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हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड की कियॉस्क मशीन का खस्ता हाल

“हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड द्वारा बिजली बिल भुगतान के लिए लगाई गई कियॉस्क मशीन के सही काम न करने की वजह से उपभोक्ता है परेशान , राज्य बिजली बोर्ड द्वारा ऑपरेटरों की शिकायत के बाद भी नहीं उठाया जा रहा है सही कदम”
हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड शहर के लागों को बिजली बिल जमा करवाने के लिए लम्बी कतार में खड़े रहने और अपनी सूविधा के लिए जिससे बिजली बिल जमा करने के लिए काम पर लगाए गए बिजली कर्मचारियों की संख्या को कम करने के लिए हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड ने शिमला एम सी ऑफिस की इमारत से सटे एक कैबिन में एक कियॉस्क मशीन लगाई गई है जिसमें उपभोक्ता बिजली बिल के भुगतान को नकद रुप से जल्द जमा करवा सकते है।
हांलकी एचपीएसईबी द्वारा उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए ये भुगतान कांउटर करिब एक साल पहले लगया गया था जिसके बाद इसके रखरखाव और मेनटेंनस की और विभाग का कोई ध्यान ही नहीं गया है , और अब उपभोक्ताओं की सुविधा की लिए लगाया गया ये कियॉस्क भुगतान कांउटर जनता के लिए परेशानी का सबब बन गया है।
इस मशीन में राशि डालने पर 10 में से 8 बार यह मशीन नोटों को बाहर धकेल देती है वो भी बावजुद इसके जब नोटों में किसी तरह की कोई गलती या खराबी नहीं है।
अब अगर कियॉस्क मशीन को ऑपरेट करने के लिए भी कोई व्यक्ति रखा जाता है तो फिर इस मशीन को लगाने का फायदा ही क्या हुआ , और अगर एचपीएसईबी कियॉस्क को ऑपरेट करने के लिए किसी व्यक्ति को रख भी लेता है तो वो व्यक्ति उस मशीन से जल्दी तो खुद ही काम निपटा लेगा ये बात तो पक्की है।
समय की बरबादी के साथ-साथ ही मशीन ज्यादातर समय बिल की कुल राशि का बहुत कम भाग ही स्वीकार करती है और बाकी बची राशि को अगले महिने के बिल में जोड़ देती है। वहीं इस समस्या से निपटने में ऑपरेटर भी खुद को असहाय मानते है।
एक नजर जरा इस विडियो पर भी डाले जो 4 फरवरी 2013 को हिमाचल वाॅचर पर डाली गई थी और इसमें उपभोक्ता और ऑपरेटर के बीच की सारी बात पर भी गौर करें।
किसी भी तरह की टेक्नोलोजी को इस्तेमाल में लाने से पहले उससे जुड़ी जरुरी बातों की जानकारी हासिल करना बेहद जरुरी है ताकि उस टेक्नोलॉजी का सही से इस्तेमाल किया जा सके पर ऐसा करना एचपीएसईबी को शायद जरुरी न लगा हो।
हिमाचल वॉचर एचपीएसईबी का ध्यान जिस ओर ले जाना चाहता है वो ये कि जिस टेक्नोलोजी को हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड इस्तेमाल में ला रहा है उसे सही तरिके से चलाने के लिए उस पर मेहनत करना भी बेहद जरुरी है ताकि उससे अच्छे नतीजे मिल सके ।
आज के समय में प्रौद्योगिकी में दिन प्रतिदिन परिवर्तन होते जा रहें है और किसी भी प्रौद्योगिकी को हर रोज अपडेट करने की आवश्यकता होती है।
अगर किसी भी टेक्नोलोजी का सही फायदा उठाना चाहते है तो उस टेक्नोलॉजी की तरफ पूरा ध्यान केद्रित करने की आवश्यकता होती है न कि एचपीएसईबी की तरह जिन्होंने टेक्नोलॉजी को इस्तेमाल में तो लाया है पर उसे सही और सूचारु रुप से चलाने में वो असर्मथ है और न ही सरकार इस लायक है कि इस टेक्नोलोजी के सही इस्तेमाल और रखरखाव के लिए किसी पढ़े लिखे टेक्निकल कर्मचारी को रख सके जो इसे सही से इस्तेमाल में ला सके।
