थता को उजागर किया है, बल्कि इन दुर्घटनाओं के पीछे के वास्तविक कारण की पहचान करने के लिए इसका मायोपिक (नाकाफी) दृष्टिकोण भी बताया है। यह कहना है ठियोग विधानसभा क्षेत्र के विधायक और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के वरिष्ठ नेता राकेश सिंघा का।

सिंघा ने प्रबंध निदेशक, हिमाचल सड़क परिवहन निगम, के माध्यम से एक ज्ञापन सौंप कर 11 जुलाई से पहले आवश्यक मुद्दों के तहत एक बैठक बुलाने के लिए सरकार को नोटिस भेजा है।

इस ज्ञापन में कहा गया है कि पूरे राज्य में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या में हो रही वृद्धि और बस सेवाओं की संख्या में निरंतर में भारी अंतर है। इस अंतर को दूर करने के लिए निर्मित और स्वीकृत सड़कों पर न केवल अतिरिक्त बसें चलाने की आवश्यकता होती है बल्कि आवागमन के वर्तमान सार्वजनिक और निजी मोड को कुशलतापूर्वक और सुरक्षित रूप से चलाने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की भी आवश्यकता होती है।

सिंघा ने कहा कि इस ज्ञापन का मसौदा तैयार करते समय, पूरे राज्य के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन अगर शिमला जिले के परिवहन डिपो में से कुछ में कर्मियों की चल रही कमी की जांच की जाती है, तो यह राज्य में मौजूद गंभीर स्थिति के बारे में वैश्विक दृष्टिकोण पेश करेगा।

हिमाचल प्रदेश के शिमला लोकल डिपो में अभी 240 बसें ही चल पा रही है जबकि शिमला लोकल डिपो के तहत 283 स्वीकृत बस रूट हैं, 111 चालक और 98 परिचालक कम हैं और कर्मचारियों की अत्यधिक कमी को देखते हुए 12 मार्गों को स्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया है। तारादेवी डिपो के तहत ड्राइवरों की कमी 55 है और कंडक्टरों का आंकड़ा 65 पर है।

सिंघा ने ज्ञापन में कहा कि रोहड़ू डिपो में स्थिति समान रूप से दयनीय है, जहां 24 बसें शून्य मान बुक में हैं यानी तय दूरी चल चुकी है और अब और चलने की स्थिति में नही है और इन बसों को एच आर टी सी सड़को पर दौड़ा रहा है जबकि इन बसों को कबाड़खाने में होना चाहिए था। इस डिपो के तहत 16 बसें 9 साल से अधिक पुरानी हैं और अभी भी चल रही हैं और हर कोई जानता है कि राज्य के अंदरूनी हिस्सों में सड़कों की स्थिति क्या है। इसके अलावा ड्राइवरों की कमी का आंकड़ा 49 है और परिचालकों की 46 है।

रामपुर डिपो के तहत जीरो वैल्यू बुक बसों की संख्या 11 है और ड्राइवरों और कंडक्टरों की कमी क्रमशः 60 और 42 है।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परिवहन की इस तरह की दयनीय स्थिति के साथ राज्य में बस सेवाओं को सुरक्षित और सुचारू रूप से चलाना संभव नहीं है। HRTC प्रबंधन राज्य में लगातार हो रहे हादसों को रोकने में नाकामयाब हो गया है। बार-बार होने वाली “मजिस्ट्रियल पूछताछ” दुर्घटनाओं की संख्या को कम करने के लिए कोई परिणाम नहीं दे पाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूछताछ केवल लोगो को दिखाने और सरकारी रिकॉर्ड के लिए की जा रही है किसी को कभी भी चूक के लिए दंडित नहीं किया जाता और प्रमुख कमियों को दूर करने के लिए कभी कोई कदम नहीं उठाया जाता है।

उन्होंने आगे कहा है कि एचआरटीसी के हालिया फैसले जिसमे “बसो में क्षमता से अधिक सवारियां न बिठाए जाने का फैसला हुआ” उससे लोगों को अधिक असुविधा हुई है। हर दिन लगभग 3 लाख छात्र इन बसों से सफर करते है लेकिन नवीनतम निर्णय के बाद वे ऐसा करने में असमर्थ हुए हैं। हजारों कर्मचारी अपने कार्यालयों तक पहुंचने में असमर्थ हैं।

उनका ये भी कहना है कि लोगों को पूर्व सूचना दिए बिना हर रोज सौ रूटों को निलंबित किया जा रहा है। यह विशेष रूप से बीमार व्यक्तियों, महिलाओं, बुजुर्गों व किसानों के लिए कठिनाइयों का कारण बना है जो अपने खेत का उत्पादन इस सार्वजनिक परिवहन से बाजार तक पहुंचते हैं। अकेले ठियोग में कई बस मार्गों को अभी निलंबित किया जा रहा है इन मार्गों में शिमला-सांभर, शिमला-अलवा, शिमला-गगनघट्टी, शिमला-माहीपुल वाया तल्ली, शिमला-मुंडो, ठियोग जारई, शिमला-श्यामनगर वाया कोटगढ़ व अन्य मुख्य है।

सिंघा ने कहा है कि ड्राइवरों व कंडक्टरों की नई भर्ती करके स्टाफ में चल रही कमी को पूरा करने के अलावा,
इन समस्याओं का कोई अस्थायी समाधान या “स्टॉप गैप सॉल्यूशन” नहीं हो सकता है, इसके अलावा उन बसों की कबाड़ में भेज दिया जाना चाहिए जो “शून्य बुक वैल्यू” यानी नकारा हो चुकी है और साथ ही नए वाहनों की खरीद की जानी चाहिए, यही इसका स्थाई समाधान होगा।

