जांच में खुलासा: बिना हाउस की मंजूरी के लगी थी स्ट्रीट लाइट्स

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शिमला- निगम के ढली वार्ड में एक कांग्रेसी नेता के घर के रास्ते में बिना स्वीकृति के लाखों की स्ट्रीट लाइटें लगाने के मामले में जांच रिपोर्ट आ गई है। शनिवार को निगम हाउस में सहायक आयुक्त प्रशांत सरकैक ने रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि स्ट्रीट लाइटें निगम के पूर्व डिप्टी मेयर एवं कांग्रेस नेता हरीश जनारथा के कहने पर लगाई गई। रिपोर्ट में बताया गया कि पूर्व डिप्टी मेयर ने निगम के पूर्व एसी को मौखिक तौर पर 26 लाइटें लगाने को कहा था। हालांकि, इसमें से करीब पांच लाख खर्च करके 10 लाइटें लगाई गई।

28 अक्टूबर के हाउस में बिना स्वीकृति के कांग्रेस नेता के घर के रास्ते में अवैध रूप से लाइटें लगाने का मामला उठा था। ढली के पार्षद शैलेेंद्र चौहान ने मामले को उठाया था। उनका कहना था कि उन्होंने वर्ष 2011 में अपने लाइटें लगवाने के लिए प्रस्ताव दिया था। यह प्रस्ताव आज तक सिरे नहीं चढ़ा, मगर कांग्रेस नेता के मौखिक तौर पर कहने मात्र से ही वर्ष 2013 में लाइटें लगा दी गई। उन्होंने कहा था कि पार्षदों के लिए तो निगम हर बार बजट के लिए मना करता है, तो फिर यह लाखों रुपए लाइटों के लिए कहां से आए। पार्षद के सवाल को गंभीरता से लेते हुए मेयर संजय चौहान ने इस पर जांच बिठाई और इस हाउस में रिपोर्ट पेश करने को कहा था।

कई वार्ड बिना लाइट्स के

निगम में पार्षद प्राथमिकता को दरकिनार करके किसी अन्य को तरजीह देकर लाइटें लगाने का यह पहला मामला नहीं है। जाखू, कसुम्पटी, फागली, राम बाजार समेत अन्य वार्डों में इस तरह बिना स्वीकृति के लाइटें लगी हैं। जाखू के पार्षद मनोज कुठियाला ने वर्ष 2011, फागली के पार्षद कल्याण चंद, कसुम्पटी की पार्षद ने 2012 में लाइटें लगवाने का प्रस्ताव दिया था। उनके प्रस्ताव पर आज तक गौर नहीं हुआ है।

जब जनारथा का नाम अाया तो कांग्रेस भाजपा-पार्षदों के बीच नोकझोंक

एसी ने जांच रिपोर्ट में जब जनारथा का नाम लिया तो कांग्रेसी पार्षद आग बबूला हो गए। पार्षद सुशांत कपरेट, अर्चना धवन और नरेंद्र ठाकुर ने बचाव करते हुए कहा कि उनका नाम इस मामले में जबरन घसीटा जा रहा है। उनका इतना कहते ही ढली के पार्षद शैलेेंद्र चौहान कुर्सी से उठे और कांग्रेसियों पर हमला बोल दिया। उन्होंने कहा कि कोई जनारथा का नाम घसीट नहीं रहा है, यह जांच रिपोर्ट में सामने आया है। उन्होंने कहा कि उनकी जनारथा से कोई दुश्मनी नहीं है, उनकी नाराजगी उनके प्रस्ताव को दर किनार कर अन्य को प्राथमिकता दिए जाने को लेकर है।

अधिकारियों को निर्देश पार्षदों को बाइपास न करेंः टिकेंद्र

हाउस की अध्यक्षता करते हुए डिप्टी मेयर टिकेंद्र पंवर ने कहा कि काउंसलर प्रायोर्टी को दरकिनार करना गलत है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भविष्य में यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई कार्य बाइपास कर न हो। उनका कहना था कि पहले पार्षदों के कार्यों को प्राथमिकता मिले, उसके बाद ही अन्य द्वारा दिए गए कार्यों को प्राथमिकता दी जाए। अगर बाइपास करके ही काम किए जाते रहेंगे तो पार्षदों का क्या काम।

कांग्रेस को एनओसी न देने पर भी हंगामा

हाउस में कांग्रेस को भवन विस्तार के लिए एनओसी न दिए जाने के मामले में भी हंगामा हुआ। बीते हाउस में पार्षदों ने कांग्रेस के प्रस्ताव को रिजेक्ट किया था। हाउस शुरू होते ही छोटा शिमला के पार्षद सुरेंद्र चौहान ने सवाल किया कि आखिर किस आधार पर कांग्रेस के प्रस्ताव को रिजेक्ट किया गया। पार्षद रजनी ने कहा कि बीते हाउस में कांग्रेस के प्रस्ताव का विरोध इसलिए किया था कि गरीबों को भी जमीन दी जानी चाहिए। इस पर पार्षद संजय परमार ने कहा कि अगर आप गरीबों के लिए जमीन दिलवाना चाहती हैं तो इस का प्रस्ताव हाउस में लाएं न कि अन्य के प्रस्ताव को विरोध करें। डिप्टी मेयर ने कहा कि पार्षदों को शांत किया और कहा कि इस बारे में अगले हाउस में प्रस्ताव दोबारा से लाया जाएगा।

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