इसके साथ ही बिजली विभाग की ऑनलाइन बिल चुकाने की सुविधा के भी बुरे हाल है और यही नहीं शहर में जगह -जगह हर कहीं पेड़ो पर बंधी लोहे की तारे पेड़ो को मार रही है , और विभाग का इस तरह का लापरवाह रवैया बडे़ ही दुरभाग्य की बात ही।
तो कृप्या आपसे अनुरोध है कि जल्द से जल्द अपनी बिल भुगतान कांउटर कियॉस्क की तरफ ध्यान दे ताकि जनता की सुविधा के लिए लगाई गई इस मशीन का लाभ उन्हें मिल सके और जनता के समय के साथ ही आपका भी समय बच सकें।
हमेशा की तरह इस बात की उम्मीद बेहद कम है कि विभाग इस समस्या की और गौर करेगा । हिमाचल वॉचर इस सारी समस्या के बारे में एचपीएसईबी को 8 से 10 बार लिखना होगा तब जा कर शायद विभाग इस समस्या को लेकर कुछ कदम उठाए पर हिमाचल वॉचर ये काम तब तक करता रहेगा जब तक की एचपीएसईबी इस समस्या को लेकर उचित काम नहीं करेगा।
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LSD तस्करी मामले में अब हरियाणा से सप्लायर गिरफ्तार, आरोपी संदीप सप्लायर को बदले में देता था गांजा
शिमला: बीते दिनों न्यू शिमला क्षेत्र में पुलिस ने दो आरोपियों को करीब एक करोड़ रुपये की LSD (Lysergic Acid Diethylamide) ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया था। जिसमें एक युवक और युवती शामिल थे। पुलिस ने आरोपियों के पास से 11.57 ग्राम एलएसडी और 562 स्टैंप साइज स्ट्रिप्स बरामद की थी। पुलिस ने अब इस मामले में सप्लायर को गुरुग्राम (हरियाणा) से गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस के अनुसार आरोपी की पहचान नैवियल हैरिसन (27) ,केरल के रूप में हुई है। पुलिस ने जानकारी देते हुए कहा कि जांच के दौरान सामने आया की आरोपी नैवियल हैरिसन और आरोपी संदीप शर्मा काफी समय से एक दूसरे के संपर्क में थे और LSD की तस्करी कर रहे थे। पुलिस ने बताया कि आरोपी नैवियल हैरिसन और आरोपी संदीप शर्मा सिर्फ व्हॉटस्एप कॉल के माध्यम से बातचीत करते थे। आरोपी संदीप नैवियल हैरिसन को बदले में गांजा उपलब्ध करवाता था।
एएसपी हेडक्वार्टर अभिषेक ने मामले की पुष्टी की है। उन्होंने बताया कि मामले में आगामी जांच जारी है।
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हिमाचल प्रदेश में फिर बदलेगा मौसम, 15 और 16 मार्च को बारिश और तेज हवाओं का पूर्वानुमान
शिमला: हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर मौसम करवट लेने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार 15 और 16 मार्च के बीच प्रदेश के कई क्षेत्रों में मौसम खराब रहने की संभावना है। इस दौरान बिजली चमकने, तेज हवाएं चलने और बारिश का पूर्वानुमान जताया गया है।
विभाग के मुताबिक 17 और 18 मार्च को मौसम साफ रहने की उम्मीद है। हालांकि विभाग के मुताबिक 15 से 18 मार्च के बीच प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में मौसम के खराब रहने के भी आसार हैं। इस दौरान अधिकतर स्थानों पर बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हो सकती है।
मौसम विभाग का कहना है कि 14 मार्च की रात से पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की संभावना है, जिसके प्रभाव से प्रदेश में तापमान गिरावट दर्ज की जा सकती है।
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शिमला में 1 करोड़ रुपये का LSD बरामद, जानिए भारत में क्यों प्रतिबंधित है यह नशा और क्या है सजा ?