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डॉ परविंदर कौशल ने संभाला नौणी विवि के कुलपति का कार्यभार

UHF nauni's new VC Dr Parvinder Kaushal

सोलन- डॉ परविंदर कौशल ने आज डॉ वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के कुलपति का कार्यभार संभाला। उनकी नियुक्ति की अधिसूचना हिमाचल प्रदेश राज्यपाल सचिवालय द्वारा जारी कर दी गई है। डॉ॰ परविंदर कौशल,इससे पहलेबिरसा कृषि विश्वविद्यालय,रांची,झारखंड के बतौर कुलपति कार्यरत थे।

हिमाचल प्रदेश के जिला सोलन के ग्राम कहन्नीमें जन्में डॉ कौशलनौणी विवि के पूर्व छात्र भी रह चुके हैं। उन्होनें अपनी एमएससी वानिकी की पढ़ाई विश्वविद्यालय से हासिल की है जिसके बादफ्रांस के यूनिवर्सिटी ऑफ नैंसी से फॉरेस्ट्री में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की।

डॉ कौशल पिछले 35 वर्षों से शिक्षण,अनुसंधान और विकास, विस्तार और प्रशासन में सक्रिय रूप से शामिल हैं, जिसके दौरान उन्होंने विभिन्न क्षमताओं में अलग अलग संस्थानों और विश्वविद्यालयों में अपनी सेवाएँ दी। इनमें से प्रमुख हैं, इंडियन काउंसिल फॉर फॉरेस्ट्री रिसर्च एंड एजुकेशन देहरादून (1979-1981), पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, लुधियाना में असिस्टेंट और एसोसिएट प्रोफेसर (1981-1992) और बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, रांचीमें वानिकी संकाय में डीन (2005-2009)। नौणी विश्वविद्यालय में वह पर्यावरण, जल और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के राष्ट्रीय वनीकरण और पर्यावरण विकास बोर्ड के क्षेत्रीय निदेशक और समन्वयक के रूप डॉ कौशल ने कई वर्षो तक कार्य किया।

UHF Nauni's New VC

डॉ कौशल ने 100 से अधिक शोध पत्र और तकनीकी रिपोर्ट प्रकाशित करने के अलावा 13 से अधिक पुस्तकों के अध्याय और मैनुअल लिखे हैं। उन्होंने 26 विश्व कांग्रेस और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में भाग लिया है और 63 परियोजनाओं को संभाला है। कई पुरस्कारों से सम्मानित डॉ कौशल को 1989 में राष्ट्रीय युवा वैज्ञानिक पुरस्कार और 2014 में हिमाचल श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें फ्रेंच सरकार द्वारा भी वर्ष 1984 में डॉक्टरल अनुसंधान के लिए फेलोशिप प्रदान की गई थी। इसके अलावा,उन्होंने फ्रांस, इटली, यूनाइटेड किंगडम, मैक्सिको, ऑस्ट्रिया, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, यूगोस्लाविया, बेल्जियम, हॉलैंड, स्पेन, एस्टोनिया, कनाडा, फिनलैंड, तुर्की, मलेशिया और श्रीलंका सहित कई देशों का दौरा किया है।

डॉ परविंदर कौशल ने विभिन्न महत्वपूर्ण समितियों और समूहों के सदस्य के रूप में काम किया है। इनमें प्रमुख हैं क्षेत्रीय डीन समिति दक्षिण एशिया (2009); कृषि विज्ञान में पीजी पाठ्यक्रम की समीक्षा और पुनर्गठन के लिए नेशनल कोर ग्रुप (आईसीएआर) के सदस्य; आईसीएआर की वानिकी में ब्रॉड सब्जेक्ट मैटर एरिया कमेटी (BSMA)के संयोजक (2007); इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ नैचुरल रेसिंस अँड गम्स के लिए क्विनक्वीनियल रिव्यू टीम (QRT) के सदस्य(2001-2007);शेर-ए-कशमीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी, श्रीनगर की मान्यता के लिए पीयर रिव्यू टीम (आईसीएआर प्रत्यायन बोर्ड) के सदस्य(2008); यूजीसी की कृषि,बागवानी और वानिकी,पर्यावरण,कौशल विकास आदि पर विभिन्नविशेषज्ञ समितियों के सदस्य (2013-2016);आईसीएआर-केंद्रीय कृषि-वानिकी अनुसंधान संस्थान झांसी के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा गठित सदस्य अनुसंधान सलाहकार समितिके सदस्य (2015-17)। डॉ कौशल ने इंटरनेशनल यूनियन ऑफ फॉरेस्ट रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (IUFRO)के रिसर्च ग्रुप ‘फॉरेस्ट स्टैंड एस्टेब्लिशमेंट ऑपरेशंस एंड टेक्नीक्स’के डिप्टी लीडर(2000-05)के रूप में भी काम किया है। वह वृक्षारोपण प्रतिष्ठान (1990-2000) पर IUFROवर्किंग पार्टी के अध्यक्ष भी रहे।

इस अवसर पर डॉ कौशल ने हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, मुख्यमंत्री श्री जय राम ठाकुर और हिमाचल प्रदेश सरकार के पूरे मंत्रीमण्डल का धन्यवाद किया। उन्होनें कहा कि उनका पूरा प्रयास रहेगा कि नौणी विश्वविद्यालय को नई ऊंचाईयों पर ले जाया जा सके।

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