शिमला: बुधवार को पुलिस ने न्यू शिमला क्षेत्र में एक भवन से करीब एक करोड़ रुपये की LSD (lysergic acid diethylamide) ड्रग्स बरामद की है। बता दें कि भारत में एलएसडी प्रतिबंधित है। एलएसडी रखना, बेचना या तस्करी करना एक गंभीर अपराध है और मात्रा के आधार पर इसकी सजा तय होती है।
मामले में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है जिसमें एक युवक और युवती शामिल है। आरोपियों की पहचान प्रिया शर्मा, निवासी सिरमौर, संदीप शर्मा, निवसी पंजाब (मोगा) को रुप में हुई है। पुलिस ने बताया कि दोनों आरोपियों के पास कुल 11.57 ग्राम एलएसडी ड्रग्स बरामद की गई है। दोनों आरोपियों को खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
पुलिस ने बताया कि हमें गुप्त सूचना मिली थी कि राजधानी में एलएसडी की तस्करी हो रही है। सूचना के आधार पर पुलिस ने एक टीम का गठन किया और न्यू शिमला के हिम निवास में एक कमरे में ठहरे युवक और युवती की तालाशी ली। इस दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से एलएसडी के साथ 562 स्टैंप साइज सिट्रप्स बरामद किए। एएसपी हेडक्वार्टर अभिषेक ने मामले की पुष्टी करते हुए कहा कि आगामी जांच जारी है।
क्या होता है LSD ?
एलएसडी (Lysergic Acid Diethylamide) एक बेहद शक्तिशाली हैलूसिनोजेनिक (मतिभ्रम पैदा करने वाला) नशीला पदार्थ है, जो दिमाग की कार्यप्रणाली को प्रभावित करता है। यह एक सिंथेटिक रासायनिक ड्रग है, जो मस्तिष्क में मौजूद सेरोटोनिन रिसेप्टर्स पर असर डालकर व्यक्ति की सोच, भावनाओं और वास्तविकता की अनुभूति को बदल देता है। एलएसडी बहुत कम मात्रा में भी तेज असर दिखाता है। इसे आमतौर पर छोटे कागज़ के टुकड़ों (ब्लॉटिंग पेपर), टैबलेट, जेल टैब या तरल बूंदों के रूप में बेचा जाता है।
यह कैसे बनता है?
LSD एक सिंथेटिक (कृत्रिम) नशा है जिसे ‘लाइसर्जिक एसिड’ से बनाया जाता है। यह एसिड ‘अर्गट’ (Ergot) नामक एक फंगस (कवक) में पाया जाता है, जो राई और अन्य अनाजों पर उगता है। यह नशा इतना शक्तिशाली होता है कि इसकी खुराक माइक्रोग्राम (mcg) जैसे बेहद सूक्ष्म स्तर पर मापी जाती है।
सेवन करने पर क्या होता है?
एलएसडी का सेवन करने के बाद इसका असर आमतौर पर 30 से 60 मिनट में शुरू हो जाता है और 8 से 12 घंटे या उससे अधिक समय तक रह सकता है। इस दौरान व्यक्ति को एक तरह का “ट्रिप” अनुभव होता है, जिसमें उसकी वास्तविकता को समझने की क्षमता बदल जाती है।
सेवन करने वाले व्यक्ति को निम्न अनुभव हो सकते हैं:
- ऐसी चीजें देखना या सुनना जो वास्तव में मौजूद नहीं होतीं (हैलूसिनेशन)
- समय और स्थान की समझ में बदलाव
- भावनाओं में अचानक परिवर्तन
- वास्तविकता और कल्पना के बीच फर्क समझने में कठिनाई
- अत्यधिक डर, घबराहट और मानसिक तनाव हो सकता है।
- दिल की धड़कन तेज होना, शरीर का तापमान बढ़ना, हाई ब्लड प्रेशर, आंखों की पुतलियों का फैलना, मतली, भूख न लगना, शुगर बढ़ना, नींद न आना, मुंह सूखना और शरीर में कंपन या दौरे पड़ना।
भारत में एलएसडी के खिलाफ कानून
भारत में एलएसडी पूरी तरह प्रतिबंधित है और इसके खिलाफ कड़े प्रावधान Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act (NDPS Act), 1985 के तहत लागू हैं। इस कानून के तहत एलएसडी का उत्पादन, खरीद-फरोख्त, परिवहन, भंडारण या सेवन करना अपराध है।
सजा का प्रावधान
| मात्रा | सजा |
|---|---|
| छोटी मात्रा | अधिकतम 1 वर्ष की जेल या ₹10,000 तक जुर्माना |
| मध्यम मात्रा | 10 वर्ष तक की जेल और ₹1 लाख तक जुर्माना |
| व्यावसायिक मात्रा | 10 से 20 वर्ष तक कठोर कारावास और ₹1–2 लाख तक जुर्माना |
दोबारा अपराध करने पर सजा और भी कठोर हो सकती है।
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